नई दिल्ली। लीबिया में लंबे समय से जारी संघर्ष को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि एक ओर पाकिस्तान खुद को शांति प्रक्रिया में सहयोगी और मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर लीबिया के एक गुट को हथियारों की आपूर्ति करने में उसकी भूमिका बताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान पर आरोप है कि वह लीबिया में विद्रोही सैन्य कमांडर जनरल खलीफा हफ्तार से जुड़े पक्ष को हथियारों की बड़ी डील कर रहा है। इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 4 अरब डॉलर बताई जा रही है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
लीबिया पिछले डेढ़ दशक से राजनीतिक अस्थिरता और गृहयुद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहा है। 2011 में मुअम्मर गद्दाफी के शासन के पतन के बाद देश कई गुटों में बंट गया। अलग-अलग सैन्य और राजनीतिक समूहों के बीच सत्ता को लेकर संघर्ष चलता रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार लीबिया में स्थिरता और शांति बहाली की कोशिश करता रहा है।
पाकिस्तान की ओर से भी कई मौकों पर वैश्विक शांति और कूटनीतिक समाधान की बात कही जाती रही है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि अगर हथियारों की आपूर्ति के आरोप सही साबित होते हैं तो यह उसकी घोषित शांति नीति पर सवाल खड़े कर सकता है।
इस पूरे मामले में चीन की भूमिका को लेकर भी चर्चा हो रही है। कुछ विश्लेषकों का दावा है कि चीन अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के साथ रक्षा और आर्थिक संबंधों का इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि चीन या पाकिस्तान की ओर से ऐसे किसी प्रॉक्सी इस्तेमाल के आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के देशों में हथियारों का कारोबार लंबे समय से भू-राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने का माध्यम रहा है। कई देश अपने रक्षा उद्योग को मजबूत करने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। इसी वजह से लीबिया जैसे संघर्ष प्रभावित देशों में हथियारों की आपूर्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय निगरानी बनी रहती है।
अगर पाकिस्तान और लीबिया के बीच किसी बड़े रक्षा सौदे की पुष्टि होती है, तो इसका असर क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं पहले भी लीबिया में हथियारों की अवैध आपूर्ति को लेकर चिंता जता चुकी हैं।
फिलहाल पाकिस्तान की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर बहस जारी है। एक तरफ वह खुद को शांति और कूटनीतिक समाधान का समर्थक बताता है, वहीं दूसरी ओर हथियार सौदों से जुड़े दावे उसकी छवि को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और तथ्य सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।