पैरा तैराक निरंजन का जज्बा, 107 मेडल जीतकर रचा इतिहास
निरंजन ने जीते 107 मेडल
नई दिल्ली: भारतीय पैरा तैराक निरंजन मुकुंदन ने अपनी जिंदगी में कई शारीरिक चुनौतियों का सामना करते हुए अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में विशेष पहचान बनाई है। जन्म से रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या के कारण उन्हें अब तक 19 छोटी-बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा है। इसके बावजूद उन्होंने तैराकी में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए 107 अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं। अब वह जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियाई पैरा गेम्स 2026 की तैयारी कर रहे हैं।
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान निरंजन ने अपने संघर्ष, खेल करियर, परिवार के सहयोग और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बातचीत की। उन्होंने बताया कि लोग उनकी 19 सर्जरी को देखते हैं, लेकिन वह अपने जीवन को भारत के लिए जीते गए 107 पदकों के नजरिए से देखते हैं।
बचपन में इलाज के लिए शुरू की थी तैराकी
निरंजन मुकुंदन का जन्म स्पाइना बिफिडा नामक स्थिति के साथ हुआ था। इसके कारण उनके पैरों और रीढ़ की हड्डी के विकास में समस्याएं थीं। बचपन से ही उन्हें कई चिकित्सकीय प्रक्रियाओं और ऑपरेशन से गुजरना पड़ा।
डॉक्टरों ने उनके शारीरिक पुनर्वास के लिए पानी में व्यायाम करने की सलाह दी थी। इसी वजह से उन्होंने तैराकी शुरू की। शुरुआत में तैराकी उनके लिए उपचार का हिस्सा थी, लेकिन धीरे-धीरे यह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई। निरंजन ने बताया कि जब वह पहली बार स्विमिंग पूल में उतरे तो उन्हें बिना किसी की सहायता के पानी में चलने और आगे बढ़ने की आजादी महसूस हुई। यह अनुभव उनके लिए बेहद खास था। उनके कोच जॉन क्रिस्टोफर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और माता-पिता से उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक तैराकी में आगे बढ़ाने की बात कही। इसके बाद निरंजन ने पेशेवर तैराकी की दिशा में कदम बढ़ाया।
19 सर्जरी और 107 पदकों के पीछे लंबा संघर्ष
निरंजन का खेल करियर आसान नहीं रहा। लगातार सर्जरी, चोटों और पुनर्वास के कारण उन्हें कई बार अभ्यास से दूर रहना पड़ा। हालांकि, हर मुश्किल के बाद उन्होंने दोबारा पूल में वापसी की। उन्होंने बताया कि इन अनुभवों ने उन्हें धैर्य और मानसिक मजबूती सिखाई है। उनके करियर में हार और जीत दोनों के दौर आए, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया।
निरंजन भारत के पहले ऐसे पैरा तैराक बने जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 पदक जीतने की उपलब्धि हासिल की। अब उनके पदकों की संख्या 107 हो चुकी है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, कोच, सहयोगी स्टाफ और उन सभी लोगों को दिया जिन्होंने उनके खेल करियर में मदद की। निरंजन के अनुसार, उनके लिए पदकों से अधिक महत्वपूर्ण देश का प्रतिनिधित्व करना और हर प्रतियोगिता में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।
एशियाई पैरा गेम्स के लिए बदली ट्रेनिंग
निरंजन मुकुंदन 2026 के एशियाई पैरा गेम्स में लगातार चौथी बार हिस्सा लेने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार उनकी ट्रेनिंग का तरीका पहले से अलग है। पहले वह कई तैराकी स्पर्धाओं की तैयारी करते थे, लेकिन अब उनका ध्यान केवल एक या दो स्पर्धाओं पर केंद्रित है। वह अपने कोच के साथ तकनीकी सुधार और पिछली प्रतियोगिताओं के प्रदर्शन का विश्लेषण कर रहे हैं।
विशेष रूप से 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले उनके लिए महत्वपूर्ण स्पर्धा है। इसमें तैराक को चार अलग-अलग शैलियों में तैरना होता है। पिछले एशियाई पैरा गेम्स में निरंजन इस स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने से एक सेकंड से भी कम अंतर से चूक गए थे। यही वजह है कि इस बार वह अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। साल 2024 से 2025 के अंत तक चोटों से जूझने के बाद उन्होंने वापसी की और 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले में तीन मिनट से कम समय दर्ज किया। इस प्रदर्शन के साथ वह विश्व रैंकिंग में शीर्ष पांच में पहुंचे।
परिवार के सहयोग को बताया सबसे बड़ी ताकत
निरंजन ने अपने परिवार को अपनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता बचपन से ही उन्हें तैराकी के लिए प्रोत्साहित करते रहे हैं। परिवार ने उन्हें स्विमिंग पूल तक पहुंचाने से लेकर प्रतियोगिताओं की तैयारी और कठिन समय में उनका साथ देने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निरंजन ने बताया कि आज भी उनके परिवार के सदस्य हर पदक का जश्न उसी उत्साह से मनाते हैं, जैसे वह उनका पहला पदक हो। उन्होंने युवा पैरा खिलाड़ियों को संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों में हार नहीं माननी चाहिए। लगातार प्रयास और मेहनत से खेल में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं।
पैरा खेलों को अधिक समर्थन देने की अपील
निरंजन मुकुंदन ने भारत में पैरा खेलों को और अधिक जनसमर्थन मिलने की जरूरत बताई। उनके अनुसार, खिलाड़ियों के लिए दर्शकों का उत्साह और समर्थन बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पैरा खिलाड़ियों की प्रतियोगिताएं देखने स्टेडियम पहुंचें और सोशल मीडिया पर भी उनका समर्थन करें। निरंजन ने कहा कि जब वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने उतरते हैं, तो उनके मन में तिरंगे के प्रति गर्व की भावना होती है। दौड़ शुरू होने के बाद उनका पूरा ध्यान अपनी लेन और प्रदर्शन पर रहता है।
आगामी एशियाई पैरा गेम्स को लेकर उनका लक्ष्य स्पष्ट है। वह पूल में अपना शत-प्रतिशत प्रदर्शन करना और देश को गौरवान्वित करना चाहते हैं। निरंजन मुकुंदन की कहानी केवल शारीरिक चुनौतियों से संघर्ष की नहीं, बल्कि खेल के प्रति समर्पण और लगातार मेहनत की भी है। 19 सर्जरी के बावजूद 107 अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल करने वाले इस खिलाड़ी की नजर अब एशियाई पैरा गेम्स 2026 में बेहतर प्रदर्शन पर है।