2019 की हार से भावुक हुए थे धोनी, आखिरी मैच को लेकर कही थी दिल छूने वाली बात
नई दिल्ली: महेंद्र सिंह धोनी को मैदान पर मुश्किल परिस्थितियों में भी शांत रहने के लिए जाना जाता है, लेकिन विश्व कप 2019 के सेमीफाइनल की हार उनके लिए बेहद भावुक करने वाला पल थी। न्यूजीलैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए मुकाबले में भारत का सफर समाप्त हो गया था। यही मैच धोनी के अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मुकाबला भी साबित हुआ। बाद में उन्होंने बताया कि उस दिन उनके मन में हार के दुख के साथ देश के लिए दोबारा नहीं खेलने का विचार भी चल रहा था। हालांकि, उन्होंने उस समय सार्वजनिक रूप से संन्यास की घोषणा नहीं की थी।
धोनी ने अक्टूबर 2023 में एक कार्यक्रम के दौरान उस अनुभव को याद किया था। उनके बयान का आशय था कि करीबी मुकाबला हारने के बाद भावनाओं को नियंत्रित करना कठिन होता है। वह अपने भविष्य को लेकर मन में योजना बना चुके थे। उनके लिए भारत की जर्सी में वह आखिरी दिन था। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की औपचारिक घोषणा उन्होंने लगभग एक साल बाद की, लेकिन उनके मुताबिक मन में विदाई का फैसला पहले ही हो चुका था। यह उनका बाद में दिया गया बयान था; इसे सेमीफाइनल के तुरंत बाद ड्रेसिंग रूम में दिया गया भाषण नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने ट्रेनर से जुड़ा एक प्रसंग भी साझा किया। धोनी के अनुसार, खिलाड़ियों को मिलने वाला एक उपकरण वह ट्रेनर को वापस दे रहे थे। ट्रेनर ने उसे अपने पास रखने को कहा। उस समय धोनी के मन में यह बात थी कि अब उन्हें उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन वह अपना फैसला बताना नहीं चाहते थे। उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व करने के अवसर को विशेष बताया और समझाया कि लंबे समय तक क्रिकेट खेलने के बाद उस भूमिका से विदा लेने के विचार उनके मन में चल रहे थे।
ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों की भावुक स्थिति का उल्लेख तत्कालीन बल्लेबाजी कोच संजय बांगड़ ने भी किया था। अक्टूबर 2023 में उन्होंने बताया कि सेमीफाइनल की हार के बाद धोनी, ऋषभ पंत और हार्दिक पंड्या अपने आंसू नहीं रोक पाए थे। बांगड़ के अनुसार, खिलाड़ियों के लिए यह परिणाम दिल तोड़ने वाला था, क्योंकि भारतीय टीम टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन कर रही थी। उनकी इस याद से पता चलता है कि हार का असर केवल मैदान तक सीमित नहीं रहा था। खिलाड़ियों ने ड्रेसिंग रूम में भी अपनी निराशा महसूस की थी।
भारत और न्यूजीलैंड का यह सेमीफाइनल नौ जुलाई 2019 को शुरू हुआ था। बारिश के कारण मुकाबला अगले दिन पूरा हुआ। न्यूजीलैंड ने आठ विकेट पर 239 रन बनाए और भारत को फाइनल में पहुंचने के लिए 240 रन का लक्ष्य मिला। लक्ष्य का पीछा करते समय भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। रोहित शर्मा, केएल राहुल और विराट कोहली एक-एक रन बनाकर आउट हो गए। भारत ने पांच रन के स्कोर पर तीन विकेट गंवा दिए थे। इसके बाद दिनेश कार्तिक भी आउट हुए और टीम पर दबाव बढ़ता गया।
ऋषभ पंत और हार्दिक पंड्या ने पारी संभालने का प्रयास किया, लेकिन दोनों के विकेट गिरने के बाद जिम्मेदारी धोनी और रवींद्र जडेजा पर आ गई। दोनों ने सातवें विकेट के लिए 116 रन जोड़े। जडेजा ने 59 गेंदों में 77 रन बनाए और चार छक्के लगाए। धोनी ने अर्धशतक लगाया। इस साझेदारी ने शुरुआती संकट के बाद भारत को मुकाबले में वापस ला दिया था। अंतिम दो ओवरों में भारत को 31 रन चाहिए थे, लेकिन दूसरे रन की कोशिश में मार्टिन गुप्टिल के सीधे थ्रो पर धोनी रनआउट हो गए। भारत 18 रन से हार गया।
तत्कालीन कप्तान विराट कोहली ने हार के बाद शुरुआती बल्लेबाजी को निर्णायक बताया था। उन्होंने स्वीकार किया कि न्यूजीलैंड ने नई गेंद से सटीक गेंदबाजी की और भारतीय बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाया। कोहली के मुताबिक, शुरुआती लगभग 40 मिनट में मैच की दिशा बदल गई। उन्होंने यह भी कहा कि नॉकआउट मुकाबले में एक खराब दिन टूर्नामेंट से बाहर कर सकता है। हालांकि, उन्होंने पूरे प्रतियोगिता में टीम के अच्छे प्रदर्शन, रोहित शर्मा की बल्लेबाजी, जसप्रीत बुमराह की गेंदबाजी और जडेजा के योगदान को सकारात्मक पहलू बताया। ICC
धोनी ने 15 अगस्त 2020 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने 2004 में भारत के लिए वनडे पदार्पण किया था। उनकी कप्तानी में भारत ने 2007 का टी20 विश्व कप, 2011 का वनडे विश्व कप और 2013 की चैंपियंस ट्रॉफी जीती। उनके नेतृत्व में भारतीय टीम 2009 में टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर भी पहुंची थी। इतने लंबे और सफल करियर के बाद 2019 का सेमीफाइनल उनकी आखिरी अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति बना। इसलिए उस मुकाबले को लेकर उनके बाद के बयान में एक हार की निराशा और भारत के लिए खेलने के सफर की विदाई, दोनों भाव दिखाई देते हैं।