नई दिल्ली : यमन के हूती विद्रोही सऊदी अरब के खिलाफ सैन्य हमलों के साथ प्रचार अभियान भी चला रहे हैं। इस अभियान में अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों और खबरों को इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां नए ‘हथियार’ से आशय ऐसी सूचनाओं को राजनीतिक संदेश बनाकर प्रसारित करने से है। मकसद सऊदी नेतृत्व की छवि पर सवाल उठाना और अपने पक्ष में समर्थन जुटाना बताया गया है। 

इस विवाद के केंद्र में अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी एपस्टीन संबंधी फाइलों पर आधारित रिपोर्टें हैं। इनमें सऊदी शाही दरबार से जुड़े कुछ सहयोगियों द्वारा काबा को ढकने वाले कपड़े के हिस्से एपस्टीन तक पहुंचाए जाने का उल्लेख है। हूती इन्हीं रिपोर्टों को धार्मिक और राजनीतिक आरोपों के साथ प्रसारित कर रहे हैं। हालांकि, संबंधित दस्तावेजों के उल्लेख को सऊदी नेतृत्व की आपराधिक संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। 
प्रचार अभियान में वीडियो, गीत, भाषण, आधिकारिक बयान और सोशल मीडिया पोस्ट शामिल हैं। हूती इन संदेशों के जरिए खुद को धार्मिक मूल्यों के रक्षक के रूप में प्रस्तुत करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उनका मीडिया नेटवर्क टेलीविजन, वेबसाइट, रेडियो और आधिकारिक तथा अनौपचारिक सोशल मीडिया खातों तक फैला है। समूह के विचारों का समर्थन करने वाले प्रभावशाली ऑनलाइन चेहरे भी संदेशों को आगे बढ़ाते हैं। 
यह अभियान मक्का से जुड़े आरोप-प्रत्यारोप के बीच सामने आया है। सऊदी अरब ने हूतियों पर मक्का को निशाना बनाने का आरोप लगाया था, जिसे समूह ने खारिज किया। जवाब में हूती नेताओं ने एपस्टीन से जुड़े विवाद का उल्लेख करके सऊदी पक्ष पर पलटवार किया। प्रकाशित रिपोर्ट के समय तक इन विशेष आरोपों और कपड़े से संबंधित खबरों पर सऊदी अधिकारियों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। प्रतिक्रिया का अभाव आरोपों की पुष्टि नहीं करता। इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि संघर्ष के दौरान सूचनाओं और धार्मिक प्रतीकों को भी राजनीतिक दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे संदेशों को समझते समय दस्तावेज में दर्ज तथ्य, संबंधित पक्ष का आरोप और प्रचार के उद्देश्य से निकाले गए निष्कर्ष के बीच अंतर रखना जरूरी है।

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