अहमदाबाद की आइपीएल टीम को जल्द ही हरी झंडी मिल जाएगी और सीवीसी कैपिटल्स ही इंडियन प्रीमियर लीग की 10वीं टीम की मालिक होगी। आइपीएल से अगले साल जुड़ने जा रही अहमदाबाद टीम को खरीदने वाली कंपनी सीवीसी कैपिटल पर सट्टेबाजी कंपनियों से जुड़े होने के आरोपों की जांच के लिए बीसीसीआइ ने इसी महीने अपनी एजीएम में पूर्व न्यायधीश की अगुआई में समिति का गठन किया था। इस टीम को सीवीसी कैपिटल ने 5,625 करोड़ रुपये में खरीदा था। उसपर कई विदेशी सट्टेबाज कंपनियों के साथ संबंध के आरोप लगे थे। समिति ने अपनी रिपोर्ट बीसीसीआइ को सौंप दी है।

पिछले सत्र तक आइपीएल में आठ टीमें खेलती थीं लेकिन इस साल संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में निविदा प्रक्रिया के जरिये दो नई टीमों अहमदाबाद और लखनऊ को आइपीएल में शामिल किया गया है। लखनऊ की टीम को आरपीजीसी ग्रुप ने 7090 करोड़ रुपये में खरीदा था। इसके अलावा आइपीएल जीसी में भी इस मामले को लेकर चर्चा हुई थी। बीसीसीआइ सूत्र ने कहा कि समिति ने अपनी रिपोर्ट बोर्ड को दे दी है। रिपोर्ट के अनुसार अहमदाबाद की टीम सीवीसी की ही बनी रहेगी। जल्द ही उन्हें लेटर आफ इंटेंट जारी कर दिया जाएगा। अगर यह फैसला सीवीसी के खिलाफ जाता तो अहमदाबाद की टीम अदाणी इंडस्ट्री को मिल जाती क्योंकि उन्होंने सीवीसी के बाद दूसरी सबसे बड़ी निविदा जमा की थी।
फरवरी में खिलाड़ियों की नीलामी
आइपीएल के खिलाड़ियों की मेगा नीलामी का आयोजन सात और आठ फरवरी को बेंगलुरु में होगा। यह आइपीएल की आखिरी मेगा नीलामी हो सकती है क्योंकि अधिकांश मूल आइपीएल टीमें अब इसे बंद करना चाहती हैं। बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण स्थिति खराब नहीं होने की दशा में आइपीएल की मेगा नीलामी भारत में होगी। दो दिवसीय नीलामी सात और आठ फरवरी को बेंगलुरु में होगी। इसकी तैयारियां चल रही हैं। दो नई टीमें नीलामी से पहले ड्राफ्ट में से तीन खिलाडि़यों को चुनकर बीसीसीआइ को बताएंगी। बाकी खिलाड़ी नीलामी में जाएंगे।

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