सारब्रुकेन : जर्मनी। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने हाइलो ओपन महिला एकल प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में सिंधु ने डेनमार्क की मिया ब्लिचफेल्ट जेर्सफेल्ट के खिलाफ सीधे गेम में जीत दर्ज कर भारतीय बैडमिंटन को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दिलाई। इस जीत के साथ सिंधु ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया और भारतीय खेल प्रेमियों को जश्न मनाने का अवसर दिया।जर्मनी के सारब्रुकेन में आयोजित हाइलो ओपन बैडमिंटन प्रतियोगिता में सिंधु का प्रदर्शन चर्चा का विषय रहा। फाइनल में उन्होंने आक्रामक खेल, सटीक शॉट चयन और कोर्ट पर बेहतर नियंत्रण के दम पर डेनमार्क की प्रतिद्वंद्वी को चुनौती दी। मुकाबले में सिंधु ने शुरुआत से दबाव बनाए रखने की कोशिश की और महत्वपूर्ण अंकों पर संयम दिखाते हुए जीत हासिल की।
39 मिनट में जीता फाइनल मुकाबला
रविवार, 1 नवंबर 2026 को खेले गए महिला एकल फाइनल में सिंधु ने डेनमार्क की लाइन होजमार्क जेर्सफेल्ट को 21-12, 21-14 से हराया। पांच लाख अमेरिकी डॉलर की पुरस्कार राशि वाले बीडब्ल्यूएफ सुपर 500 टूर्नामेंट का खिताबी मुकाबला केवल 39 मिनट चला।विश्व रैंकिंग में आठवें स्थान पर काबिज सिंधु टूर्नामेंट में दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी थीं। वहीं, डेनमार्क की जेर्सफेल्ट आठवीं वरीयता प्राप्त और विश्व रैंकिंग में 25वें स्थान पर थीं। दोनों खिलाड़ियों के बीच फाइनल में प्रतिस्पर्धा की उम्मीद थी, लेकिन सिंधु ने अपने अनुभव और बेहतरीन खेल के दम पर मुकाबला दो गेम में समाप्त कर दिया।
पहले गेम में शुरुआत से बनाया दबाव
फाइनल मुकाबले के पहले गेम में दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआती अंकों के लिए संघर्ष किया। जेर्सफेल्ट ने सिंधु को लंबी रैलियों में उलझाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने अपनी गति और सटीक शॉट के जरिए मुकाबले पर नियंत्रण स्थापित कर लिया।सिंधु ने नेट के पास प्रभावी खेल दिखाया और मौके मिलने पर तेज स्मैश लगाकर अंक हासिल किए। पहले गेम के मध्यांतर तक उन्होंने 11-8 की बढ़त बना ली थी।इसके बाद डेनमार्क की खिलाड़ी ने वापसी का प्रयास किया, लेकिन सिंधु ने लगातार अंक जुटाकर अंतर बढ़ा दिया। उन्होंने पहला गेम 21-12 से अपने नाम किया।पहला गेम जीतने के बाद सिंधु का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने दूसरे गेम में भी अपनी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू किया।
दूसरे गेम में भी सिंधु का दबदबा
दूसरे गेम में जेर्सफेल्ट ने मुकाबले में वापसी करने के लिए आक्रामक खेल दिखाने की कोशिश की। उन्होंने कुछ अच्छी रैलियां खेलीं और सिंधु को चुनौती भी दी।हालांकि, सिंधु ने कोर्ट पर बेहतर संतुलन बनाए रखा। उन्होंने अपने शॉट की दिशा में बदलाव करते हुए प्रतिद्वंद्वी को लगातार कोर्ट के अलग-अलग हिस्सों में दौड़ाया।भारतीय खिलाड़ी ने महत्वपूर्ण मौकों पर गलतियों से बचते हुए बढ़त बनाए रखी। आखिरकार उन्होंने दूसरा गेम 21-14 से जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया।इस जीत के साथ सिंधु ने एक बार फिर साबित किया कि वह बड़े मुकाबलों में अपने अनुभव का प्रभावी इस्तेमाल कर सकती हैं।
साल 2026 का दूसरा खिताब
हाइलो ओपन की जीत सिंधु के लिए मौजूदा सत्र का दूसरा बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब है। इससे पहले उन्होंने जुलाई में जापान ओपन का खिताब जीता था।इसके अतिरिक्त पिछले सप्ताह फ्रेंच ओपन में भी सिंधु ने फाइनल तक का सफर तय किया था। हालांकि, वहां उन्हें दक्षिण कोरिया की विश्व नंबर एक खिलाड़ी एन से यंग से हार का सामना करना पड़ा था।फ्रेंच ओपन के फाइनल में मिली हार के महज एक सप्ताह बाद हाइलो ओपन का खिताब जीतना सिंधु के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।लगातार दो प्रतियोगिताओं के फाइनल में पहुंचना और उनमें से एक में चैंपियन बनना उनके हालिया प्रदर्शन की निरंतरता को दर्शाता है।
पूरे टूर्नामेंट में नहीं गंवाया एक भी गेम
हाइलो ओपन में सिंधु का सफर प्रभावशाली रहा। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के दौरान एक भी गेम नहीं गंवाया।शुरुआती दौर में उन्होंने भारत की प्रकृति भरत को हराया। इसके बाद फ्रांस की रोजी ऑक्टाविया पनकासारी के खिलाफ जीत दर्ज की।क्वार्टर फाइनल में सिंधु ने जर्मनी की अमाली शुल्ज को 21-12, 21-10 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।सेमीफाइनल में उनका मुकाबला भारत की युवा खिलाड़ी अनमोल खरब से हुआ। सिंधु ने इस मैच में 21-13, 21-16 से जीत हासिल कर फाइनल में जगह बनाई।फाइनल में जेर्सफेल्ट को हराने के साथ उन्होंने पूरे टूर्नामेंट का समापन बिना कोई गेम गंवाए किया।
डेनमार्क की खिलाड़ी के खिलाफ मजबूत रिकॉर्ड
फाइनल से पहले सिंधु का लाइन जेर्सफेल्ट के खिलाफ जीत-हार का रिकॉर्ड 6-1 था।डेनमार्क की खिलाड़ी ने सिंधु को इससे पहले वर्ष 2025 के सुदीरमन कप फाइनल्स में हराया था। हालांकि, अन्य मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ी का प्रदर्शन बेहतर रहा था।हाइलो ओपन के फाइनल में भी सिंधु ने इसी बढ़त को बरकरार रखा और एक और जीत दर्ज की।जेर्सफेल्ट ने फाइनल तक पहुंचने के लिए कड़ी चुनौती पार की थी। सेमीफाइनल में उन्होंने थाईलैंड की पोर्नपावी चोचुवोंग को 8-21, 21-19, 28-26 से हराया था। यह मुकाबला 82 मिनट चला था, जिसमें डेनमार्क की खिलाड़ी ने चार मैच प्वाइंट बचाए थे।इसके विपरीत सिंधु ने अपना सेमीफाइनल केवल 32 मिनट में जीत लिया था।
वर्ल्ड टूर फाइनल्स की उम्मीदों को मजबूती
हाइलो ओपन सुपर 500 प्रतियोगिता जीतने पर सिंधु को 9,200 रैंकिंग अंक मिले हैं।यह जीत उनके लिए साल के अंतिम चरण में विशेष महत्व रखती है, क्योंकि वह बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स में जगह बनाने की दौड़ में बनी हुई हैं।लगातार अच्छे प्रदर्शन से उनकी दावेदारी मजबूत हुई है। हालांकि, अंतिम क्वालिफिकेशन अन्य प्रतियोगिताओं के नतीजों और निर्धारित रैंकिंग मानकों पर निर्भर करेगा।
भारतीय बैडमिंटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि
पीवी सिंधु भारत की सबसे सफल बैडमिंटन खिलाड़ियों में शामिल हैं। वह ओलंपिक में दो पदक जीत चुकी हैं और विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक भी अपने नाम कर चुकी हैं।हाइलो ओपन में उनकी खिताबी जीत भारतीय बैडमिंटन के लिए उत्साहजनक उपलब्धि है। विशेष रूप से युवा खिलाड़ियों के लिए यह प्रदर्शन प्रेरणादायक माना जा सकता है।सिंधु ने इस प्रतियोगिता में न केवल अपने अनुभव का प्रदर्शन किया, बल्कि लगातार मुकाबलों में बेहतर लय और तकनीकी नियंत्रण भी दिखाया।फ्रेंच ओपन में उपविजेता रहने के बाद जर्मनी में चैंपियन बनना उनके सत्र का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।अब सिंधु की नजर आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स के लिए अपनी स्थिति मजबूत करने पर होगी।