14 रन पर भारत को तीसरा झटका सैमसन के बाद ईशान आउट अभिषेक खाता नहीं खोल सके
IND vs JAP : भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही और महज 14 रन के स्कोर तक तीन बल्लेबाज पवेलियन लौट गए। शीर्ष क्रम के लगातार विकेट गिरने से टीम दबाव में आ गई। अभिषेक शर्मा बिना खाता खोले आउट हुए, जबकि संजू सैमसन और ईशान किशन भी बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। ईशान किशन के आउट होते ही भारत को 14 रन पर तीसरा झटका लगा।
शुरुआती ओवरों में विपक्षी गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। लगातार सटीक गेंदबाजी और दबाव के कारण भारत का शीर्ष क्रम लड़खड़ा गया। तीन विकेट जल्दी गिरने के बाद मध्यक्रम के बल्लेबाजों पर पारी को संभालने की बड़ी जिम्मेदारी आ गई।
अभिषेक शर्मा नहीं खोल सके खाता
भारत को पहला झटका अभिषेक शर्मा के रूप में लगा। आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले अभिषेक इस मुकाबले में अपना खाता भी नहीं खोल सके।
उनसे टीम को तेज शुरुआत की उम्मीद थी, लेकिन विपक्षी गेंदबाजों ने शुरुआत से ही उन पर दबाव बनाया। अभिषेक के जल्दी आउट होने से भारत को शुरुआती ओवरों में ही अपनी रणनीति बदलनी पड़ी।
किसी भी बड़े मुकाबले में शुरुआती विकेट का असर आगे की बल्लेबाजी पर पड़ता है। अभिषेक के आउट होने के बाद भारतीय बल्लेबाजों पर पारी को संभालने का दबाव बढ़ गया।
संजू सैमसन भी नहीं टिक सके
अभिषेक के बाद संजू सैमसन से पारी को संभालने की उम्मीद थी। सैमसन के पास बड़े शॉट खेलने के साथ परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करने का अनुभव है, लेकिन वह भी ज्यादा देर तक क्रीज पर नहीं टिक पाए।
सैमसन के विकेट के बाद भारतीय टीम की मुश्किलें और बढ़ गईं। शुरुआती दो विकेट जल्दी गंवाने के कारण रन गति भी प्रभावित हुई और विपक्षी गेंदबाजों को भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाने का मौका मिल गया।
भारत को इस समय एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी, लेकिन जल्द ही टीम को तीसरा झटका भी लग गया।
ईशान किशन के रूप में तीसरा विकेट
ईशान किशन के आउट होने के साथ ही भारत का स्कोर 14 रन पर तीन विकेट हो गया। ईशान से उम्मीद थी कि वह आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी कर विपक्षी टीम पर दबाव बनाएंगे, लेकिन वह भी बड़ी पारी नहीं खेल पाए।
ईशान का विकेट भारत के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। तीन प्रमुख बल्लेबाजों के जल्दी आउट होने से भारतीय टीम बैकफुट पर चली गई।
अब मध्यक्रम के सामने दोहरी चुनौती थी। एक तरफ विकेट बचाने थे तो दूसरी तरफ स्कोरबोर्ड को भी लगातार आगे बढ़ाना था।
14 रन पर तीन विकेट से बढ़ा दबाव
सिर्फ 14 रन के स्कोर पर तीन विकेट गिरना भारतीय टीम के लिए मुश्किल स्थिति पैदा करने वाला रहा। शुरुआत में ही शीर्ष क्रम के तीन बल्लेबाजों के पवेलियन लौटने से विपक्षी टीम का आत्मविश्वास बढ़ गया।
गेंदबाजों ने परिस्थितियों का फायदा उठाते हुए भारतीय बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया। बल्लेबाजों को आसानी से रन बनाने का मौका नहीं मिला और दबाव में विकेट गिरते चले गए।
ऐसी स्थिति में टीम के मध्यक्रम को जोखिम भरे शॉट से बचते हुए साझेदारी बनाने की जरूरत होती है।
मध्यक्रम पर आई बड़ी जिम्मेदारी
शीर्ष क्रम के विफल होने के बाद भारत की उम्मीदें मध्यक्रम पर टिक गईं। टीम को ऐसे समय में एक लंबी साझेदारी की जरूरत थी, जिससे शुरुआती झटकों से उबरते हुए सम्मानजनक स्कोर की ओर बढ़ा जा सके।
तीन विकेट जल्दी गिरने के बाद बल्लेबाजों के लिए स्ट्राइक रोटेट करना भी महत्वपूर्ण हो जाता है। डॉट गेंदों की संख्या बढ़ने पर दबाव और बढ़ सकता है, इसलिए मध्यक्रम को संभलकर रन बनाने की रणनीति अपनानी पड़ती है।
भारत के लिए इस स्थिति में विकेट बचाना सबसे महत्वपूर्ण हो गया।
विपक्षी गेंदबाजों ने बनाया दबाव
भारतीय बल्लेबाजी को शुरुआती झटके देने में विपक्षी गेंदबाजों की भूमिका अहम रही। गेंदबाजों ने शुरुआत से सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी की और बल्लेबाजों को खुलकर शॉट खेलने का मौका नहीं दिया।
नई गेंद से मिले शुरुआती विकेटों ने मैच की दिशा पर असर डाला। तीन विकेट गिरने के बाद गेंदबाजी टीम को अपनी रणनीति के अनुसार फील्ड सेट करने का अवसर मिला।
वहीं भारतीय बल्लेबाजों के लिए हर रन महत्वपूर्ण हो गया।
पावरप्ले में विकेट बचाना बना चुनौती
टी20 क्रिकेट में पावरप्ले का इस्तेमाल आमतौर पर तेजी से रन बनाने के लिए किया जाता है, लेकिन लगातार विकेट गिरने पर बल्लेबाजी टीम की रणनीति बदल जाती है।
भारत के साथ भी ऐसा ही हुआ। शुरुआती विकेट गिरने के कारण बल्लेबाजों को आक्रमण और सावधानी के बीच संतुलन बनाना पड़ा।
अगर बल्लेबाज ज्यादा आक्रामक होते तो और विकेट गिरने का खतरा था, जबकि बहुत धीमी बल्लेबाजी से जरूरी रन गति बढ़ सकती थी। ऐसे में मध्यक्रम पर मैच को दोबारा संतुलन में लाने की जिम्मेदारी आ गई।
एक साझेदारी की सख्त जरूरत
14 रन पर तीन विकेट गंवाने के बाद भारत को सबसे ज्यादा जरूरत एक मजबूत साझेदारी की थी। क्रिकेट में शुरुआती झटकों के बाद एक अच्छी साझेदारी टीम को मुकाबले में वापस ला सकती है।
मध्यक्रम के बल्लेबाजों को पहले क्रीज पर समय बिताने और परिस्थितियों को समझने की जरूरत थी। इसके बाद कमजोर गेंदों पर रन बनाकर स्कोर को आगे बढ़ाया जा सकता था।
विपक्षी टीम की कोशिश इस दौरान दबाव बनाए रखते हुए एक और विकेट हासिल करने की रही।
बड़े स्कोर की राह हुई मुश्किल
शीर्ष क्रम के तीन बल्लेबाज जल्दी आउट होने के कारण भारत के लिए बड़ा स्कोर खड़ा करने की राह मुश्किल हो गई। टी20 मुकाबले में शुरुआती ओवरों का फायदा नहीं उठा पाने पर अंतिम ओवरों में बल्लेबाजों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
हालांकि टी20 क्रिकेट में मैच की स्थिति तेजी से बदल सकती है। एक अच्छी साझेदारी और कुछ बड़े ओवर टीम को फिर से मजबूत स्थिति में पहुंचा सकते हैं।
भारत के लिए भी शुरुआती झटकों के बाद यही चुनौती थी कि मध्यक्रम पारी को संभाले और अंतिम ओवरों के लिए मजबूत आधार तैयार करे।
सैमसन और ईशान से थीं बड़ी उम्मीदें
संजू सैमसन और ईशान किशन दोनों आक्रामक बल्लेबाजी करने की क्षमता रखते हैं। टीम को उम्मीद थी कि दोनों शुरुआती ओवरों में तेजी से रन जोड़ेंगे, लेकिन इस मुकाबले में दोनों ज्यादा देर तक नहीं टिक सके।
अभिषेक शर्मा का बिना खाता खोले आउट होना भी टीम के लिए बड़ा झटका रहा। तीनों बल्लेबाजों के जल्दी आउट होने से भारतीय पारी की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही।
14 रन पर तीसरा विकेट गिरने के बाद मुकाबले का दबाव पूरी तरह भारतीय मध्यक्रम पर आ गया। अब टीम का स्कोर कहां तक पहुंचता है, यह मध्यक्रम की बल्लेबाजी और आने वाली साझेदारियों पर निर्भर करेगा।