म्यूनिख। वर्ल्ड उइघुर कांग्रेस (WUC) ने अपनी ताजा साप्ताहिक रिपोर्ट में चीन की निगरानी व्यवस्था, शिनजियांग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र—जिसे WUC ‘पूर्वी तुर्किस्तान’ कहता है—में मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों और विदेशों में चीन से जुड़े संस्थानों की गतिविधियों को लेकर चिंता जताई है। संगठन ने सेंटर फॉर एडवांस्ड डिफेंस स्टडीज (C4ADS) की नई रिपोर्ट ‘Monitoring the Frontier’ का हवाला देते हुए दावा किया कि चीन के अलग-अलग क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाली निगरानी और नियंत्रण प्रणालियां आपस में जुड़ी हुई हैं।C4ADS की रिपोर्ट 29 सितंबर को प्रकाशित हुई। इसमें शिनजियांग, तिब्बत, इनर मंगोलिया और हांगकांग में निगरानी तथा नियंत्रण के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीकों और उनसे जुड़े नेटवर्क का अध्ययन किया गया है। C4ADS का कहना है कि इन क्षेत्रों में मौजूद व्यवस्थाओं को अलग-अलग नीतियों के रूप में देखने के बजाय एक व्यापक और आपस में जुड़ी संरचना के तौर पर समझना चाहिए।
बायोमेट्रिक डेटा से जुड़े 135 कॉन्ट्रैक्ट
WUC के मुताबिक, C4ADS के शोधकर्ताओं ने शिनजियांग में ऐसे 135 कॉन्ट्रैक्ट की पहचान की है, जिनमें बायोमेट्रिक डेटा एकत्र करने वाली तकनीकों का उल्लेख है। बायोमेट्रिक डेटा में आम तौर पर चेहरे की पहचान, फिंगरप्रिंट और व्यक्ति की अन्य विशिष्ट शारीरिक पहचान से संबंधित जानकारी शामिल हो सकती है।रिपोर्ट में इन तकनीकों के इस्तेमाल को व्यापक निगरानी व्यवस्था से जोड़कर देखा गया है। WUC का आरोप है कि ऐसी तकनीकें उइघुर और अन्य समुदायों की निगरानी को और व्यापक बना सकती हैं। हालांकि, इन निष्कर्षों को C4ADS और WUC के विश्लेषण तथा दावों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।C4ADS की मई 2026 की एक अन्य रिपोर्ट में भी कहा गया था कि शिनजियांग क्षेत्र में डेटा सेंटर बायोमेट्रिक और व्यवहार संबंधी डेटा को प्रोसेस करने वाली व्यापक निगरानी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उस रिपोर्ट ने सरकारी दस्तावेजों और तकनीकी बुनियादी ढांचे का विश्लेषण किया था।
Uniview से जुड़े 54 कॉन्ट्रैक्ट का दावा
WUC की साप्ताहिक रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण दावा चीनी सर्विलांस कंपनी Uniview को लेकर किया गया है। संगठन के मुताबिक, C4ADS ने निगरानी से संबंधित 54 कॉन्ट्रैक्ट में Uniview का उल्लेख पाया। रिपोर्ट में कहा गया कि कई मामलों में कंपनी की तकनीक या उत्पादों का संबंध तीसरे पक्ष के माध्यम से सामने आया।WUC ने इस तथ्य को महत्वपूर्ण बताया क्योंकि Uniview अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में रही कंपनी है। C4ADS के विश्लेषण का उद्देश्य यह समझना है कि प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय जांच के बावजूद निगरानी से जुड़ी तकनीकें किस प्रकार अलग-अलग सप्लाई और कॉन्ट्रैक्ट नेटवर्क के जरिए इस्तेमाल हो सकती हैं।
चार क्षेत्रों की निगरानी व्यवस्था का अध्ययन
‘Monitoring the Frontier’ में केवल शिनजियांग पर ध्यान केंद्रित नहीं किया गया है। इसमें तिब्बत, इनर मंगोलिया और हांगकांग की निगरानी और नियंत्रण प्रणालियों को भी शामिल किया गया है।C4ADS ने रिपोर्ट के परिचय में कहा है कि इन क्षेत्रों में चीन की निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था के पीछे समान प्रकार का बुनियादी ढांचा दिखाई देता है। संस्था के अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक, कंपनियों और सरकारी संस्थानों के बीच संबंधों का अध्ययन यह समझने में मदद कर सकता है कि निगरानी की यह व्यवस्था कैसे काम करती है।
मानवाधिकारों को लेकर लंबे समय से चिंता
शिनजियांग में उइघुर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति को लेकर कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की 2022 की आकलन रिपोर्ट ने क्षेत्र में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का उल्लेख करते हुए कहा था कि कुछ कार्रवाइयां मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आ सकती हैं। WUC ने अपनी ताजा रिपोर्ट में इसी व्यापक मानवाधिकार बहस के बीच नई सर्विलांस रिपोर्ट को रखा है।चीनी सरकार शिनजियांग में मानवाधिकार उल्लंघनों और उइघुर समुदाय के दमन से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय आरोपों को खारिज करती रही है। इसलिए WUC और अन्य अधिकार संगठनों के आरोपों के साथ चीन के आधिकारिक रुख को भी इस विवाद के महत्वपूर्ण पक्ष के रूप में देखा जाता है।
विदेशों में गतिविधियों को लेकर भी चिंता
WUC की रिपोर्ट केवल चीन के भीतर सर्विलांस व्यवस्था तक सीमित नहीं है। संगठन ने विदेशों में चीन से जुड़े सरकारी या राज्य-संबद्ध संस्थानों की गतिविधियों पर भी चिंता जताई है।WUC की पिछली रिपोर्टों में भी प्रवासी उइघुर समुदाय की डिजिटल निगरानी, ऑनलाइन गतिविधियों और कथित अंतरराष्ट्रीय दबाव के मुद्दे उठाए गए हैं। सितंबर की एक साप्ताहिक रिपोर्ट में संगठन ने AI आधारित निगरानी से जुड़ी एक अलग रिपोर्ट का उल्लेख किया था, जिसमें उइघुर प्रवासी समुदाय और अधिकार संगठनों से जुड़े ऑनलाइन समूहों की निगरानी के आरोप सामने आए थे।अगस्त में WUC ने एक अन्य रिपोर्ट में विदेशों में रह रहे उइघुर समुदायों के खिलाफ कथित ‘ट्रांसनेशनल रिप्रेशन’ को लेकर भी चिंता व्यक्त की थी। इसमें डिजिटल निगरानी, ऑनलाइन उत्पीड़न और सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान डराने-धमकाने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही बहस
नई C4ADS रिपोर्ट के बाद निगरानी तकनीक, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई नेटवर्क को लेकर बहस एक बार फिर तेज हुई है। आधुनिक सर्विलांस तकनीक का इस्तेमाल कानून-व्यवस्था और सुरक्षा जैसे उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, लेकिन व्यापक बायोमेट्रिक डेटा संग्रह और नागरिकों की निगरानी से निजता तथा मानवाधिकारों से जुड़े सवाल भी उठते हैं।C4ADS ने अपने शोध में खास तौर पर उन कंपनियों, सरकारी संस्थानों और तकनीकी नेटवर्क के संबंधों को समझने की कोशिश की है, जो इन निगरानी व्यवस्थाओं को संभव बनाते हैं। संस्था चीन से जुड़े सुरक्षा और मानवाधिकार विषयों पर पहले भी कई रिपोर्ट प्रकाशित कर चुकी है।फिलहाल WUC ने ‘Monitoring the Frontier’ के निष्कर्षों को आधार बनाते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान चीन की निगरानी व्यवस्था और उइघुर समुदाय से जुड़े मानवाधिकार मुद्दों की ओर खींचने की कोशिश की है। 135 बायोमेट्रिक तकनीक से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट और Uniview से जुड़े बताए गए 54 सर्विलांस कॉन्ट्रैक्ट इस नई रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों में शामिल हैं। इन निष्कर्षों के बाद निगरानी तकनीक के इस्तेमाल, कंपनियों की भूमिका और नागरिक अधिकारों पर उसके प्रभाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।
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