लेकिन यह इकलौता मौका नहीं था जब नाडकर्णी ने इतनी कंजूसी से रन दिए. बल्कि उन्होंने अपने पूरे टेस्ट करियर में 1.67 रन प्रति ओवर ही दिए. इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट से चार साल पहले उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ कानपुर में 32 ओवर फेंके और इनमें 24 रन मेडन थे. हालांकि उनके बाकी के ओवर में 23 रन गए. इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली टेस्ट में 34 ओवर में फिर से 24 मेडन ओवर किए. उनके लिए कहा जाता था कि वे लगातार एक ही जगह पर किसी गेंद को घंटों तक टप्पा खिला सकते थे. अभी जान लेते हैं कि 57 साल पहले भारत-इंग्लैंड के बीच मद्रास टेस्ट में क्या हुआ था.
क्या हुआ था उस मैच में?
नवाब पटौदी भारत के कप्तान थे. उन्होंने टॉस जीता और बैटिंग चुनी. भारत ने पहले दिन दो विकेट पर 277 रन बनाए. ओपनर बुधि कुंदरन 170 रन बनाकर नाबाद रहे. भारत ने दूसरे दिन खेल समाप्ति से डेढ़ घंटे पहले सा विकेट पर 457 रन के साथ पारी घोषित कर दी. बुधि कुंदरन 192 रन बनाकर आउट हुए. इंग्लैंड का स्कोर दूसरे दिन के खेल के बाद दो विकेट पर 63 रन था. अब यह हुआ कि इंग्लैंड के चार खिलाड़ी बीमार पड़ गए. उनके पेट खराब हो गए. इनमें से दो खिलाड़ी ज्यादा बीमार थे तो वे होटल में ही रहे. वहीं दो टीम के साथ ड्रेसिंग रूम में रहे. साथ ही होटल में एक कार को तैयार रखा गया ताकि जरूरत पड़ने पर वहां से बीमार खिलाड़ियों को स्टेडियम ले जाया जा सके.
ऐसे हालात में इंग्लैंड की टीम ने रन बनाने से ज्यादा क्रीज पर जमे रहने पर ध्यान दिया. इस दौरान बापू नाडकर्णी लगातार एक के बाद एक ओवर डालते रहे. उनके खिलाफ इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने कोई रिस्क नहीं लिया. ऐसे में नाडकर्णी ने लगातार 21 ओवर मेडन फेंक दिए.
स्कोरर ने बताया वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया
इस रिकॉर्ड के बारे में नाडकर्णी का कहना था कि उन्हें बाद में पता चला कि उन्होंने रिकॉर्ड बना दिया है. मैच के ऑफिशियल स्कोरर ने बताया कि यह वर्ल्ड रिकॉर्ड है और उन्होंने सबसे इकनॉमिकल स्पैल डाला है. लेकिन ड्रेसिंग रूम में कोई जश्न नहीं हुआ. बस कुछ साथियों ने टांग खिंचाई की.
नाडकर्णी ने 41 टेस्ट में 88 विकेट लिए
दूसरी पारी में भारत ने नौ विकेट पर 152 रन बनाकर पारी घोषित कर दी और अंग्रेजों को जीत के लिए 293 रन का लक्ष्य दिया. दूसरी पारी में इंग्लैंड ने तेजी से बनाने वाले बल्लेबाजों को भेजा. उन्होंने तेजी से रन बनाए. लेकिन चौथा विकेट गिरने के बाद फिर ड्रॉ पर ध्यान दिया गया. दूसरी पारी में नाडकर्णी का इस्तेमाल कम हुआ. लेकिन उन्होंने छह ओवर फेंके और दो विकेट लिए. इस दौरान चार ओवर मेडन भी डाले. उन्होंने भारत के लिए कुल 41 टेस्ट मैच खेले. इनमें उनके नाम 88 विकेट हुए. लेकिन सबसे उल्लेखनीय उनकी इकनॉमी थी जो 1.67 रन रही. यानी हर ओवर में 1.67 रन. उनके जितने मैचों के बाद किसी गेंदबाज की इतनी कम इकनॉमी नहीं है.