टेक्नोलॉजी डेस्क, नई दिल्ली। नया स्मार्टफोन खरीदते समय ज्यादातर लोग कैमरा क्वालिटी, प्रोसेसर की स्पीड, बैटरी क्षमता और एआई फीचर्स को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन फोन की मजबूती यानी ड्यूरेबिलिटी को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि महंगे स्मार्टफोन में एक छोटी सी गिरावट भी हजारों रुपये का नुकसान करा सकती है। इसलिए नया फोन खरीदते समय स्क्रीन प्रोटेक्शन, फ्रेम मैटीरियल, वाटर रेजिस्टेंस, रिपेयर कॉस्ट और डिजाइन जैसी चीजों को भी अपनी चेकलिस्ट में शामिल करना जरूरी है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बड़ी संख्या में यूजर्स समय से पहले नया स्मार्टफोन सिर्फ इसलिए खरीद लेते हैं क्योंकि उनके पुराने फोन का स्क्रीन ग्लास टूट जाता है। खासतौर पर प्रीमियम स्मार्टफोन की OLED या फोल्डेबल स्क्रीन बदलवाने का खर्च काफी ज्यादा हो सकता है। कई मामलों में स्क्रीन रिप्लेसमेंट की कीमत 15 हजार से 35 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। ऐसे में फोन की मजबूती पर ध्यान देना लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकता है।
सिर्फ गोरिल्ला ग्लास होना काफी नहीं
कई यूजर्स मानते हैं कि फोन में गोरिल्ला ग्लास लगा है तो वह पूरी तरह सुरक्षित रहेगा, लेकिन ऐसा नहीं है। स्मार्टफोन की मजबूती कई चीजों पर निर्भर करती है। इसमें फ्रेम मैटीरियल, डिजाइन, इंटरनल स्ट्रक्चर और शॉक एब्जॉर्बिंग क्षमता अहम भूमिका निभाते हैं।
प्रीमियम स्मार्टफोन में अब टाइटेनियम और एयरोस्पेस ग्रेड एल्यूमिनियम फ्रेम का इस्तेमाल बढ़ रहा है। टाइटेनियम फ्रेम फोन को डेंट और मुड़ने से बचाने में मदद करता है, जबकि एल्यूमिनियम फ्रेम हल्का होने के साथ झटकों को बेहतर तरीके से सहन कर सकता है। वहीं बजट स्मार्टफोन में प्लास्टिक फ्रेम ज्यादा देखने को मिलता है, जो हल्का तो होता है लेकिन मजबूती के मामले में पीछे रहता है।
स्क्रीन प्रोटेक्शन पर दें खास ध्यान
फोन का सबसे संवेदनशील हिस्सा उसकी डिस्प्ले होती है। आजकल कंपनियां गोरिल्ला ग्लास विक्टस, विक्टस 2, गोरिल्ला ग्लास 7i, ड्रैगनट्रेल ग्लास, एलुमिनोसिलिकेट ग्लास और सैफायर ग्लास जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं।
सैफायर ग्लास को सबसे मजबूत विकल्पों में गिना जाता है, लेकिन इसकी कीमत ज्यादा होने के कारण इसका उपयोग महंगे डिवाइस में ही किया जाता है। गोरिल्ला ग्लास सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली तकनीक है, जो खरोंच और गिरने से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद करती है। हालांकि कोई भी ग्लास पूरी तरह टूटने से बचाने की गारंटी नहीं देता।
ड्रॉप प्रोटेक्शन और वाटर रेजिस्टेंस भी जरूरी
रोजमर्रा के इस्तेमाल में फोन कई बार हाथ से गिर सकता है, बैग में रखी चाबियों से टकरा सकता है या पानी के संपर्क में आ सकता है। इसलिए फोन खरीदते समय ड्रॉप प्रोटेक्शन और वाटर रेजिस्टेंस रेटिंग जरूर जांचनी चाहिए।
IP68 या IP69 रेटिंग वाला फोन पानी और धूल से बेहतर सुरक्षा देता है, लेकिन सिर्फ रेटिंग देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। यह भी देखना जरूरी है कि कंपनी ने फोन को कितनी गहराई तक पानी में टेस्ट किया है।
सही स्क्रीन प्रोटेक्टर और कवर चुनें
फोन की सुरक्षा बढ़ाने के लिए अच्छा टेंपर्ड ग्लास और मजबूत कवर जरूरी है। 9H हार्डनेस, बेहतर ओलियोफोबिक कोटिंग और अच्छी पारदर्शिता वाला टेंपर्ड ग्लास स्क्रीन को खरोंच और छोटे झटकों से बचाने में मदद करता है।
TPU और सिलिकॉन कवर झटकों को सोखने में बेहतर माने जाते हैं। वहीं केवल डिजाइन के लिए लगाए गए पतले हार्ड कवर कई बार गिरने पर फोन तक ज्यादा झटका पहुंचा सकते हैं। ऐसे कवर चुनने चाहिए जिनके कोने मजबूत और शॉक एब्जॉर्बिंग हों।
फोन खरीदने से पहले इन बातों को जरूर जांचें
नया स्मार्टफोन खरीदते समय केवल कैमरा और प्रोसेसर देखकर फैसला न करें। फोन का स्क्रीन ग्लास, फ्रेम क्वालिटी, रिपेयर खर्च, वाटर प्रोटेक्शन और लंबे समय तक चलने की क्षमता भी देखें। अगर फोन बहुत ज्यादा पतला है तो संभव है कि मजबूती के साथ कुछ समझौता किया गया हो।
कुल मिलाकर, मजबूत स्मार्टफोन खरीदना लंबे समय के लिए बेहतर निवेश साबित होता है। इससे बार-बार रिपेयर कराने का खर्च कम होता है और फोन की रीसेल वैल्यू भी अच्छी बनी रहती है।