पहले ODI में कुलदीप यादव को बाहर रखने पर उठे सवाल

Update: 2026-07-15 05:46 GMT

नई दिल्ली : इंग्लैंड के खिलाफ पहले वनडे मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम की प्लेइंग इलेवन में अनुभवी स्पिनर कुलदीप यादव को जगह नहीं मिलने का फैसला चर्चा का विषय बन गया है। टीम इंडिया के इस चयन को लेकर कई पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज वरुण एरॉन ने भी टीम मैनेजमेंट के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि सिर्फ जसप्रीत बुमराह के भरोसे हर मैच नहीं जीता जा सकता।

पहले ODI में भारतीय टीम ने चार तेज गेंदबाजों के साथ मैदान पर उतरने का फैसला किया था। टीम में जसप्रीत बुमराह, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बरार और शिवम दुबे को तेज गेंदबाजी विकल्प के रूप में शामिल किया गया था। वहीं, स्पिन विभाग की जिम्मेदारी अक्षर पटेल और वाशिंगटन सुंदर के पास थी।

हालांकि, भारतीय टीम के पास विशेषज्ञ स्पिनर के तौर पर कुलदीप यादव मौजूद थे, लेकिन उन्हें अंतिम एकादश में शामिल नहीं किया गया। कुलदीप अपनी कलाई की स्पिन, गेंद को दोनों तरफ घुमाने की क्षमता और विकेट लेने की कला के लिए जाने जाते हैं।

मैच में शुरुआत में भारतीय गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार ने शुरुआती विकेट लेकर इंग्लैंड की बल्लेबाजी को दबाव में ला दिया था। एक समय इंग्लैंड की टीम छह विकेट गंवाकर संघर्ष कर रही थी। लेकिन इसके बाद लियाम डॉसन और जो रूट ने पारी को संभाल लिया।

इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजी के खिलाफ धैर्य दिखाया और रन बनाने शुरू किए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान भारतीय टीम को एक ऐसे गेंदबाज की कमी महसूस हुई, जो बीच के ओवरों में विकेट निकाल सके।

पूर्व तेज गेंदबाज वरुण एरॉन ने इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि कुलदीप यादव जैसे गेंदबाज की मौजूदगी टीम के लिए फायदेमंद हो सकती थी। उनके अनुसार, कुलदीप के पास बल्लेबाजों को परेशान करने के लिए अलग तरह की गेंदबाजी क्षमता है।

वरुण एरॉन ने कहा कि कुलदीप लेफ्ट आर्म रिस्ट स्पिनर हैं और उन्हें स्वाभाविक रूप से गेंद में ज्यादा टर्न मिलता है। उनके पास कई तरह की गेंदें हैं, जिससे वह बल्लेबाजों को लगातार चुनौती दे सकते हैं।

उन्होंने अक्षर पटेल की गेंदबाजी शैली पर भी बात की। वरुण ने कहा कि अक्षर ज्यादा आर्म बॉलिंग करते हैं और उनकी गेंद अक्सर सीधी जाती है, जबकि विकेट लेने के लिए गेंदबाज को अपनी पेस, लाइन और सीम पोजीशन के साथ बेहतर तालमेल बनाना पड़ता है।

वरुण के मुताबिक, वनडे क्रिकेट में बीच के ओवरों में विकेट निकालना बेहद जरूरी होता है। ऐसे समय में कुलदीप जैसे आक्रामक स्पिनर की भूमिका अहम हो सकती है, क्योंकि वह बल्लेबाजों पर दबाव बनाने के साथ-साथ विकेट लेने की क्षमता रखते हैं।

भारतीय टीम में स्पिन विकल्पों को लेकर यह बहस नई नहीं है। कई बार टीम मैनेजमेंट परिस्थितियों, पिच और विपक्षी बल्लेबाजी को ध्यान में रखते हुए संयोजन तैयार करता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इंग्लैंड जैसी टीम के खिलाफ बीच के ओवरों में विकेट लेने वाला गेंदबाज जरूरी था।

कुलदीप यादव पिछले कुछ समय से भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण गेंदबाज रहे हैं। उन्होंने सीमित ओवरों के क्रिकेट में कई बार अहम मौकों पर विकेट निकालकर टीम को जीत दिलाई है। उनकी गुगली और फ्लाइट गेंदें बड़े बल्लेबाजों को भी परेशानी में डालती हैं।

वहीं, टीम मैनेजमेंट का नजरिया यह रहा होगा कि तेज गेंदबाजी विकल्पों की संख्या बढ़ाने से इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती विकेट हासिल किए जा सकते हैं। जसप्रीत बुमराह जैसे अनुभवी गेंदबाज के साथ युवा तेज गेंदबाजों को मौका देने की रणनीति भी इसका हिस्सा हो सकती है।

हालांकि, पहले ODI के दौरान इंग्लैंड के मध्यक्रम के बल्लेबाजों द्वारा भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ साझेदारी बनाने के बाद कुलदीप की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल और तेज हो गए।

क्रिकेट विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले मुकाबलों में टीम इंडिया को अपने गेंदबाजी संयोजन पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। अगर पिच स्पिन के लिए मददगार रहती है तो कुलदीप यादव की वापसी की संभावना बढ़ सकती है।

पहले वनडे से यह साफ हो गया है कि टीम चयन को लेकर हर फैसला मैच की परिस्थितियों के हिसाब से महत्वपूर्ण होता है। कुलदीप जैसे विकेट लेने वाले गेंदबाज को बाहर रखने का फैसला अब भारतीय टीम मैनेजमेंट के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है।

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