नई दिल्ली। भारतीय कार बाजार में ग्राहकों की पसंद बदल रही है। नई गाड़ी खरीदने के बजाय बड़ी संख्या में लोग पुरानी कार का विकल्प चुन रहे हैं। इसकी वजह केवल कम कीमत नहीं है। ग्राहक अपने बजट में बेहतर मॉडल, ज्यादा सुविधाएं और सुविधाजनक खरीद प्रक्रिया भी तलाश रहे हैं। उद्योग की रिपोर्टों में पुरानी कारों का बाजार नई कारों से बड़ा बताया गया है। जुलाई 2025 की क्रिसिल रिपोर्ट में पुरानी और नई कारों की बिक्री का अनुपात लगभग 1.4 था। यानी दस नई कारों के मुकाबले करीब चौदह पुरानी कारों का कारोबार हो रहा था।
यह बदलाव कुछ वर्षों में आया है। उसी रिपोर्ट के अनुसार, पांच साल पहले पुरानी और नई कारों की बिक्री का अनुपात एक से नीचे था। पुरानी कारों की मांग बढ़ने के पीछे ग्राहकों का भरोसा, डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल और वाहन खरीदने के लिए वित्तीय सहायता की बेहतर उपलब्धता जैसे कारण बताए गए हैं। इसलिए इसे केवल नई कारों से लोगों का मोहभंग कहना सही नहीं होगा। पुरानी कारों का बाजार उन खरीदारों को भी जोड़ रहा है, जो सीमित बजट में पहली बार अपने परिवार के लिए गाड़ी लेना चाहते हैं। 
क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक अनुज सेठी के मुताबिक, नई गाड़ियों की बढ़ती कीमतें और खरीदने की क्षमता से जुड़े विचार पुरानी कारों की मांग को समर्थन दे रहे हैं। ऐसे खरीदार कम खर्च में कार के मालिक बनने का रास्ता तलाश रहे हैं। पुरानी गाड़ी उन्हें कम कीमत पर ज्यादा सुविधाओं वाला मॉडल चुनने का अवसर भी देती है। अगस्त 2026 की रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के दौरान पुरानी कारों की बिक्री मात्रा में सात से नौ प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। यह अनुमान है, अंतिम बिक्री परिणाम नहीं। 
खरीद का फैसला अब सिर्फ गाड़ी की शुरुआती कीमत देखकर नहीं हो रहा। एक ग्राहक के सामने समान बजट में नई कार का शुरुआती मॉडल और पुरानी कार का अधिक सुविधाओं वाला संस्करण उपलब्ध हो सकता है। ऐसे में जगह, आराम और रोजमर्रा की जरूरतें महत्वपूर्ण बन जाती हैं। जून 2026 में जारी एक संयुक्त उद्योग अध्ययन में भी पाया गया कि कई ग्राहक नई एंट्री लेवल कार के बजाय उसी बजट में बड़ी और बेहतर सुविधाओं वाली पुरानी गाड़ी चुन रहे हैं। यह मांग में आकांक्षाओं की बढ़ती भूमिका दिखाता है।
इसी अध्ययन में एसयूवी और ऑटोमैटिक गाड़ियों के प्रति रुचि सामने आई है। इसमें शामिल लेनदेन में ऑटोमैटिक कारों की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत रही। अध्ययन नौ शहरों के 11 हजार से अधिक वाहन लेनदेन पर आधारित था। इसलिए इसके प्रत्येक आंकड़े को पूरे देश के सभी खरीदारों पर समान रूप से लागू नहीं करना चाहिए। फिर भी यह बताता है कि पुराने वाहन खरीदने वाले ग्राहक भी सुविधा, वाहन के आकार और आराम को महत्व दे रहे हैं। उनके लिए पुरानी कार बेहतर श्रेणी में जाने का विकल्प बन रही है। 
मांग बढ़ने के साथ बाजार में उपलब्ध गाड़ियों का स्वरूप भी बदला है। क्रिसिल की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, बिकने वाली पुरानी कारों की औसत उम्र करीब चार साल है, जबकि एक दशक पहले यह आठ साल से अधिक थी। कंपनियों द्वारा मॉडल जल्दी अपडेट करना और वाहन मालिकों का अपेक्षाकृत जल्दी गाड़ी बदलना इसकी वजहों में शामिल है। इससे खरीदारों को कम उम्र की पुरानी कारें मिल रही हैं। हालांकि, कम उम्र होने भर से किसी वाहन की स्थिति अच्छी होने की गारंटी नहीं मिलती। 
डिजिटल माध्यमों ने वाहन तलाशने और विकल्पों की तुलना करने की प्रक्रिया आसान बनाई है। ग्राहक मॉडल, कीमत और उपलब्ध गाड़ियों की जानकारी देख सकते हैं। लेकिन बाजार की मजबूती के लिए भरोसा अभी भी जरूरी है। रेडसीर के विश्लेषण के अनुसार, वाहन की गुणवत्ता, कीमत की पारदर्शिता, दस्तावेज और बिक्री के बाद सहायता को लेकर खरीदारों की चिंताएं बनी हुई हैं। ऑनलाइन जानकारी मिलने के बाद भी कई ग्राहक प्रत्यक्ष जांच और विक्रेता से बातचीत को महत्व देते हैं।
संगठित कंपनियां इन्हीं चिंताओं को दूर करने के लिए जांच, मरम्मत, वित्तीय सहायता और खरीद प्रक्रिया से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही हैं। रेडसीर के मुताबिक, पुरानी कारों के कारोबार में वाहन के इतिहास, मालिकाना रिकॉर्ड, दुर्घटना संबंधी जानकारी और मरम्मत की गुणवत्ता का सत्यापन बड़ी चुनौती है। ऐसे में केवल आकर्षक तस्वीर या कम कीमत ग्राहक का भरोसा बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। स्पष्ट जानकारी और खरीद के बाद सहायता की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती जा रही है।
खरीदार के लिए इसका व्यावहारिक अर्थ है कि नई और पुरानी कार की तुलना समान जरूरतों के आधार पर की जाए। केवल किस्त या बिक्री मूल्य देखने के बजाय बीमा, संभावित मरम्मत और रखरखाव का खर्च भी समझना चाहिए। पुरानी कार चुनते समय सर्विस रिकॉर्ड, वाहन की वास्तविक स्थिति और दस्तावेजों की जांच उपयोगी है। विशेषज्ञों और उद्योग अध्ययनों से सामने आती तस्वीर बताती है कि भारतीय ग्राहक अपने पैसे में अधिक उपयोगिता चाहते हैं। पुरानी कारों की बढ़ती मांग इसी सोच, बेहतर विकल्पों और खरीद प्रक्रिया पर बढ़ते भरोसे से जुड़ी है।
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