म्यूनिख। जर्मनी के मशहूर फुटबॉल क्लब बायर्न म्यूनिख ने दीपावली के अवसर पर भारतीय प्रशंसकों को खास तोहफा दिया है। क्लब ने भारतीय कलाकार अभय सहगल के साथ मिलकर एक विशेष दिवाली जर्सी तैयार की है। इस जर्सी में भारतीय पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और फुटबॉल के प्रति जुनून को एक साथ पेश किया गया है। खास बात यह है कि इस डिजाइन में दीपावली की रोशनी, उम्मीद और नई शुरुआत के संदेश को शामिल किया गया है। क्लब के स्टार खिलाड़ी हैरी केन, सर्ज ग्नाब्री और लुइस डियाज सहित अन्य खिलाड़ियों के सामने भी इस विशेष जर्सी का अनावरण किया गया।बायर्न म्यूनिख ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से इस विशेष जर्सी को प्रशंसकों के सामने पेश किया और सभी को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। क्लब ने अपने संदेश में कहा कि इस दिवाली पर परंपरा और फुटबॉल का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। क्लब ने प्रशंसकों के जीवन में खुशहाली, समृद्धि और प्रकाश की कामना भी की।
भारतीय कलाकार अभय सहगल ने तैयार किया खास डिजाइन
इस विशेष दिवाली जर्सी को भारतीय कलाकार अभय सहगल ने डिजाइन किया है। बायर्न म्यूनिख ने अपने तीसरे किट (थर्ड किट) के आधार पर इस विशेष संस्करण को तैयार कराया है। इसे पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प तकनीकों की मदद से एक अनूठी कलाकृति का रूप दिया गया है।अभय सहगल ने जर्सी तैयार करने के लिए भारतीय कला और शिल्प की विरासत से प्रेरणा ली। इसमें पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग और हाथ की कढ़ाई जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। रंगों का चुनाव भी दीपावली के उत्साह, गर्मजोशी और रोशनी के प्रतीक को ध्यान में रखकर किया गया है।क्लब के अनुसार, यह केवल फुटबॉल की जर्सी नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला और युवा खिलाड़ियों के सपनों को जोड़ने वाली एक विशेष रचना है। इसका मुख्य विचार यह है कि हर बच्चे को अपनी पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना फुटबॉल में अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए।
बचपन की यादों और फुटबॉल के जुनून से प्रेरित है डिजाइन
अभय सहगल ने इस डिजाइन को अपने बचपन की यादों और फुटबॉल के प्रति अपने प्रेम से जोड़कर तैयार किया है। उन्हें इस प्रोजेक्ट में रचनात्मक स्वतंत्रता दी गई थी, जिसका इस्तेमाल उन्होंने अपनी व्यक्तिगत कहानी को जर्सी के माध्यम से प्रस्तुत करने में किया।जर्सी पर एक क्लॉक टावर का चित्र बनाया गया है, जो कलाकार के बोर्डिंग स्कूल के दिनों की याद दिलाता है। इसके अलावा बादल पर बैठे एक बच्चे और उसके साथ दिखाई गई टूटते तारे की आकृति को भी डिजाइन में शामिल किया गया है।जर्सी पर दो सजे हुए हाथियों के बीच सुनहरे चंद्रमा की आकृति भी दिखाई देती है। कलाकार ने चंद्रमा को फुटबॉल के प्रति अपने जुनून और उसके जीवन में महत्व का प्रतीक बताया है।इस तरह जर्सी के अलग-अलग हिस्सों में कलाकार के बचपन, भारतीय सांस्कृतिक विरासत और भविष्य के युवा फुटबॉल खिलाड़ियों के सपनों की कहानी दिखाई देती है।
हैरी केन और अन्य खिलाड़ियों ने की सराहना
बायर्न म्यूनिख के प्रमुख खिलाड़ियों के सामने इस विशेष जर्सी का अनावरण किया गया। इसमें हैरी केन, सर्ज ग्नाब्री और लुइस डियाज सहित पहली टीम के कई खिलाड़ी मौजूद रहे।खिलाड़ियों ने जर्सी पर बने भारतीय पारंपरिक डिजाइन और उसके पीछे जुड़ी कहानियों में दिलचस्पी दिखाई। क्लब के अनुसार, खिलाड़ियों को इसकी कलात्मक शैली और इसमें दर्शाए गए प्रतीकों ने काफी आकर्षित किया।इंग्लैंड के स्टार स्ट्राइकर हैरी केन ने भी कलाकार अभय सहगल के काम की सराहना की। उन्होंने भारतीय प्रशंसकों को नमस्ते कहते हुए दीपावली की शुभकामनाएं दीं और इस विशेष डिजाइन के लिए अभय का धन्यवाद किया।केन ने कहा कि भारत से म्यूनिख तक पहुंची इस खास कलाकृति को साझा करना उनके लिए खुशी की बात है।
बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं होगी यह जर्सी
इस दिवाली जर्सी की एक खास बात यह भी है कि इसे बाजार में बेचने के लिए तैयार नहीं किया गया है। यह बायर्न म्यूनिख की थर्ड किट का एक विशेष और एकमात्र संस्करण है।क्लब ने स्पष्ट किया है कि यह जर्सी व्यावसायिक बिक्री के लिए नहीं है। इसे एक विशेष कलाकृति के रूप में तैयार किया गया है, जो फुटबॉल और भारतीय संस्कृति के बीच संबंध को प्रदर्शित करती है।इस कारण यह सामान्य प्रशंसकों के लिए उपलब्ध नियमित टीम किट से अलग है। इसका उद्देश्य दीपावली के अवसर पर भारतीय कला और परंपरा को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मंच पर सम्मान देना है।
भारत के फुटबॉल प्रशंसकों से जुड़ने की कोशिश
बायर्न म्यूनिख दुनिया के प्रमुख फुटबॉल क्लबों में शामिल है और भारत में भी इसके बड़ी संख्या में प्रशंसक हैं। क्लब ने इस विशेष पहल के माध्यम से भारतीय समर्थकों के साथ अपने सांस्कृतिक जुड़ाव को और मजबूत करने का प्रयास किया है।भारतीय पारंपरिक शिल्प और यूरोपीय फुटबॉल को एक साथ प्रस्तुत करके बायर्न ने यह दिखाने की कोशिश की है कि खेल भाषा और भौगोलिक सीमाओं से आगे बढ़कर लोगों को जोड़ सकता है।अभय सहगल के लिए भी यह सहयोग उनके कला और फुटबॉल के प्रति जुनून को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला अवसर है। उनकी बनाई जर्सी में भारतीय विरासत के साथ युवा खिलाड़ियों की महत्वाकांक्षाओं को जगह मिली है।
दिवाली पर कला और खेल का अनूठा संगम
बायर्न म्यूनिख की यह विशेष दिवाली जर्सी खेल और संस्कृति के बीच एक रचनात्मक सेतु के रूप में सामने आई है। इसमें भारतीय पारंपरिक हस्तकला, कलाकार के निजी अनुभव और फुटबॉल के प्रति जुनून को एक साथ जोड़ा गया है।दीपावली की रोशनी, उम्मीद और नई शुरुआत का संदेश इस डिजाइन का आधार है। क्लब की इस पहल ने भारतीय कलाकार अभय सहगल की रचनात्मकता को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत के सामने प्रस्तुत किया है।
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