नई दिल्ली: AI के तेजी से विकास के बीच 2030 तक मानव सभ्यता खत्म होने की चेतावनियों पर Nvidia के फाउंडर जेंसन हुआंग ने असहमति जताई है। उन्होंने ऐसे दावों को ‘डूम्सडे नैरेटिव’ बताते हुए कहा कि मानव सभ्यता खत्म होने की संभावना 0% है। वहीं, कुछ AI रिसर्चर्स और टेक दिग्गजों ने AI के भविष्य में इंसानों के लिए बड़ा खतरा बनने की आशंका जताई है। AI के बढ़ते प्रभाव, उसके खुद को बेहतर बनाने और इंसानों को चकमा देने से जुड़ी घटनाओं को लेकर भी चर्चा तेज है।
जेंसन हुआंग ने 2030 वाली चेतावनी को खारिज किया
Nvidia के फाउंडर जेंसन हुआंग ने AI की वजह से 2030 तक मानव सभ्यता के खत्म होने की चेतावनियों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि इसकी संभावना 0% है। हुआंग ने ऐसी बातों को ‘डूम्सडे नैरेटिव’ बताया और लोगों से कहा कि उन्हें इस तरह की चेतावनियों से डरने या पैनिक करने की जरूरत नहीं है।
उनके मुताबिक, ऐसी भविष्यवाणियां विज्ञान पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि Nvidia का उद्देश्य जिम्मेदारी के साथ प्रोडक्ट तैयार करना और लोगों को AI के बारे में जागरूक करना है, न कि समाज में अनावश्यक डर पैदा करना।
कुछ रिसर्चर्स ने जताई मानव सभ्यता पर खतरे की आशंका
कुछ दिन पहले एंथ्रोपिक और गूगल डीपमाइंड से जुड़े दो रिसर्चर्स ने AI के तेजी से विकास को लेकर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि AI के इसी तरह आगे बढ़ने से भविष्य में मानव सभ्यता खत्म होने का खतरा पैदा हो सकता है।
OpenAI, xAI और एंथ्रोपिक से जुड़े सैम ऑल्टमैन, इलॉन मस्क और डारियो अमोदेई ने भी इस तरह की चिंता का समर्थन किया था। यानी AI को लेकर टेक इंडस्ट्री में एक तरफ इसके तेजी से विकास को जरूरी मानने वाली सोच है, जबकि दूसरी तरफ इसके संभावित खतरों को लेकर चेतावनी देने वाले लोग भी हैं।
कानूनों से छूट मांगने का लगाया आरोप
जेंसन हुआंग ने AI से जुड़ी तबाही की आशंकाओं वाले नैरेटिव पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस तरह की बातों का इस्तेमाल मौजूदा कानूनों से छूट हासिल करने के लिए कर रहे हैं।
हुआंग के मुताबिक, अगर ऐसे बयानों के पीछे की बात को समझा जाए तो कुछ लोग नए और सख्त नियमों की मांग नहीं कर रहे, बल्कि पहले से लागू कानूनों से राहत चाहते हैं। उन्होंने इसे एक समस्या बताया।
AI को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की राय भी सामने आई
जेंसन हुआंग की तरह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी AI के खतरे से जुड़ी बातों को ‘अफवाह’ बता चुके हैं।
इससे AI इंडस्ट्री में अलग-अलग विचारों की तस्वीर सामने आती है। एक तरफ इलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन जैसे टेक दिग्गज AI की रफ्तार को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं, वहीं जेंसन हुआंग जैसे लीडर्स AI के खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने की बात कहते हैं।
AI की दुनिया में Nvidia क्यों अहम है?
Nvidia बेहद ताकतवर कंप्यूटर चिप्स यानी GPU तैयार करती है। इनका इस्तेमाल AI मॉडल की ट्रेनिंग और उन्हें चलाने के लिए किया जाता है।
OpenAI समेत दूसरी टेक कंपनियों के बनाए बड़े AI मॉडल और AI एजेंट्स भी Nvidia के हाई-टेक चिप्स की मदद से काम करते हैं। इसी वजह से AI के तेजी से बढ़ते क्षेत्र में Nvidia की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई है।
सवाल: ‘AI इंसानों को मार सकता है’ का मतलब क्या?
इस दावे का मतलब यह नहीं है कि AI सीधे इंसानों को मार देगा। चिंता यह है कि भविष्य में AI इतना शक्तिशाली हो सकता है कि वह इंसानी नियंत्रण से बाहर चला जाए और मानव सभ्यता के लिए बड़ा खतरा बन जाए।
एंथ्रोपिक के रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने 9 सितंबर को इस्तीफा देते समय AI के भविष्य के खतरे को लेकर चेतावनी दी थी।
AI को लेकर चिंता की दो बड़ी वजहें
AI को इंसानों ने बनाया और समय के साथ उसे बेहतर भी किया। लेकिन अब AI के खुद को सुधारने की क्षमता को लेकर चर्चा हो रही है।
नए AI मॉडल अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें सुधारने में सक्षम बताए जा रहे हैं। साथ ही, कुछ मॉडल अपनी सोच और तर्क को छिपाने में भी बेहतर हो रहे हैं, जिससे उन पर निगरानी रखना मुश्किल हो सकता है।
AI एजेंट अब केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं हैं। उन्हें किसी समस्या को हल करने का निर्देश दिया जा सकता है, जिसके बाद वे इंटरनेट और कंप्यूटर टूल्स का इस्तेमाल करते हुए खुद फैसले लेकर काम कर सकते हैं। दिए गए विवरण के मुताबिक, हाल ही में 10 हजार AI एजेंट्स ने 90 साल पुरानी Navier-Stokes गणित समस्या को 88 घंटे में हल किया।
Tags: