सनातन धर्म में वैसे तो व्रत त्योहारों की कमी नहीं है लेकिन प्रदोष व्रत बेहद ही खास माना जाता है जो कि हर माह में दो बार पड़ता है अभी भाद्रपद मास चल रहा है और इस माह का पहला प्रदोष व्रत शिव पूजा के लिए उत्तम माना जा रहा है इस दिन भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए उनकी विधि विधान से पूजा करते हैं और दिनभर का उपवास आदि भी रखते हैं।
पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत हर माह के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। इस दिन शिव पार्वती की पूजा उत्तम फल प्रदान करती है और जीवन की कई बाधाओं का भी नाश करती है। भाद्रपद मास का पहला प्रदोष व्रत 12 सितंबर दिन मंगलवार को किया जाएगा।
मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के कारण ही इसे भौम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जा रहा है इस दिन शुभ मुहूर्त में शिव पार्वती की आराधना दुख परेशानियों का नाश करती है तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा भौम प्रदोष व्रत पर पूजा का उत्तम मुहूर्त बता रहे हैं।
भौम प्रदोष व्रत पर पूजा का उत्तम समय—
धार्मिक पंचांग के अनुसार इस माह का पहला प्रदोष व्रत 12 सितंबर को किया जाए तो जिसे भौम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जा रहा है इस महीने के प्रदोष व्रत की त्रयोदशी तिथि 11 सितंबर को रात्रि 11 बजकर 52 मिनट से आरंभ हो रही है और 13 सितंबर को रात्रि 2 बजकर 21 मिनट पर इसका समापन हो जाएगा। ऐसे में प्रदोष व्रत और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम को 6 बजकर 30 मिनट से 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। मान्यता है कि इस मुहूर्त में पूजा पाठ करने से व्रती को सुख समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती हैं।