बलूचिस्तान। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में लोगों को कथित तौर पर जबरन लापता किए जाने की घटनाओं को लेकर एक बार फिर मानवाधिकार संबंधी सवाल उठने लगे हैं। खुजदार जिले के नाल इलाके में रहने वाले 32 वर्षीय ड्राइवर मुनीर अहमद को कथित तौर पर हथियारबंद लोगों ने उनके घर से अगवा कर लिया। परिवार का आरोप है कि 2 अक्टूबर 2026 की रात करीब नौ बजे हथियारबंद लोगों का एक समूह उनके घर पहुंचा और मुनीर को अपने साथ ले गया। घटना के बाद से उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। स्थानीय समाचार संस्थान 'द बलूचिस्तान पोस्ट' की 8 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर के परिजनों ने इस घटना के लिए कथित तौर पर सरकार समर्थित एक हथियारबंद समूह को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुनीर अहमद शरीफ के बेटे हैं और पेशे से ड्राइवर हैं। वह खुजदार जिले के नाल इलाके में अपने परिवार के साथ रहते थे। परिजनों का कहना है कि घटना की रात अचानक हथियारबंद लोग उनके घर पहुंचे और मुनीर को जबरन अपने साथ ले गए। परिवार के अनुसार, उन्हें यह नहीं बताया गया कि मुनीर को कहां ले जाया जा रहा है या उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की जा रही है।घटना के बाद से परिवार मुनीर की तलाश में परेशान है। रिश्तेदारों का कहना है कि उन्हें उनके ठिकाने या स्थिति के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। इससे परिवार में चिंता बढ़ गई है।
सरकार समर्थित हथियारबंद समूह पर परिवार ने लगाया आरोप
मुनीर अहमद के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उन्हें घर से ले जाने वाले लोग एक कथित सरकार समर्थित समूह से जुड़े थे, जिसे स्थानीय स्तर पर 'डेथ स्क्वाड' कहा जाता है।बलूचिस्तान में कुछ मानवाधिकार संगठन और राजनीतिक समूह ऐसे हथियारबंद संगठनों के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं, जिन पर वे सुरक्षा एजेंसियों के समर्थन से काम करने का आरोप लगाते हैं।हालांकि, मुनीर अहमद के मामले में किसी समूह की पहचान या सरकारी एजेंसियों की संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट में भी परिवार के आरोपों के आधार पर घटना का विवरण दिया गया है।परिजनों की सबसे बड़ी चिंता मुनीर की सुरक्षा और उनके वर्तमान ठिकाने को लेकर है। परिवार जानना चाहता है कि उन्हें कहां रखा गया है और उनके साथ क्या हुआ है।
एक महीने तक लापता रहने के बाद घर लौटा दूसरा युवक
मुनीर अहमद के लापता होने की खबर के बीच बलूचिस्तान से एक अन्य व्यक्ति के घर लौटने की जानकारी भी सामने आई है।द बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, ग्वादर जिले के पासनी इलाके से कथित तौर पर लापता हुए रशीद बलोच 27 सितंबर को अपने घर लौट आए।रशीद बलोच कादिर बख्श के बेटे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें 30 अगस्त 2026 को पासनी के शादी कौर इलाके से कथित तौर पर ले जाया गया था।इसके बाद करीब एक महीने तक उनका कोई स्पष्ट पता नहीं चला। हालांकि, सितंबर के अंतिम सप्ताह में उनके घर लौटने की जानकारी सामने आई।रशीद किन परिस्थितियों में लापता हुए थे और उनकी वापसी कैसे हुई, इसके बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि उन्हें किसने हिरासत में रखा था।
बलूचिस्तान में लंबे समय से उठ रहा जबरन गुमशुदगी का मुद्दा
बलूचिस्तान में लोगों को जबरन गायब किए जाने के आरोप लंबे समय से सामने आते रहे हैं। स्थानीय परिवारों और मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि कई व्यक्तियों को सुरक्षा बलों, खुफिया एजेंसियों या अज्ञात हथियारबंद समूहों द्वारा हिरासत में लिया जाता है।इन संगठनों के अनुसार, कुछ मामलों में संबंधित व्यक्तियों को औपचारिक कानूनी प्रक्रिया के बिना अज्ञात स्थानों पर रखा जाता है और उनके परिवारों को कोई जानकारी नहीं दी जाती।हालांकि, इन आरोपों के सभी मामलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रत्येक घटना में जिम्मेदारी तय करने के लिए अलग जांच और प्रमाण आवश्यक हैं।कथित जबरन गुमशुदगी के मामलों में परिवारों की प्रमुख मांग होती है कि लापता व्यक्तियों की स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि उन्हें हिरासत में लिया गया है, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जाए।
अगस्त में 87 लोगों के लापता होने का दावा
बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद (HRCB) की अगस्त 2026 की मासिक रिपोर्ट में कथित जबरन गुमशुदगी के 87 मामले दर्ज करने का दावा किया गया है।संगठन के अनुसार, इनमें आठ महिलाएं और 17 किशोर भी शामिल थे। ये आंकड़े मानवाधिकार संगठन द्वारा दर्ज किए गए आरोपों पर आधारित हैं।बलूच यकजेहती कमेटी के मानवाधिकार विभाग ने भी अपनी अर्धवार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि कई गुमशुदगी के मामलों की जानकारी घटना के कई सप्ताह या महीनों बाद सामने आती है।संगठन का दावा है कि कुछ परिवार डर और कथित धमकियों के कारण शुरुआत में मीडिया या मानवाधिकार संगठनों से संपर्क नहीं करते।
अज्ञात हथियारबंद समूहों की गतिविधियों पर चिंता
बलूचिस्तान में विभिन्न हथियारबंद समूहों की गतिविधियों और हिंसक घटनाओं को लेकर भी लगातार खबरें सामने आती रही हैं।सितंबर में खुजदार जिले के ग्रेशा इलाके में दो व्यक्तियों पर हुए हमले के मामले में बलूच यकजेहती कमेटी ने कथित डेथ स्क्वाड पर आरोप लगाया था।संगठन के अनुसार, 17 सितंबर को शादी समारोह में जा रहे दो लोगों पर हमला किया गया था। इस घटना में आलम खान की मौत हो गई थी, जबकि बरकत बलोच गंभीर रूप से घायल हुए थे। बरकत की भी 28 सितंबर को उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी।संगठन ने इस घटना को नागरिकों के खिलाफ हिंसा के व्यापक पैटर्न से जोड़ते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की थी। हालांकि, हमले के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान को लेकर संगठन के आरोप स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुए थे।
परिवारों की चिंता और मानवाधिकारों से जुड़ा सवाल
किसी व्यक्ति के अचानक लापता होने और उसके बारे में लंबे समय तक जानकारी नहीं मिलने से परिवार के सामने गंभीर अनिश्चितता पैदा हो जाती है।ऐसे मामलों में परिजनों को यह भी जानकारी नहीं मिल पाती कि संबंधित व्यक्ति जीवित है या नहीं और यदि उसे हिरासत में लिया गया है तो किस कानूनी आधार पर रखा गया है।मानवाधिकारों के सिद्धांतों के अनुसार, किसी व्यक्ति को कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया के बिना मनमाने ढंग से हिरासत में नहीं रखा जा सकता।यदि किसी व्यक्ति को किसी अपराध के संदेह में गिरफ्तार किया जाता है, तो उसके साथ संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार व्यवहार किया जाना आवश्यक है।इसी कारण जबरन गुमशुदगी के आरोपों को मानवाधिकार संगठन गंभीर मामला मानते हैं और निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।
मुनीर अहमद के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं
फिलहाल खुजदार जिले के नाल इलाके से लापता मुनीर अहमद के ठिकाने के बारे में कोई पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।उनके परिवार का आरोप है कि हथियारबंद लोग उन्हें घर से जबरन ले गए थे। दूसरी ओर, रशीद बलोच के लगभग एक महीने बाद घर लौटने की घटना ने यह सवाल फिर उठाया है कि कथित तौर पर लापता किए गए लोगों के साथ क्या होता है और उनकी हिरासत से संबंधित जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं हो पाती।मुनीर अहमद के मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि भी सामने नहीं आई है।बलूचिस्तान में मानवाधिकार संगठन लंबे समय से कथित जबरन गुमशुदगी के मामलों की स्वतंत्र जांच, लापता लोगों की जानकारी सार्वजनिक करने और जिम्मेदार पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते रहे हैं।मुनीर अहमद के लापता होने का ताजा मामला भी इसी व्यापक चिंता से जुड़ गया है। परिवार अब उनकी सुरक्षित वापसी और उनके ठिकाने के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद कर रहा है।
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