भारतीय महिला टीम के लिए अमोल मजूमदार का बड़ा लक्ष्य बताया जीत का फॉर्मूला
मुंबई: भारतीय महिला क्रिकेट टीम के मुख्य कोच अमोल मजूमदार ने अगले दो वर्षों में टीम के विश्व क्रिकेट की प्रमुख ताकत बनने की उम्मीद जताई है। उनका मानना है कि आयु वर्ग क्रिकेट से सामने आ रही युवा प्रतिभाएं भारत को सफेद गेंद के प्रारूपों में लगातार बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर सकती हैं। शनिवार, 31 अक्टूबर को स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ मुंबई के एक कार्यक्रम में मजूमदार ने कहा कि टीम के भीतर विपक्ष पर दबदबा बनाने और मैदान पर निर्णायक खेल दिखाने की मानसिकता पर लगातार चर्चा होती है।
मुख्य कोच से पूछा गया था कि वह दो साल बाद भारतीय महिला टीम को किस स्थिति में देखना चाहते हैं। जवाब में उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षा स्पष्ट की कि टीम विश्व क्रिकेट में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करे। उन्होंने इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय एक लक्ष्य के रूप में सामने रखा। मजूमदार के अनुसार, मुंबई क्रिकेट में अपने शुरुआती वर्षों के दौरान उन्होंने जिस प्रतिस्पर्धी सोच को अपनाया, उसे भारतीय महिला टीम की तैयारी और खेल में उतारने का प्रयास कर रहे हैं। टीम का भविष्य देखते समय उनका ध्यान प्रतिभा के साथ उसे सही दिशा में विकसित करने पर भी है।
मजूमदार के विश्वास का बड़ा आधार बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में तैयार हो रही खिलाड़ियों की नई पीढ़ी है। उन्होंने अंडर-15, अंडर-19 और इंडिया-ए शिविरों का उल्लेख करते हुए वहां किए जा रहे काम की प्रशंसा की। उनके मुताबिक, इन शिविरों में ऐसी प्रतिभाएं दिखाई दे रही हैं, जो आधुनिक क्रिकेट की जरूरतों को पहले से समझती हैं। उन्होंने संकेत दिया कि नई खिलाड़ियों को उच्च स्तर की मांगों के अनुरूप ढलने में अपेक्षाकृत कम समय लग सकता है। खासतौर पर छोटे प्रारूप में यह तैयारी भारत को आगे ले जाने में मददगार हो सकती है।
युवा खिलाड़ियों की फिटनेस और पेशेवर रवैये ने भी मुख्य कोच को प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि कम उम्र की खिलाड़ी पोषण, शारीरिक तैयारी और अच्छी फील्डिंग का महत्व समझ रही हैं। उनके अनुसार, अंडर-15 स्तर पर भी खिलाड़ियों में अपने खेल को लेकर गंभीरता दिखाई देती है। यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि आधुनिक क्रिकेट में बल्लेबाजी और गेंदबाजी के साथ मैदान पर तेजी तथा एथलेटिक क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है। मजूमदार को भरोसा है कि आने वाले समय में यही युवा पीढ़ी राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी संभालने के लिए बेहतर तरीके से तैयार मिलेगी।
अपनी कोचिंग के बारे में मजूमदार ने तीन बातों पर विशेष जोर दिया—जीतने की मानसिकता, अनुशासन और अभ्यास में पूरी तीव्रता। उन्होंने कहा कि टीम मैदान पर जीतने के उद्देश्य से उतरती है। इसके साथ ड्रेसिंग रूम में कुछ क्रिकेट संबंधी मूल्यों और नियमों का पालन भी जरूरी है। उनकी कोशिश रहती है कि प्रशिक्षण के दौरान खिलाड़ियों की गंभीरता और मेहनत का स्तर ऊंचा रहे। अभ्यास में अपनाई गई आदतें मैच की परिस्थितियों में भी दिखाई दें, यही उनकी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मजूमदार ने इस सोच को अपने क्रिकेट के शुरुआती अनुभवों और दिग्गज प्रशिक्षक रमाकांत आचरेकर से मिली सीख से जोड़ा। आचरेकर ने सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली जैसे खिलाड़ियों को शुरुआती दिनों में प्रशिक्षित किया था। मजूमदार के मुताबिक, प्रतिस्पर्धा के लिए तैयारी केवल तकनीक सुधारने तक सीमित नहीं है। अनुशासन और अभ्यास का रवैया भी उतना ही जरूरी है। उनके बयान से स्पष्ट है कि वह खिलाड़ियों से मैच के दिन बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा करने के साथ रोजमर्रा की तैयारी में भी उसी स्तर की प्रतिबद्धता चाहते हैं।
टीम की सफलता में आपसी एकजुटता को भी उन्होंने बड़ी वजह बताया। पिछले साल की पहली महिला वनडे विश्व कप जीत का जिक्र करते हुए मजूमदार ने ड्रेसिंग रूम के सकारात्मक माहौल की अहमियत समझाई। उनके अनुसार, खिलाड़ियों के बीच एकता से वातावरण सहज और ऊर्जावान बना रहा। वह ऐसा माहौल तैयार करने को महत्व देते हैं, जिसमें टीम के भीतर उत्साह बना रहे। मजूमदार ने अपने खेल के दिनों का अनुभव साझा करते हुए कहा कि जिन टीमों में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन देखा, वहां ड्रेसिंग रूम का वातावरण भी विशेष रूप से अच्छा था।
भारतीय महिला टीम को लेकर मजूमदार की योजना में युवा प्रतिभाओं का विकास और मजबूत टीम संस्कृति साथ-साथ चलते हैं। उनके बताए फॉर्मूले में खिलाड़ी की व्यक्तिगत क्षमता के साथ सामूहिक तैयारी को जगह मिलती है। विश्व क्रिकेट में लगातार दबदबा बनाना उनका लक्ष्य है और इसके लिए वह नई पीढ़ी की समझ, फिटनेस तथा पेशेवर रवैये को उत्साहजनक संकेत मानते हैं। अब इस सोच की कसौटी मैदान पर निरंतर प्रदर्शन होगा। फिलहाल मुख्य कोच ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय महिला क्रिकेट के भविष्य को लेकर उनकी अपेक्षाएं बड़ी हैं।