इस्लामाबाद। पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में लोगों के कथित जबरन लापता होने की घटनाओं ने एक बार फिर मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अलग-अलग इलाकों से 15 वर्षीय छात्र सहित 10 लोगों को कथित तौर पर हिरासत में लेने के बाद अज्ञात स्थानों पर ले जाया गया है। इन लोगों के परिजनों को उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। दूसरी ओर, केच जिले में पहले से लापता चार अन्य लोगों के मिलने की खबर सामने आई है। स्थानीय मानवाधिकार संगठनों ने इन घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए लापता लोगों की तत्काल सुरक्षित वापसी और निष्पक्ष जांच की मांग की है।स्थानीय समाचार संगठन द बलूचिस्तान पोस्ट की 4 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, लापता होने की घटनाएं अवारान, ग्वादर क्षेत्र के पसनी, क्वेटा और पंजगुर सहित विभिन्न इलाकों में दर्ज की गई हैं। स्थानीय सूत्रों और पीड़ित परिवारों ने पाकिस्तानी सुरक्षा बलों तथा खुफिया एजेंसियों पर लोगों को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थानों पर रखने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।रिपोर्ट के मुताबिक, अवारान जिले के झाओ इलाके में 1 नवंबर को सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर छापेमारी की थी। इस दौरान दाऊद के बेटे मौलाबख्श और उनके पुत्र गफ्फार को हिरासत में लेने का आरोप लगाया गया है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि दोनों को अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और उसके बाद से उनके बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
इसी इलाके में अगले दिन एक अन्य घटना सामने आई। आरोप है कि 2 नवंबर को पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों ने अहमद के बेटे दोस्त मोहम्मद को हिरासत में लिया। स्थानीय सूत्रों ने उनके साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि तीनों व्यक्ति अब भी लापता हैं।पसनी के शादी कौर इलाके से भी दो भाइयों के लापता होने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, दिलदार के बेटे कहदा गंज और बेगमान को 1 नवंबर को कथित तौर पर सुरक्षा बलों ने हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। परिवार के सदस्यों को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।इन घटनाओं के बीच बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा से चार व्यक्तियों के कथित तौर पर लापता होने के मामले सामने आए हैं। इनमें 15 वर्षीय छात्र याह्या बलोच का मामला विशेष रूप से चिंता का विषय बना हुआ है।याह्या बलोच, पीर मोहम्मद के बेटे हैं। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, 27 अक्टूबर की रात लगभग तीन बजे क्वेटा के किल्ली कंबरानी इलाके में स्थित उनके घर से उन्हें कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था। परिवार और स्थानीय सूत्रों ने इस घटना में इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI), मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) तथा काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) के कर्मियों की संलिप्तता का आरोप लगाया है।हालांकि, संबंधित एजेंसियों की ओर से इन आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक बयान रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। नाबालिग छात्र के लापता होने की घटना ने बच्चों की सुरक्षा और उनके मौलिक अधिकारों को लेकर भी चिंता बढ़ाई है।
क्वेटा में लापता बताए गए अन्य लोगों में 28 वर्षीय दुकानदार जफर बलोच शामिल हैं। वह हाजी गुलाम मोहम्मद के बेटे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें 16 अक्टूबर को किरानी रोड इलाके से कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि यह दूसरी बार है जब जफर बलोच को कथित जबरन गुमशुदगी का सामना करना पड़ा है।इसके अलावा, 20 वर्षीय छात्र किफायत बलोच को 18 सितंबर को बलूचिस्तान विश्वविद्यालय के बाहर से कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था। वह क्वेटा के ईस्टर्न बाइपास इलाके के निवासी हैं।एक अन्य मामले में 25 वर्षीय रेहड़ी-पटरी विक्रेता मोहम्मद आजम के लापता होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें 20 अगस्त को एयरपोर्ट रोड स्थित एलाइड स्कूल के पास से कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था।पंजगुर जिले में भी 18 वर्षीय ड्राइवर जुबैर बलोच के लापता होने की खबर है। वह सैयद बलोच के बेटे हैं। बताया गया है कि 5 अक्टूबर को पारोम क्षेत्र की जिराक सीमा के पास फ्रंटियर कोर के जवानों ने कथित तौर पर उन्हें हिरासत में लिया था। उनका भी अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।इस बीच, केच जिले से चार पहले से लापता लोगों के मिलने की खबर ने उनके परिवारों को राहत दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन चारों व्यक्तियों का पता 25 से 28 अक्टूबर के बीच तुर्बत क्षेत्र में चला।इनमें हाजी नासिर के दो बेटे तैयब नासिर और पजीर नासिर शामिल हैं। दोनों भाइयों के बारे में बताया गया है कि वे तुर्बत के आपसर इलाके से लापता हुए थे। करीब आठ दिनों बाद 25 अक्टूबर को उनके मिलने की जानकारी सामने आई।इसी तरह मंड निवासी इस्माइल बलोच के बेटे इकराम बलोच 28 अक्टूबर को मिले। वह कथित तौर पर दो दिन पहले लापता हुए थे।चौथे व्यक्ति की पहचान गुलाम जान बलोच के रूप में हुई है। वह सालेह मोहम्मद के बेटे और उमरी कान सामी इलाके के निवासी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वह 27 मई 2025 से लापता थे और करीब 17 महीने बाद 27 अक्टूबर 2026 को मिले। बताया गया है कि मिलने के बाद उन्हें पुलिस के हवाले किया गया।
महत्वपूर्ण बात यह है कि केच जिले में मिले ये चार व्यक्ति हाल में लापता बताए गए 10 लोगों से अलग हैं। इसलिए चार व्यक्तियों के मिलने का अर्थ यह नहीं है कि ताजा 10 मामलों में से चार लोगों की वापसी हो चुकी है।दूसरी ओर, बलूचिस्तान में लापता व्यक्तियों के लिए संघर्ष कर रहे संगठन वॉयस फॉर बलूच मिसिंग पर्सन्स (VBMP) का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। क्वेटा प्रेस क्लब के बाहर संगठन का धरना 6,408वें दिन भी जारी रहा।संगठन के अध्यक्ष नसरुल्लाह बलोच ने कथित जबरन गुमशुदगी की घटनाओं की निंदा करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को बिना कानूनी प्रक्रिया के अज्ञात स्थान पर रखना उसके बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने मांग की कि यदि किसी व्यक्ति पर अपराध का आरोप है तो उसे अदालत के सामने पेश किया जाना चाहिए।मानवाधिकार परिषद बलूचिस्तान (HRCB) की सितंबर 2026 की रिपोर्ट में भी चिंताजनक आंकड़े सामने आए थे। संगठन ने उस महीने जबरन गुमशुदगी के 54 मामले दर्ज किए थे। इसके अतिरिक्त 66 लोगों की मौत के मामले भी दर्ज किए गए थे। संगठन ने इन घटनाओं के लिए विभिन्न सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों पर आरोप लगाए थे। ये आंकड़े संगठन द्वारा संकलित हैं और इन्हें स्वतंत्र न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी लंबे समय से विवाद का विषय रही है। प्रभावित परिवार लगातार अपने परिजनों के बारे में जानकारी देने और उन्हें अदालत के सामने प्रस्तुत करने की मांग कर रहे हैं।फिलहाल 15 वर्षीय छात्र समेत 10 लोगों के लापता होने की ताजा रिपोर्ट ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि घटनाओं की पारदर्शी जांच और प्रभावित परिवारों को विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है।