विजयवाड़ा। जापान में आयोजित 2026 एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन कर गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले भारतीय तीरंदाज गणेश मणि रत्नम थिरुमुरु का स्वदेश लौटने पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। विजयवाड़ा पहुंचने पर खेल संघों, परिवार के सदस्यों, समर्थकों और स्थानीय खेल प्रेमियों ने उनका अभिनंदन किया। दो पदकों के साथ लौटे गणेश ने इसे अपने करियर की बड़ी उपलब्धि बताया और अब 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।
गणेश मणि रत्नम ने एशियन गेम्स में पुरुषों की कंपाउंड टीम स्पर्धा में साहिल जाधव और कुशल दलाल के साथ मिलकर स्वर्ण पदक जीता। भारतीय तिकड़ी ने फाइनल में चीन को बेहद रोमांचक मुकाबले में 238-237 से हराकर गोल्ड अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत ने कंपाउंड तीरंदाजी में अपना मजबूत प्रदर्शन जारी रखा।
टीम इवेंट में स्वर्ण पदक जीतने के बाद गणेश ने पुरुषों की कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा में भी शानदार खेल दिखाया। उन्होंने कांस्य पदक मुकाबले में वियतनाम के कोंग डुक डांग को 149-144 से हराकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। इससे पहले सेमीफाइनल में उन्हें दक्षिण कोरिया के किम जोंगहो के खिलाफ 144-148 से हार का सामना करना पड़ा था।
ANI से बातचीत में गणेश ने कहा कि अपने पहले एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत कांस्य और टीम स्वर्ण पदक जीतना उनके करियर का बेहद खास अनुभव रहा। उन्होंने अपने परिवार, कोच, टीम मैनेजमेंट और समर्थन करने वाले सभी लोगों का आभार जताया।
गणेश ने यह भी कहा कि उनका अगला बड़ा लक्ष्य 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक है। LA 2028 में कंपाउंड तीरंदाजी की मिक्स्ड टीम स्पर्धा को ओलंपिक कार्यक्रम में शामिल किया गया है। भारत ने एशियन गेम्स में इस स्पर्धा के जरिए ओलंपिक क्वालिफिकेशन भी हासिल किया है। भारतीय तीरंदाजी के लिए यह बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि कंपाउंड आर्चरी पहली बार ओलंपिक का हिस्सा बनने जा रही है।
गणेश ने कहा कि अब उनका पूरा ध्यान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने और ओलंपिक टीम में जगह बनाने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि एशियन गेम्स से मिला आत्मविश्वास आगे की प्रतियोगिताओं में मदद करेगा। खिलाड़ियों के लिए बड़े मंच पर पदक जीतना न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि होती है बल्कि इससे आने वाली प्रतियोगिताओं के लिए मनोबल भी बढ़ता है।
पुरुष कंपाउंड टीम के लिए भी एशियन गेम्स यादगार रहे। कुशल दलाल, साहिल जाधव और गणेश मणि रत्नम की तिकड़ी ने दबाव वाले मुकाबलों में शानदार संयम दिखाया। फाइनल मुकाबले में चीन ने भारत को कड़ी चुनौती दी, लेकिन भारतीय तीरंदाजों ने अंतिम दौर तक सटीक निशाने लगाते हुए एक अंक से जीत हासिल की।
भारत के कंपाउंड तीरंदाजों ने इस एशियन गेम्स में कुल चार पदक जीते। पुरुष और महिला टीम स्पर्धाओं के साथ मिक्स्ड टीम इवेंट में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। गणेश का व्यक्तिगत कांस्य इस सफल अभियान में एक और महत्वपूर्ण पदक रहा।
गणेश की वापसी पर आयोजित स्वागत कार्यक्रम में उनके समर्थकों ने फूल-मालाओं के साथ उनका अभिनंदन किया। परिवार के सदस्यों ने भी उनकी सफलता पर खुशी जताई। स्थानीय खेल संगठनों ने कहा कि गणेश की उपलब्धि युवा खिलाड़ियों को तीरंदाजी की ओर प्रेरित करेगी।
गणेश ने अपने खेल सफर के बारे में बताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता के पीछे लंबे समय की मेहनत और अनुशासन होता है। उनका मानना है कि एशियन गेम्स जैसे बड़े आयोजन में दबाव बहुत ज्यादा रहता है, लेकिन नियमित अभ्यास और मानसिक तैयारी से खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं।
एशियन गेम्स में भारत की कंपाउंड टीम का प्रदर्शन यह भी दिखाता है कि देश इस इवेंट में तेजी से मजबूत हो रहा है। खासकर LA 2028 में कंपाउंड मिक्स्ड टीम प्रतियोगिता के शामिल होने से भारतीय खिलाड़ियों के सामने ओलंपिक पदक जीतने का नया अवसर खुला है।
गणेश ने संकेत दिया कि आने वाले महीनों में वह राष्ट्रीय शिविरों और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी तैयारी को और मजबूत करेंगे। उनका लक्ष्य निरंतरता बनाए रखना और विश्व स्तर पर अपने प्रदर्शन में सुधार करना है।
अपने पहले एशियन गेम्स में दो पदक जीतने के बाद गणेश मणि रत्नम अब भारतीय तीरंदाजी के उभरते चेहरों में शामिल हो गए हैं। टीम गोल्ड और व्यक्तिगत ब्रॉन्ज ने उनके करियर को नई पहचान दी है। अब उनकी नजर 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक पर है, जहां कंपाउंड आर्चरी भारत के लिए पदक की नई उम्मीद बन सकती है।
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