कराची : पाकिस्तान के विकेटकीपर-बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) को पत्र लिखकर अपने मोबाइल फोन की वापसी और चल रही जांच को लेकर स्पष्ट जानकारी मांगी है। रिजवान ने अपने पत्र में लाहौर हाई कोर्ट के हालिया आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि एजेंसी अदालत के निर्देशों का पालन करे और उन्हें अनावश्यक परेशानी में न डाले।
रिपोर्टों के अनुसार, रिजवान ने अपने पत्र में कहा है कि उन्हें जांच के बारे में लिखित रूप से पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी ने आगे की कार्यवाही के बारे में उनसे संपर्क नहीं किया। रिजवान का कहना है कि उनका मोबाइल फोन अभी भी NCCIA की कस्टडी में है और उसे वापस किया जाना चाहिए।
रिजवान के मुताबिक, उनका फोन 31 अगस्त को इंग्लैंड में लिया गया था। उनका दावा है कि उस समय अधिकारियों ने कहा था कि डिवाइस को जांच के बाद करीब तीन घंटे में वापस कर दिया जाएगा, लेकिन फोन अब तक नहीं लौटाया गया। बाद में 10 सितंबर को जब वह NCCIA के सामने पेश हुए, तब भी एजेंसी को उनके अनलॉक फोन तक पहुंच उपलब्ध थी।
मामला लाहौर हाई कोर्ट तक भी पहुंचा था। रिजवान ने NCCIA की जांच और नोटिस को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। 17 सितंबर को लाहौर हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि उन्हें एजेंसी की जांच में शामिल होकर सहयोग करना चाहिए और नोटिस का जवाब देना चाहिए।
अदालत के लिखित आदेश में यह भी कहा गया कि NCCIA रिजवान को किसी तरह की “परेशानी” या “अनावश्यक असुविधा” न पहुंचाए और जांच कानून के मुताबिक की जाए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि केवल कॉल-अप नोटिस जारी होना अपने आप में किसी अपराध का आरोप साबित नहीं करता।
अदालत ने रिजवान को उन सामानों की वापसी के लिए उचित कानूनी फोरम का रुख करने की अनुमति भी दी थी जो जांच के दौरान एजेंसी की कस्टडी में चले गए थे। इनमें उनका मोबाइल फोन भी शामिल बताया गया है। इसी आदेश के बाद रिजवान की ओर से NCCIA को नया पत्र भेजा गया।
रिजवान के वकील ने अदालत में पहले भी यह तर्क दिया था कि क्रिकेटर को इंग्लैंड में एक होटल लॉबी में पूछताछ के लिए बुलाया गया था और उस समय उनके फोन को जांच के लिए लिया गया। बचाव पक्ष का कहना था कि फोन जल्दी वापस करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
दूसरी ओर, NCCIA की जांच जारी है। अदालत के सामने सरकारी पक्ष ने कहा था कि एजेंसी को मामले की जांच करने का अधिकार है और इस स्तर पर उसे कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए। हाई कोर्ट ने भी एजेंसी की जांच को अधिकार क्षेत्र से बाहर या दुर्भावना से प्रेरित मानने से इनकार किया था।
रिजवान की ओर से अब मुख्य रूप से दो मांगें सामने रखी गई हैं। पहली, उन्हें यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि जांच किस विषय में है और आगे उनसे क्या अपेक्षित है। दूसरी, उनका मोबाइल फोन वापस किया जाए, जिसे वह लंबे समय से NCCIA की कस्टडी में बता रहे हैं।
मामले में यह भी स्पष्ट है कि अदालत ने रिजवान को जांच से अलग रहने की अनुमति नहीं दी है। इसके उलट, उन्हें NCCIA की कार्यवाही में शामिल होने और एजेंसी के सवालों का जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही एजेंसी को भी कानूनी प्रक्रिया का पालन करने और क्रिकेटर को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं करने के लिए कहा गया है।
रिजवान के पत्र से यह संकेत मिलता है कि वह अदालत के आदेश के मुताबिक जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन साथ ही वह अपने अधिकारों और जब्त सामान की वापसी को लेकर भी एजेंसी से जवाब चाहते हैं। फिलहाल मोबाइल फोन की वापसी और जांच के अगले चरण पर NCCIA की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
इस पूरे मामले में अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। जांच जारी है और रिजवान के खिलाफ किसी आरोप की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया से ही होगी। लाहौर हाई कोर्ट भी स्पष्ट कर चुका है कि इस स्तर पर कॉल-अप नोटिस को अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
फिलहाल मोहम्मद रिजवान और NCCIA के बीच यह मामला जांच के दायरे में बना हुआ है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब अगला महत्वपूर्ण सवाल यह है कि एजेंसी रिजवान के मोबाइल फोन की वापसी और उनके पत्र में उठाए गए सवालों पर क्या निर्णय लेती है।