नई दिल्ली। वर्ल्ड U-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप के पहले ही दिन भारत की 4x400 मीटर मिक्स्ड रिले टीम के फाइनल में जगह नहीं बना पाने के बाद टीम चयन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय टीम क्वालिफिकेशन राउंड में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी और फाइनल की दौड़ से बाहर हो गई।
भारतीय टीम अपनी क्वालिफिकेशन हीट-1 में 3 मिनट 22.85 सेकंड के समय के साथ चौथे स्थान पर रही। नियमों के अनुसार, प्रत्येक हीट से शीर्ष तीन स्थान हासिल करने वाली टीमें ही फाइनल के लिए क्वालीफाई करती हैं। मामूली अंतर से भारत फाइनल में पहुंचने का मौका गंवा बैठा।
टीम के प्रदर्शन से ज्यादा चर्चा उस फैसले की हो रही है, जिसमें अंतिम समय पर टीम संयोजन में बदलाव किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, 400 मीटर के कोच नागेश पिल्लई ने आखिरी समय में किए गए बदलाव के तहत भारत के दो तेज क्वार्टरमाइलर्स मोहम्मद अशफाक और भूमिका नेहते को टीम में शामिल नहीं किया।
इन दोनों खिलाड़ियों को 400 मीटर स्पर्धा में भारत के प्रमुख धावकों में गिना जाता है। ऐसे में रिले टीम से उनका बाहर रहना कई लोगों के लिए हैरानी का कारण बना। विशेषज्ञों और एथलेटिक्स से जुड़े लोगों ने सवाल उठाए कि जब मुकाबला बेहद प्रतिस्पर्धी स्तर का था, तो टीम के सबसे तेज धावकों में शामिल खिलाड़ियों को अंतिम लाइनअप में क्यों नहीं रखा गया।
4x400 मीटर मिक्स्ड रिले में पुरुष और महिला दोनों वर्गों के धावक हिस्सा लेते हैं। इसमें टीम की सफलता केवल व्यक्तिगत गति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सही संयोजन, बैटन ट्रांसफर और खिलाड़ियों की मौजूदा फॉर्म भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
भारत की टीम ने दौड़ के दौरान प्रयास तो किया, लेकिन वह शीर्ष तीन में जगह बनाने में सफल नहीं हो सकी। 3:22.85 सेकंड का समय टीम को फाइनल तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ।
भारतीय एथलेटिक्स में हाल के वर्षों में 400 मीटर और रिले स्पर्धाओं में प्रदर्शन को लेकर काफी उम्मीदें बढ़ी हैं। युवा खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता दिखाई है और इसी वजह से U-20 चैंपियनशिप जैसी प्रतियोगिताओं में उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है।
टीम चयन को लेकर उठे सवालों के बीच कोचिंग रणनीति पर भी चर्चा शुरू हो गई है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि रिले स्पर्धाओं में अंतिम समय के बदलाव काफी जोखिम भरे हो सकते हैं, क्योंकि खिलाड़ियों के बीच तालमेल और बैटन एक्सचेंज की तैयारी लंबे अभ्यास से तैयार होती है।
हालांकि, कोचिंग टीम का अपना नजरिया हो सकता है और चयन के पीछे कई तकनीकी कारण हो सकते हैं। रिले टीम चुनते समय केवल व्यक्तिगत रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि खिलाड़ी की फिटनेस, रेस रणनीति और उस दिन के प्रदर्शन की संभावना को भी ध्यान में रखा जाता है।
इसके बावजूद, जब कोई टीम कुछ सेकंड के अंतर से फाइनल से बाहर होती है, तो चयन प्रक्रिया और रणनीति की समीक्षा स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाती है।
मोहम्मद अशफाक और भूमिका नेहते जैसे अनुभवी युवा धावकों की गैरमौजूदगी को लेकर उठे सवालों के बाद अब भारतीय एथलेटिक्स जगत की नजर आगे की प्रतियोगिताओं पर होगी। युवा खिलाड़ियों के लिए यह चैंपियनशिप अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने का बड़ा मंच है और ऐसे मुकाबलों में छोटी-छोटी रणनीतिक गलतियां भी परिणाम बदल सकती हैं।
भारत के लिए अब व्यक्तिगत स्पर्धाओं में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद बनी हुई है। टीम प्रबंधन को भी आने वाले मुकाबलों के लिए चयन और रणनीति को लेकर अधिक सावधानी बरतनी होगी, ताकि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का बेहतर उपयोग किया जा सके।
U-20 स्तर की प्रतियोगिताएं भविष्य के ओलंपिक और विश्व स्तरीय खिलाड़ियों को तैयार करने का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती हैं। ऐसे में टीम चयन, प्रशिक्षण और खिलाड़ियों के सही संयोजन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
भारत की मिक्स्ड रिले टीम का फाइनल से बाहर होना निराशाजनक जरूर है, लेकिन इस घटना ने युवा एथलीटों के चयन और तैयारी की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस भी शुरू कर दी है।