परिवर्तिनी एकादशी क्यों मानी जाती है खास, जानें इसका धार्मिक रहस्य
परिवर्तिनी एकादशी
धर्म डेस्क: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए विशेष मानी जाती है। सालभर में आने वाली एकादशियों में परिवर्तिनी एकादशी का अपना अलग धार्मिक महत्व है। इसे पार्श्व एकादशी और वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान योगनिद्रा में रहने वाले भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं। इसी कारण इसका नाम परिवर्तिनी एकादशी पड़ा।
परिवर्तिनी एकादशी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह व्रत 22 सितंबर को रखा जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ उनके वामन अवतार की पूजा करने की परंपरा है।
भगवान विष्णु के करवट बदलने का रहस्य
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद चातुर्मास शुरू होता है। माना जाता है कि भाद्रपद शुक्ल एकादशी यानी परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु योगनिद्रा में ही अपना पार्श्व बदलते हैं।
भगवान के इसी पार्श्व परिवर्तन को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि यह बदलाव प्रकृति और जीवन में परिवर्तन का भी प्रतीक है। इसी कारण श्रद्धालु इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा करते हैं और उपवास रखते हैं।
वामन अवतार से भी है खास संबंध
परिवर्तिनी एकादशी का संबंध भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि की पौराणिक कथा से भी जोड़ा जाता है। कथा के अनुसार राजा बलि ने अपने पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार स्थापित कर लिया था। भगवान विष्णु ने वामन रूप धारण कर राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी।
राजा बलि के वचन देने के बाद वामन देव ने विराट रूप धारण किया। उन्होंने एक पग में पृथ्वी और दूसरे में स्वर्ग को नाप लिया। तीसरे पग के लिए स्थान नहीं बचा तो राजा बलि ने अपना सिर भगवान के सामने रख दिया। राजा बलि की भक्ति और वचनबद्धता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें विशेष आशीर्वाद दिया।
परिवर्तिनी एकादशी पर क्या करें?
इस दिन श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। भगवान को पीले फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है। व्रती अपनी श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार उपवास रखते हैं और विष्णु मंत्रों का जाप तथा धार्मिक कथा का पाठ करते हैं।
धार्मिक परंपरा में एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा कर प्रसाद ग्रहण किया जाता है। पारण का समय स्थान के अनुसार अलग हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहता है।
परिवर्तिनी एकादशी की विशेषता भगवान विष्णु के पार्श्व परिवर्तन और वामन अवतार से जुड़ी मान्यताओं में है। यही कारण है कि इसे चातुर्मास की महत्वपूर्ण एकादशियों में गिना जाता है।