सैंटियागो: जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार, शुक्रवार को सेंट्रल चिली के तट के पास 5.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। संस्थान ने बताया कि भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 10 किलोमीटर (6.21 मील) की गहराई पर स्थित था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस भूकंप से किसी बड़े जान-माल के नुकसान या सुनामी की तत्काल कोई सूचना नहीं मिली है। हालांकि स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
GFZ के मुताबिक, भूकंप मध्यम तीव्रता का था और इसके झटके आसपास के कई इलाकों में महसूस किए गए। भूकंप के बाद कुछ समय के लिए लोगों में दहशत का माहौल बन गया और कई लोग एहतियात के तौर पर घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है।
भूकंप क्यों आते हैं?
चिली दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। इसका प्रमुख कारण यह है कि यह देश प्रशांत महासागर के "रिंग ऑफ फायर" (Ring of Fire) क्षेत्र में स्थित है। इस क्षेत्र में कई टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती, खिसकती या एक-दूसरे के नीचे धंसती रहती हैं, जिससे समय-समय पर भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां होती रहती हैं।
चिली के पश्चिमी तट पर नाज़्का प्लेट (Nazca Plate) दक्षिण अमेरिकी प्लेट (South American Plate) के नीचे धंस रही है। इसी भूगर्भीय प्रक्रिया के कारण यहां लगातार भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में मध्यम और बड़े भूकंप आना सामान्य भूवैज्ञानिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
10 किलोमीटर की गहराई का क्या मतलब है?
GFZ के अनुसार यह भूकंप 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। सामान्य तौर पर कम गहराई वाले भूकंप (0–70 किमी) सतह पर अधिक स्पष्ट रूप से महसूस किए जाते हैं। हालांकि किसी भूकंप से होने वाला वास्तविक नुकसान केवल उसकी गहराई पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उसकी तीव्रता, केंद्र से दूरी, स्थानीय भूगर्भीय स्थिति और निर्माण की गुणवत्ता जैसे कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
चिली का भूकंप इतिहास
चिली का नाम दुनिया के सबसे शक्तिशाली भूकंपों के इतिहास में दर्ज है। वर्ष 1960 में यहां 9.5 तीव्रता का वाल्डिविया भूकंप आया था, जिसे अब तक का सबसे शक्तिशाली दर्ज किया गया भूकंप माना जाता है। इसके अलावा 2010 में 8.8 तीव्रता के भूकंप ने भी भारी तबाही मचाई थी। इन घटनाओं के बाद देश ने अपनी आपदा प्रबंधन प्रणाली और भवन निर्माण मानकों को काफी मजबूत बनाया है।
प्रशासन की अपील
स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से शांत रहने और केवल आधिकारिक एजेंसियों द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने को कहा है। यदि किसी क्षेत्र में आफ्टरशॉक (भूकंप के बाद आने वाले छोटे झटके) महसूस हों तो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
फिलहाल किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। राहत एवं आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थिति का आकलन कर रही हैं और आवश्यकता पड़ने पर आगे की जानकारी जारी की जाएगी।