नागोया: भारत की बेहतरीन वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने बुधवार को एशियाई खेलों में महिलाओं के 49 किग्रा वेटलिफ्टिंग इवेंट में सिल्वर मेडल जीतकर अपना पहला एशियाई खेल मेडल हासिल किया।
32 साल की भारतीय खिलाड़ी ने नागोया सिटी ट्रेड एंड इंडस्ट्री सेंटर में कुल 198 किग्रा (87 किग्रा स्नैच और 111 किग्रा क्लीन एंड जर्क) का भार उठाकर सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही वह 1998 में बैंकॉक में कर्णम मल्लेश्वरी के सिल्वर मेडल जीतने के बाद एशियाई खेलों में वेटलिफ्टिंग में मेडल जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बन गईं।
दो बार की एशियाई खेल और वर्ल्ड चैंपियन, उत्तर कोरिया की री सोंग-गम ने कुल 210 किग्रा (स्नैच 94 किग्रा, क्लीन एंड जर्क 121 किग्रा) भार उठाकर गोल्ड मेडल जीता, जबकि इंडोनेशिया की विजयाना लुलुक डियानी ट्राई ने 191 किग्रा (स्नैच में 87 किग्रा, क्लीन एंड जर्क में 103 किग्रा) भार उठाकर ब्रॉन्ज़ मेडल जीता।
आइची-नागोया में मिले इस मेडल के साथ मीराबाई का तीन बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट्स – ओलंपिक, एशियाई खेल और कॉमनवेल्थ गेम्स – में मेडल का कलेक्शन पूरा हो गया। इसके अलावा, कर्णम मल्लेश्वरी के बाद मीराबाई दूसरी ऐसी भारतीय वेटलिफ्टर बन गईं जिन्होंने सभी बड़े इंटरनेशनल वेटलिफ्टिंग इवेंट्स – ओलंपिक, एशियाई खेल, कॉमनवेल्थ गेम्स और वर्ल्ड चैंपियनशिप व एशियाई और कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप – में मेडल जीता है।
मीराबाई के नाम ओलंपिक सिल्वर, वर्ल्ड टाइटल और तीन कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडल हैं, लेकिन बुधवार तक एशियाई खेलों का पोडियम उनसे दूर ही था। 2014 के एशियाई खेलों में अपने डेब्यू पर वह नौवें स्थान पर रहीं। जकार्ता में 2018 के इवेंट में चोट के कारण वह हिस्सा नहीं ले पाईं। 2023 में हांगझोऊ में उन्हें एक और मौका मिला, लेकिन फाइनल में जांघ की चोट के कारण क्लीन एंड जर्क की कोशिशों में दिक्कत आई और वह निराशाजनक रूप से चौथे स्थान पर रहीं।
तीन साल बाद, चानू जापान लौटीं – वही देश जहां उन्होंने ओलंपिक सिल्वर मेडल जीता था – और आखिरकार वह एशियाई खेल मेडल हासिल किया, जिसकी उन्हें 2014 से तलाश थी।
उनके सफर में सफलता के साथ-साथ कई मुश्किलें भी आईं। रियो 2016 ओलंपिक में वह प्रतियोगिता में एक भी वैलिड लिफ्ट नहीं कर पाई थीं। पांच साल बाद, उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में ज़बरदस्त वापसी की, सिल्वर मेडल जीता और वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग में अपनी पहचान बड़े नामों में बनाई।
चानू ने 87kg स्नैच के साथ अपनी शुरुआत की और क्लीन-एंड-जर्क में भी वही वज़न उठाकर सफलता हासिल की, और कुल मिलाकर 198kg वज़न उठाया।
इस सिल्वर मेडल ने नागोया में भारत के बढ़ते मेडल टैली में और इजाफ़ा किया और साथ ही एशियन गेम्स में वेटलिफ्टिंग मेडल के लिए 28 साल के इंतज़ार को भी खत्म किया।
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