नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के युवा बल्लेबाज **वैभव सूर्यवंशी** का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है। बेहद कम उम्र में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव अब घरेलू क्रिकेट में भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। भारत के पूर्व कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज **क्रिस श्रीकांत** ने उनकी लोकप्रियता को लेकर दिलचस्प बयान दिया है। श्रीकांत ने कहा कि उनकी पत्नी आमतौर पर दलीप ट्रॉफी जैसे घरेलू मुकाबले नहीं देखतीं, लेकिन वैभव सूर्यवंशी को बल्लेबाजी करते देखने के लिए वह भी मैच देखती हैं।
श्रीकांत का यह बयान बताता है कि वैभव की लोकप्रियता अब केवल क्रिकेट के नियमित दर्शकों तक सीमित नहीं है। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने ऐसे लोगों का ध्यान भी घरेलू क्रिकेट की ओर खींचा है जो आमतौर पर इन मुकाबलों को ज्यादा फॉलो नहीं करते।
श्रीकांत ने सुनाया पत्नी का दिलचस्प किस्सा
क्रिस श्रीकांत ने वैभव सूर्यवंशी के प्रभाव की चर्चा करते हुए अपने घर का उदाहरण दिया।
उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी दलीप ट्रॉफी देखने में आमतौर पर ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखतीं। लेकिन जब वैभव खेल रहे होते हैं तो वह भी टीवी पर मैच देखने लगती हैं।
श्रीकांत के मुताबिक यह किसी युवा क्रिकेटर की लोकप्रियता का बड़ा संकेत है।
जब कोई खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में भी दर्शकों को मैच देखने के लिए आकर्षित करने लगे तो यह उसकी स्टार अपील को दर्शाता है।
कम उम्र में बनाई अलग पहचान
वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई है।
बाएं हाथ के बल्लेबाज वैभव की सबसे बड़ी खासियत उनकी निडर बल्लेबाजी है। वह गेंदबाज का नाम या अनुभव देखने के बजाय अपने स्वाभाविक अंदाज में शॉट खेलने की कोशिश करते हैं।
युवा बल्लेबाज की यही शैली क्रिकेट प्रशंसकों को पसंद आ रही है।
वह मैदान पर उतरते ही रन बनाने की कोशिश करते हैं और मौका मिलने पर बड़े शॉट लगाने से पीछे नहीं हटते।
इसी वजह से उनकी बल्लेबाजी में दर्शकों को मनोरंजन और रोमांच दोनों देखने को मिलता है।
IPL ने बदल दी पहचान
वैभव की लोकप्रियता बढ़ाने में IPL की बड़ी भूमिका रही है।
राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा। बड़े मंच पर अनुभवी गेंदबाजों के सामने भी उन्होंने बिना दबाव के बल्लेबाजी की।
उनकी एक आक्रामक शतकीय पारी ने उन्हें रातोंरात भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित युवा खिलाड़ियों में शामिल कर दिया।
इसके बाद वैभव जहां भी खेलने उतरे, क्रिकेट प्रशंसकों की नजर उनके प्रदर्शन पर रहने लगी।
दलीप ट्रॉफी में भी सभी की नजर
अब वैभव दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
रेड-बॉल क्रिकेट उनके लिए अलग तरह की परीक्षा है। सीमित ओवरों में तेजी से रन बनाने और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में लंबी पारी खेलने के बीच बड़ा अंतर होता है।
दलीप ट्रॉफी में उन्हें अपनी तकनीक, धैर्य और परिस्थितियों के मुताबिक बल्लेबाजी करने की क्षमता दिखाने का मौका मिल रहा है।
यही वजह है कि चयनकर्ताओं के साथ पूर्व क्रिकेटरों की नजर भी उन पर बनी हुई है।
सिर्फ छक्के लगाना ही काफी नहीं
वैभव की आक्रामक बल्लेबाजी उनकी सबसे बड़ी ताकत है लेकिन प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्हें अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
लाल गेंद लंबे समय तक स्विंग और सीम कर सकती है। गेंदबाज भी बल्लेबाज की कमजोरी को लगातार निशाना बनाने की कोशिश करते हैं।
ऐसे में केवल बड़े शॉट खेलकर सफल होना आसान नहीं होता।
वैभव को यह सीखना होगा कि कब आक्रमण करना है और कब विकेट बचाकर लंबी पारी खेलनी है।
अगर वह इस संतुलन को हासिल कर लेते हैं तो भारतीय क्रिकेट में उनके लिए भविष्य के रास्ते और खुल सकते हैं।
फाइनल में सिराज की बड़ी चुनौती
दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन के सामने साउथ जोन की चुनौती है और वैभव के लिए मुकाबला आसान नहीं रहने वाला।
साउथ जोन के लिए भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज उपलब्ध हैं।
सिराज के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और टेस्ट मैचों का लंबा अनुभव है। नई गेंद से उनकी सीम और आक्रामक गेंदबाजी युवा बल्लेबाज की बड़ी परीक्षा ले सकती है।
वैभव और सिराज के बीच मुकाबला फाइनल के सबसे दिलचस्प हिस्सों में से एक हो सकता है।
ईशान किशन की कप्तानी में मौका
ईस्ट जोन की कप्तानी ईशान किशन कर रहे हैं।
ईशान खुद आक्रामक बल्लेबाज हैं और युवा खिलाड़ियों को खुलकर खेलने का मौका देने के लिए जाने जाते हैं।
ऐसे कप्तान के साथ खेलना वैभव के लिए फायदेमंद हो सकता है।
हालांकि फाइनल जैसे बड़े मुकाबले में टीम को उनसे केवल तेज शुरुआत ही नहीं बल्कि परिस्थितियों के अनुसार जिम्मेदार बल्लेबाजी की भी उम्मीद होगी।
श्रीकांत खुद रहे हैं आक्रामक ओपनर
वैभव की तारीफ करने वाले क्रिस श्रीकांत खुद अपने दौर के बेहद आक्रामक सलामी बल्लेबाज रहे हैं।
जब वनडे क्रिकेट में शुरुआत से तेज बल्लेबाजी करना सामान्य रणनीति नहीं थी, तब भी श्रीकांत गेंदबाजों पर हमला करने के लिए जाने जाते थे।
1983 विश्व कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा रहे श्रीकांत ने अपने करियर में कई यादगार पारियां खेलीं।
यही कारण है कि किसी युवा आक्रामक बल्लेबाज को लेकर उनकी राय क्रिकेट प्रशंसकों के बीच खास ध्यान खींचती है।
घरेलू क्रिकेट के लिए अच्छी खबर
वैभव जैसे युवा खिलाड़ी की लोकप्रियता दलीप ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट के लिए भी सकारात्मक मानी जा सकती है।
आमतौर पर IPL और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों को घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट की तुलना में ज्यादा दर्शक मिलते हैं।
लेकिन अगर युवा स्टार खिलाड़ियों के कारण लोग दलीप ट्रॉफी और रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट भी देखने लगते हैं तो इससे घरेलू क्रिकेट की पहुंच बढ़ सकती है।
श्रीकांत ने अपनी पत्नी का उदाहरण देकर इसी बदलाव की ओर इशारा किया।
सोशल मीडिया ने भी बढ़ाया क्रेज
वैभव की बल्लेबाजी के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते रहे हैं।
उनके छक्के, तेज पारियां और कम उम्र में हासिल की गई उपलब्धियां लगातार चर्चा में रहती हैं।
इससे उन्हें बहुत कम समय में बड़ा फैन बेस बनाने में मदद मिली है।
लेकिन लोकप्रियता के साथ उम्मीदें भी तेजी से बढ़ती हैं। हर पारी में बड़ी पारी खेलना संभव नहीं है और युवा खिलाड़ी के विकास के लिए उसे असफलताओं से सीखने का भी समय मिलना जरूरी है।
टीम इंडिया तक का रास्ता अभी लंबा
वैभव की प्रतिभा को लेकर उत्साह जरूर है लेकिन सीनियर भारतीय टीम तक पहुंचने का रास्ता अभी लंबा है।
उन्हें घरेलू क्रिकेट में निरंतर प्रदर्शन करना होगा और अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी तकनीक साबित करनी होगी।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अगर वह रेड-बॉल और व्हाइट-बॉल दोनों प्रारूपों में लगातार प्रदर्शन करते हैं तो भविष्य में राष्ट्रीय टीम के लिए उनकी दावेदारी मजबूत हो सकती है।
श्रीकांत के बयान ने बताई स्टार पावर
क्रिस श्रीकांत का बयान आंकड़ों या तकनीकी विश्लेषण से ज्यादा वैभव सूर्यवंशी की बढ़ती लोकप्रियता की कहानी बताता है।
जब दलीप ट्रॉफी को नियमित रूप से नहीं देखने वाला दर्शक भी केवल एक बल्लेबाज के लिए मैच देखने लगे तो उस खिलाड़ी की स्टार पावर का अंदाजा लगाया जा सकता है।
वैभव ने बेहद कम उम्र में यह मुकाम हासिल किया है।
अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती इस लोकप्रियता को लगातार अच्छे प्रदर्शन में बदलने की होगी। दलीप ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट उन्हें यह साबित करने का मौका देते हैं कि वह केवल विस्फोटक बल्लेबाज नहीं बल्कि लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट में टिकने की क्षमता रखने वाले खिलाड़ी भी हैं।
फिलहाल क्रिस श्रीकांत की पत्नी का दलीप ट्रॉफी देखना एक दिलचस्प किस्सा जरूर है, लेकिन इसके पीछे बड़ी कहानी भारतीय क्रिकेट में एक नए युवा स्टार के तेजी से बढ़ते क्रेज की है।
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