नई दिल्ली: भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई है। AI के गलत इस्तेमाल से जुड़ी एक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंधु ने इसे 'हैरान कर देने वाला' बताया और चेतावनी दी कि शक्तिशाली तकनीक का गलत हाथों में पहुंचना बेहद खतरनाक हो सकता है। उनकी प्रतिक्रिया ऐसे समय सामने आई है जब डीपफेक, फर्जी तस्वीरों, आवाज की नकल और ऑनलाइन धोखाधड़ी में AI के इस्तेमाल को लेकर दुनिया भर में बहस तेज हो रही है।
AI ने शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, कारोबार और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में कई नई संभावनाएं पैदा की हैं। लेकिन इसी तकनीक की मदद से असली जैसी दिखने वाली नकली तस्वीरें, वीडियो और ऑडियो तैयार करना भी आसान हुआ है। सिंधु की चिंता इसी दूसरी तस्वीर की ओर ध्यान खींचती है।
रिपोर्ट देखकर हैरान हुईं सिंधु
AI के दुरुपयोग से जुड़ी रिपोर्ट देखने के बाद सिंधु ने इसके संभावित खतरों को गंभीर बताया। उनका कहना था कि तकनीक अपने आप में उपयोगी हो सकती है, लेकिन उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता है, यह बेहद महत्वपूर्ण है।
उनकी टिप्पणी ने खासकर सोशल मीडिया पर AI से तैयार होने वाले भ्रामक कंटेंट और लोगों की पहचान के दुरुपयोग से जुड़े जोखिमों की चर्चा को फिर सामने ला दिया है।
डीपफेक बन रहा बड़ी चुनौती
जनरेटिव AI की मदद से अब किसी व्यक्ति के चेहरे को वीडियो में जोड़ना या उसकी आवाज जैसी कृत्रिम आवाज तैयार करना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। इसे आमतौर पर डीपफेक तकनीक से जोड़ा जाता है।
ऐसे वीडियो का इस्तेमाल किसी व्यक्ति के बारे में गलत सूचना फैलाने, फर्जी विज्ञापन बनाने या धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। मशहूर खिलाड़ियों, फिल्मी सितारों और दूसरे सार्वजनिक व्यक्तियों की पहचान का दुरुपयोग होने का खतरा भी अधिक रहता है।
आम लोगों के लिए भी खतरा
AI के दुरुपयोग का जोखिम केवल सेलिब्रिटीज तक सीमित नहीं है। साइबर अपराधी किसी व्यक्ति की आवाज की नकल कर उसके परिवार या परिचितों से पैसे मांगने जैसी धोखाधड़ी की कोशिश कर सकते हैं।
इसी तरह सोशल मीडिया से ली गई तस्वीरों का इस्तेमाल कर नकली प्रोफाइल या भ्रामक सामग्री तैयार की जा सकती है। इसलिए ऑनलाइन दिखाई देने वाले किसी सनसनीखेज वीडियो या ऑडियो पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसके स्रोत की जांच करना जरूरी होता जा रहा है।
AI के जिम्मेदार इस्तेमाल की जरूरत
विशेषज्ञ लंबे समय से AI कंपनियों, सरकारों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। AI से तैयार सामग्री की पहचान, डीपफेक डिटेक्शन और उपयोगकर्ताओं के लिए स्पष्ट नियम इस चुनौती से निपटने में मदद कर सकते हैं।
इसके साथ डिजिटल साक्षरता भी महत्वपूर्ण है। यूजर्स को यह समझना होगा कि बेहद वास्तविक दिखाई देने वाली हर तस्वीर या वीडियो जरूरी नहीं कि असली हो।
तकनीक के साथ बढ़ी जिम्मेदारी
AI जितना शक्तिशाली होता जा रहा है, उसके सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल की आवश्यकता भी उतनी ही बढ़ रही है। सिंधु की चेतावनी इसी चिंता को रेखांकित करती है कि नई तकनीक का फायदा तभी टिकाऊ होगा जब उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था भी विकसित की जाए।
AI के गलत इस्तेमाल से जुड़ी रिपोर्ट पर सिंधु की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि तेजी से विकसित हो रही इस तकनीक के फायदे लेते हुए समाज इसके खतरों से खुद को कैसे सुरक्षित रखे।
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