नई दिल्ली: सूचना और प्रसारण मंत्रालय (I&B) ने बुधवार को निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को 'प्रोग्राम कोड' का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है। मंत्रालय ने समाचार और कार्यक्रमों के निर्माण में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) टूल्स का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने को कहा है और चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है। मंत्रालय ने एक एडवाइजरी में कहा कि कई चैनलों ने 'केबल टेलीविजन नेटवर्क (रेगुलेशन) एक्ट, 1995' और 'केबल टेलीविजन नेटवर्क रूल्स, 1994' के तहत तय 'प्रोग्राम कोड' के नियमों का उल्लंघन किया है।
मंत्रालय ने चेतावनी दी कि कोड का कोई भी उल्लंघन मौजूदा नियमों के तहत कार्रवाई का कारण बन सकता है। मंत्रालय ने कहा कि AI टूल्स का इस्तेमाल केवल मदद के तौर पर किया जाना चाहिए, जिससे समाचार सामग्री की सटीकता, प्रमाणिकता या संवेदनशीलता पर कोई असर न पड़े। मंत्रालय ने प्रसारण में AI तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चिंता जताई है। चैनलों से कहा गया है कि वे ग्राफिक्स, वर्चुअल न्यूज प्रेजेंटेशन और अन्य प्रोग्रामिंग के लिए AI टूल्स (जिसमें 'जेनरेटिव AI' भी शामिल है) का इस्तेमाल करते समय पूरी सावधानी बरतें। एडवाइजरी के अनुसार, AI का उपयोग केवल सहायक के रूप में किया जाना चाहिए और इससे समाचार सामग्री की सटीकता, प्रमाणिकता या संवेदनशीलता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
ब्रॉडकास्टर्स को याद दिलाया गया कि संपादकीय मानकों को बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है और उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि तकनीक के इस्तेमाल से वास्तविक रिपोर्टिंग में कोई बदलाव या विकृति न आए। मंत्रालय ने बताया कि एक अंतर-विभागीय समिति ने पाया है कि कई चैनलों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम 'प्रोग्राम कोड' की भावना के अनुरूप नहीं हैं। समिति ने ऐसे कई उदाहरण देखे हैं, जहां एक जैसे विषयों पर मिलती-जुलती खबरें और विजुअल्स कई चैनलों पर इस तरह दिखाए गए, जिससे प्रसारण नियमों के पालन को लेकर चिंता पैदा हुई।
समिति ने कानूनी प्रावधानों का सख्ती से पालन करने की सिफारिश की है। साथ ही, इस बात पर जोर दिया है कि टीवी प्रसारण के जरिए अनुचित व्यवहार, आपत्तिजनक भाषा या गलत आचरण को सामान्य नहीं बनाया जाना चाहिए। एडवाइजरी में चैनलों से यह भी कहा गया है कि वे डिबेट और चर्चा कार्यक्रमों में शामिल होने वाले पैनलिस्टों का चयन बहुत सावधानी से करें और उन्हें संवेदनशील बनाएं, ताकि सांप्रदायिक, भड़काऊ या देश-विरोधी सामग्री का प्रसार न हो। ब्रॉडकास्टर्स से कहा गया है कि वे अपमानजनक, अभद्र या उकसावे वाली टिप्पणियों को प्रसारित होने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं। इसमें म्यूट करना, चेतावनी देना, डिस्क्लेमर दिखाना या फीड को बंद कर देना जैसे उपाय शामिल हैं।