WagonR बनी देश की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार

फ्लेक्स फ्यूल की शुरुआत हो चुकी है।

Update: 2026-06-11 11:51 GMT

Technological प्रौद्योगिकीय : देश में अब E85 फ्यूल यानी फ्लेक्स फ्यूल की शुरुआत हो चुकी है। सरकार के इथेनॉल रोडमैप के तहत धीरे-धीरे पूरे भारत में इस ईंधन को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इस नई पहल के साथ ही मारुति सुजुकी की वैगनआर देश की पहली ऐसी कार बन गई है जो फ्लेक्स फ्यूल से चलने में सक्षम है।

E85 फ्यूल में 85 प्रतिशत तक इथेनॉल और बाकी पेट्रोल का मिश्रण होता है। यह पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में सस्ता और पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फ्यूल की कीमत पेट्रोल से करीब 20 रुपए प्रति लीटर कम है, जिससे वाहन चालकों को आर्थिक राहत मिलने की संभावना है।

सरकार का उद्देश्य देश में पेट्रोल पर निर्भरता कम करना और स्वदेशी इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसी दिशा में E85 जैसे फ्लेक्स फ्यूल को बड़े स्तर पर लागू करने की योजना बनाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल ईंधन आयात पर खर्च कम होगा, बल्कि किसानों को भी लाभ मिलेगा क्योंकि इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से कृषि आधारित उत्पादों से किया जाता है।

इस फ्यूल का एक बड़ा फायदा यह भी बताया जा रहा है कि यह जलने पर पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में कम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करता है। इससे वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि, फ्लेक्स फ्यूल के कुछ नुकसान भी सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, E85 फ्यूल से चलने वाले वाहनों का माइलेज पेट्रोल की तुलना में कम हो सकता है। इसका मतलब है कि एक लीटर ईंधन में वाहन कम दूरी तय कर सकता है। इसके बावजूद, कम कीमत और पर्यावरणीय लाभों के कारण इसे एक बेहतर विकल्प माना जा रहा है।

वाहन निर्माता कंपनियां भी अब फ्लेक्स फ्यूल तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। आने वाले समय में कई अन्य मॉडल भी इस तकनीक के साथ बाजार में आने की संभावना है। सरकार की ओर से भी ऑटोमोबाइल सेक्टर को इस बदलाव के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कुल मिलाकर, E85 फ्लेक्स फ्यूल की शुरुआत भारत के ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है। वैगनआर का पहला फ्लेक्स फ्यूल वाहन बनना इस दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे जहां एक ओर लोगों को सस्ती ड्राइविंग का विकल्प मिलेगा, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी यह एक अहम कदम साबित हो सकता है।

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