शॉटपुट इवेंट में 40 साल के Hokato सेमा ने जीता ब्रॉन्ज

Update: 2024-09-07 07:54 GMT

Spotrs.खेल: पैरालंपिक में भारत के खाते में मेडल आने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार देर रात भारतीय एथलेटी होकाटो सेमा ने देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता। यह भारत का पेरिस पैरालंपिक में 27वां मेडल है। होकाटो ने शॉटपुट के F57 इवेंट में 14.65 मीटर थ्रो के साथ इवेंट में तीसरा स्थान हासिल किया। 40 साल के सेमा का यह पहला पैरालंपिक है। वह भारतीय दल में नगालैंड के इकलौते एथलीट थे।

इरान के खिलाड़ी यासिन ने जीता गोल्ड
इस इवेंट का गोल्ड मेडल इरान के यासिन कोसावनी को मिला जिन्होंने 15.96 का पैरालंपिक रिकॉर्ड कायम किया। वहीं थिएगो पॉलिनो ने 15.06 मीटर के थ्रो के साथ सि्वर अपने नाम किया। F57 इवेंट में खिलाड़ी बैठकर थ्रो करते हैं। उनकी चेयर को हारनेस से बांधा जाता है। यही कारण है कि इस इवेंट में हर खिलाड़ी एक ही बार में सारे थ्रो करता है।
होकाटो ने खोया पैर
होकाटो होतोजे सेमा के पिता एक किसान हैं। जिनको कुल 4 बच्चे हुए। इनमे होकाटो उनकी दूसरी संतान हैं। सेमा हमेशा से सेना से जुडना चाहते थे। महज 17 साल की उम्र में उनका यह सपना पूरा हो गया। हालांकि वह ज्यादा समय तक इस सपने को जीए नहीं पाए। साल 2002 में होकाटो सेमा ने जम्मू कश्मीर के चौकीबल में आंतकवाद विरोधी अभियान में भाग लिया। इस दौरान बारूदी सुरंग में विस्फोट हो गया। सेमा को इस लैंडमाइन विस्फोट में अपना बायां पैर खोना पड़ा।
2016 से शुरू किया खेल
साल 2016 में उन्होंने इस खेल को अपनाया। महज 8 साल के अंदर वह पैरालंपिक मेडलिस्ट बन गए। पुणे के आर्टिफिशियल लिम्ब सेंटर के एक वरिष्ठ सेना अधिकारी ने सेमा की फिटनेस देखते हुए उन्हें शॉटपुट में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
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