नागोया: एशियन गेम्स 2026 में भारत के लंबी दूरी के धावक सावन बरवाल ने इतिहास रच दिया है। शनिवार को पुरुष मैराथन में सावन ने 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का समय निकालते हुए सिल्वर मेडल जीता। इस शानदार प्रदर्शन के दौरान उन्होंने इसी साल बनाया अपना राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। भारत को एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में 44 साल बाद पदक मिला है।
21 सेकंड से तोड़ा अपना रिकॉर्ड
28 वर्षीय सावन बरवाल ने अप्रैल 2026 में रॉटरडैम मैराथन में 2:11:58 का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। उस प्रदर्शन से उन्होंने शिवनाथ सिंह का 1978 में बनाया 2:12:00 का 48 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा था। अब नागोया में सावन ने 2:11:37 का समय निकालते हुए अपने रिकॉर्ड में 21 सेकंड का सुधार किया।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि सावन के करियर की यह महज दूसरी प्रतिस्पर्धी मैराथन थी। इसी साल उन्होंने मैराथन में कदम रखा और कुछ ही महीनों में दो बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने के साथ एशियन गेम्स का रजत पदक भी हासिल कर लिया।
जापान के यामाशिता ने जीता गोल्ड
पुरुष मैराथन का स्वर्ण पदक जापान के इचिताका यामाशिता ने अपने नाम किया। उन्होंने 2 घंटे 10 मिनट 49 सेकंड में रेस पूरी की। सावन उनसे 48 सेकंड पीछे रहते हुए दूसरे स्थान पर रहे। चीन के पेइयोउ फेंग ने 2:12:13 के समय के साथ कांस्य पदक जीता।
42.195 किलोमीटर की इस मैराथन में सावन शुरुआत से ही पदक की दौड़ में बने रहे। वह 10 किलोमीटर के बाद अग्रणी धावकों में शामिल हो गए और रेस के बड़े हिस्से में सामने रहे। 35 किलोमीटर तक भी वह शीर्ष स्थान की लड़ाई में बने हुए थे। आखिरी हिस्से में जापानी धावक यामाशिता ने बढ़त बनाई, लेकिन सावन ने दूसरा स्थान बरकरार रखा।
44 साल का इंतजार खत्म
भारत को एशियन गेम्स पुरुष मैराथन में पिछला पदक 1982 के दिल्ली खेलों में मिला था, जब होसुर कुकप्पा सीतारन ने कांस्य पदक जीता था। उससे पहले 1951 के पहले एशियन गेम्स में छोटा सिंह ने स्वर्ण और सूरत सिंह माथुर ने कांस्य पदक जीता था। सावन इस स्पर्धा में एशियन गेम्स पदक जीतने वाले चौथे भारतीय बने।
सावन की उपलब्धि का एक और ऐतिहासिक पहलू है। भारत के इससे पहले के तीनों एशियन गेम्स मैराथन पदक नई दिल्ली में हुए खेलों में आए थे। सावन विदेश में आयोजित एशियन गेम्स में मैराथन पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए।
हिमाचल से निकलकर एशियन गेम्स के पोडियम तक
सावन बरवाल हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंदर नगर से आते हैं और भारतीय सेना से जुड़े हैं। उन्होंने अपने करियर में 5000 मीटर और 10,000 मीटर जैसी लंबी दूरी की स्पर्धाओं में हिस्सा लिया है। इसके बाद उन्होंने मैराथन की ओर रुख किया।
इस स्पर्धा में भारत के एक अन्य धावक कार्तिक करकरा ने 2 घंटे 22 मिनट 41 सेकंड का समय निकाला और 17वें स्थान पर रहे।
सावन बरवाल का सिल्वर मेडल भारतीय एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बन गया है। महज पांच महीने के भीतर अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड सुधारकर एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचने वाले सावन ने भारतीय मैराथन में नया अध्याय जोड़ दिया है।
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