नई दिल्ली : भारतीय पहलवान मनीषा भानवाला ने विश्व चैंपियन बनने के बाद अपनी ऐतिहासिक सफलता का श्रेय दिवंगत पिता को दिया है। कजाखस्तान के अस्ताना में सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीतने वाली मनीषा के लिए यह उपलब्धि वर्षों पुराने पारिवारिक सपने के पूरा होने का क्षण भी है। पिता को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सीख आज भी मुश्किल परिस्थितियों में आगे बढ़ने की ताकत देती है। मनीषा ने अपने खेल से रिश्ते को इन शब्दों में व्यक्त किया, “कुश्ती मेरे लिये पहला और आखिरी विकल्प है।”
29 वर्षीय मनीषा ने 30 अक्टूबर को महिला 59 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। वह सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में सोना जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। फाइनल में उन्होंने अमेरिका की एबिगेल नेटे को 8-6 से हराया। उनकी जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि मुकाबले में एक समय वह 0-6 से पीछे थीं। इस मुश्किल स्थिति से वापसी करते हुए उन्होंने विश्व खिताब अपने नाम किया और भारतीय महिला कुश्ती का लंबा इंतजार खत्म किया।
भारतीय कुश्ती महासंघ की ओर से आयोजित बातचीत में मनीषा ने अपने पिता के योगदान का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिता ने उन्हें सिखाया था कि कोई काम शुरू करने के बाद उसे पूरा करने का संकल्प रखना चाहिए। यही सोच उनके खेल और जीवन का हिस्सा बन गई। मनीषा के मुताबिक कुश्ती ने उन्हें पहचान और आगे बढ़ने की शक्ति दी है। पिता अब उनके साथ नहीं हैं, लेकिन वह आज भी उनसे मन ही मन बात करती हैं और उन्हें अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मानती हैं। फाइनल से पहले पिता की याद वाली खास टीशर्ट पहनना भी इसी लगाव की अभिव्यक्ति था।
मनीषा को कुश्ती की दुनिया तक पहुंचाने में उनके पिता सुरेश भानवाला की अहम भूमिका थी। करीब 13 वर्ष पहले उन्होंने बेटी को इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया था। उनका सपना था कि मनीषा अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतें। वर्ष 2022 में उनका निधन हो गया और वह बेटी को विश्व चैंपियन बनते नहीं देख सके। अस्ताना में जीत के बाद मनीषा ने पिता की तस्वीर वाली टीशर्ट दिखाई। यह उस व्यक्ति के प्रति उनकी श्रद्धांजलि थी जिसने सबसे पहले उनकी क्षमता पर भरोसा किया था।
पिता को खोने का समय मनीषा के करियर का बेहद कठिन दौर था। अप्रैल 2022 में वह अपनी पहली सीनियर एशियाई चैंपियनशिप के लिए मंगोलिया जा रही थीं। पिता उन्हें दिल्ली हवाई अड्डे तक छोड़ने आए थे। उसी दिन उनके निधन की खबर मिली। इस गहरे दुख के बावजूद मनीषा ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और कांस्य पदक जीता। इसके बाद उन्होंने 2022 से 2024 तक लगातार तीन एशियाई चैंपियनशिप में कांस्य हासिल किया। वर्ष 2025 में जॉर्डन के अम्मान में स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।
विश्व चैंपियन बनने का रास्ता आसान नहीं रहा। पिछले विश्व चैंपियनशिप अभियानों में उन्हें पदक नहीं मिला था। इस बार भी एशियाई खेलों से खाली हाथ लौटना निराशाजनक रहा। ऐसे समय में कोच वीरेंदर दहिया ने उन्हें अगले लक्ष्य पर ध्यान लगाने की सलाह दी। मनीषा ने अभ्यास और रिकवरी पर काम जारी रखा। एशियाई खेलों में 57 किलोग्राम वर्ग में उतरने के बाद उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में 59 किलोग्राम वर्ग चुना। दोनों प्रतियोगिताओं के बीच कम समय के कारण वजन घटाने और शरीर को उबरने का पर्याप्त अवसर देना इस फैसले की अहम वजह थी।
अस्ताना में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा। उन्होंने शुरुआती दौर में कनाडा की लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को हराया। क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की बोलोरतुया खुरेलखू के खिलाफ 6-0 की जीत दर्ज की। सेमीफाइनल में मेजबान कजाखस्तान की अल्टिन शगायेवा को हराकर उन्होंने खिताबी मुकाबले में जगह बनाई। फाइनल में अमेरिकी प्रतिद्वंद्वी ने शुरुआती बढ़त बना ली, लेकिन मनीषा ने अपना संयम बनाए रखा। शुरुआती पिछड़ने के बावजूद मुकाबले में टिके रहने की उनकी क्षमता अंत में निर्णायक साबित हुई।
निर्णायक मुकाबले में मनीषा ने पहले अंतर कम किया और फिर स्कोर 6-6 तक पहुंचाया। बराबरी के बावजूद जीत सुनिश्चित नहीं थी, क्योंकि उस स्थिति में नेटे को बढ़त का लाभ मिल रहा था। मनीषा ने आक्रामक प्रयास जारी रखा और दो अंक लेकर स्कोर 8-6 कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी बढ़त बचाकर स्वर्ण पक्का किया। विश्व कुश्ती संस्था के अनुसार वह सुशील कुमार के बाद सीनियर विश्व खिताब जीतने वाली दूसरी भारतीय पहलवान हैं। सुशील ने 2010 में पुरुषों के 66 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीता था। अब मनीषा की निगाहें ओलंपिक भार वर्ग 57 किलोग्राम में अपनी सफलता दोहराने पर हैं। उन्होंने अगले विश्व चैंपियनशिप अभियान में इसी वर्ग में उतरने का लक्ष्य रखा है। उनकी इच्छा है कि उनकी जीत के बाद दूसरी भारतीय महिला पहलवान भी फाइनल में अधिक आत्मविश्वास के साथ खेलें। पिता का सपना पूरा करने वाली मनीषा के सामने अब नई मंजिल है और उनकी तैयारी का केंद्र आने वाली बड़ी प्रतियोगिताएं होंगी।