Technology टेक्नोलॉजी: स्मार्टफोन मार्केट के लिए एक बुरी खबर है। 2026 में स्मार्टफोन मार्केट धड़ाम से गिर सकती है। डेटा एनालिसिस रिपोर्ट में यह बात सामने आ है कि 2026 में स्मार्टफोन शिपमेंट्स में 13% तक की गिरावट आ सकती है। इसका कारण मैमोरी चिप की कम होती सप्लाई और बढ़ती कीमतों को बताया गया है। मैमोरी चिप महंगी होने से लो-बजट स्मार्टफोन मार्केट पर इसका सबसे ज्यादा असर होगा, और छोटी कंपनियां इनकी कीमतों में बढ़ोत्तरी कर सकती हैं। जबकि Apple, Samsung जैसे दिग्गज प्लेयर्स अपनी स्थिति मजबूत करते नजर आएंगे। आइए जानते हैं कैसे!
स्मार्टफोन मार्केट 2026 में बड़ी गिरावट देखने वाली है। इंटरनेशनल डेटा कॉर्पोरेशन (IDC) की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। Reuters के अनुसार, रिपोर्ट कहती है कि 2026 में ग्लोबल स्मार्टफोन मार्केट में 12.9% तक की गिरावट देखी जा सकती है। शिपमेंट्स कम होंगी और स्मार्टफोन्स के दाम बढ़ेंगे। इसका कारण मैमोरी चिप की शॉर्टेज को बताया गया है। कम सप्लाई के चलते चिप की कीमतें भी बढ़ेंगीं। इसके कारण सस्ते स्मार्टफोन पर सबसे ज्यादा असर होगा। कंपनियां इनकी कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हो जाएंगी और इसका असर सीधा बिक्री और शिपमेंट्स की संख्या पर पड़ेगा।
रिपोर्ट इशारा करती है कि सस्ते स्मार्टफोन बनाने वाली छोटी कंपनियों पर जबरदस्त दबाव पड़ने वाला है। ये कंपनियां या तो मार्केट में बने रहने के लिए स्मार्टफोन डिवाइसेज की कीमतें बढ़ाएंगी, या फिर मार्केट से बाहर होने के लिए मजबूर हो जाएंगीं। आईडीसी में वर्ल्डवाइड क्लाइंट डिवाइसेस के उपाध्यक्ष फ्रांसिस्को जेरोनिमो ने कहा, "हम जो देख रहे हैं वह कोई अस्थायी दबाव नहीं है, बल्कि मेमोरी सप्लाई चेन में पैदा होने वाला सुनामी जैसा झटका है।"
Meta, Google और Microsoft जैसी टेक कंपनियों द्वारा AI इंफ्रास्ट्रक्चर के तेजी से विस्तार ने मेमोरी चिप्स की सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा हथिया लिया है। इससे कीमतें बढ़ गई हैं क्योंकि निर्माता अब कंज्यूमर डिवाइसेज की तुलना में हाई मार्जिन वाले डेटा सेंटर्स के लिए कंपोनेंट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। मेमोरी चिप, या DRAM, स्मार्टफोन के लिए बहुत जरूरी हिस्सा हैं क्योंकि ये पावर की अधिक खपत करने वाले ऐप्स को सुचारू रूप से चलाने में सक्षम बनाते हैं।
2026 में स्मार्टफोन की औसत बिक्री कीमत में 14% की वृद्धि होने का अनुमान लगाया गया है। Apple और Samsung जैसी कंपनियों की स्थिति और मजबूत हो सकती है क्योंकि वे ज्यादा मार्जिन वाले मॉडल्स बनाने और बेचने पर जोर देंगीं। वहीं, कंज्यूमर को छोटी कंपनियों के सस्ते स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं होंगे और वो महंगे मॉडल्स की तरफ रुख कर सकते हैं।