न्यूयॉर्क: भारतीय-अमेरिकी कांग्रेसमैन रो खन्ना ने 2028 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने की संभावना को खुला रखा है। उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले में उनके परिवार की भी भूमिका होगी, लेकिन वह अमेरिका के भविष्य पर होने वाली बहस में हिस्सा लेना चाहते हैं।
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री केविन रड ने जब उनसे सीधे पूछा कि क्या वह चुनाव लड़ने के बारे में सोच रहे हैं, तो खन्ना ने कहा कि लगभग 20 डेमोक्रेट इस पर विचार कर रहे हैं और शायद 10 या 12 लोग चुनावी दौड़ में शामिल होंगे।
एशिया सोसाइटी में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, "यह परिवार का फ़ैसला है। चाहे मैं चुनाव लड़ने का फ़ैसला करूँ या किसी ऐसे व्यक्ति का समर्थन करूँ जो चुनाव लड़ रहा हो, मैं इस बातचीत में ज़रूर शामिल रहूँगा।"
खन्ना ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव लड़ना मुश्किल है, क्योंकि बहुत सारे उम्मीदवारों में से ज़्यादातर का हारना तय होता है। उन्होंने 2028 के चुनाव को एक ऐसे फ़ैसले के तौर पर देखा जिसमें अमेरिका को यह तय करना होगा कि वह एक विविधतापूर्ण समाज को अपनाएगा या खुद को दुनिया से अलग-थलग कर लेगा।
उन्होंने कहा, "मैं निश्चित रूप से उस बातचीत का हिस्सा बनना चाहता हूँ।" खन्ना का तर्क था कि डेमोक्रेट्स को एक ऐसा आर्थिक कार्यक्रम चाहिए जो उन समुदायों तक पहुँचे जिनकी औद्योगिक नौकरियाँ चली गई हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय आदर्शों की बात का असर तभी होगा जब मतदाता अपने और अपने बच्चों के लिए भविष्य देख पाएँगे।
उन्होंने इस तर्क को आप्रवासन (इमिग्रेशन) से जोड़ा। खन्ना ने कहा कि राजनेताओं ने फ़ैक्टरियाँ बंद होने और आर्थिक नीतियों की विफलता के लिए आप्रवासियों को दोषी ठहराया है। बेहतर तरीका यह होगा कि उन जगहों पर निवेश और नौकरियाँ लाई जाएँ जो नई अर्थव्यवस्था के फ़ायदों से वंचित महसूस करती हैं।
खन्ना ने अपनी राजनीतिक सोच की भारतीय जड़ों के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि उनके दादाजी को 1930 और 1940 के दशक में महात्मा गाँधी के आज़ादी के आंदोलन में हिस्सा लेने के कारण अंग्रेज़ों ने जेल में डाल दिया था। परिवार के इस इतिहास ने उन्हें कम उम्र में ही यह एहसास दिला दिया था कि राजनीति ज़िंदगी बदल सकती है।
उनका जन्म फ़िलाडेल्फ़िया में हुआ था और उनके माता-पिता भारत से आकर वहाँ बसे थे। शिकागो में पढ़ाई के दौरान, उन्होंने स्टेट सीनेट के एक उम्मीदवार के लिए घर-घर जाकर प्रचार किया था, जो बाद में राष्ट्रपति बराक ओबामा बने। खन्ना ने बताया कि जब युवा उनसे पूछते हैं कि राष्ट्रपति के लिए कैसे काम किया जाए, तो वह उन्हें सलाह देते हैं कि वे स्कूल में ही किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढें जो 15 साल बाद व्हाइट हाउस पहुँच सकता हो और उस व्यक्ति के लिए प्रचार करें। रड के साथ उनकी ज़्यादातर बातचीत इस बात पर केंद्रित थी कि अगले राष्ट्रपति को किस तरह के देश का नेतृत्व करना चाहिए। खन्ना ने पूरे अमेरिका में आर्थिक अवसरों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े फैसलों में मज़दूरों की मज़बूत भूमिका और ऐसी विदेश नीति की वकालत की जो दूसरे देशों का भरोसा फिर से जीत सके।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ताकत का एक हिस्सा अलग-अलग बैकग्राउंड वाले लोगों को एक साथ लाने की उसकी क्षमता में है। लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि विविधतापूर्ण लोकतंत्र के पक्ष में बात रखने के लिए उन आर्थिक चिंताओं को दूर करना ज़रूरी है, जिन्होंने पुराने औद्योगिक समुदायों में अपनी जगह बना ली है।
खन्ना कैलिफ़ोर्निया के एक ऐसे ज़िले का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें सिलिकॉन वैली का कुछ हिस्सा शामिल है। 2028 के संभावित चुनाव अभियान पर उनकी ये बातें टेक्नोलॉजी, अमेरिका-चीन संबंधों, आप्रवासन और अमेरिकी विदेश नीति की दिशा पर हुई व्यापक चर्चा के दौरान सामने आईं।
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