विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026: 3 जून को होगी पूजा, जानें किन गलतियों से बचना जरूरी
Religion Desk धर्म डेस्क : हिंदू पंचांग के अनुसार, अधिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विभुवन संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष वैदिक पंचांग के अनुसार यह पावन तिथि 3 जून को पड़ रही है। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी के दिन गणपति बप्पा की विधिवत पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और भगवान गणेश की आराधना करते हैं। पूजा के दौरान गणपति को दूर्वा, मोदक और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। साथ ही अन्न, धन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि दान-पुण्य से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर-परिवार में शांति बनी रहती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की साधना करने से सभी कार्यों में आ रही बाधाएं समाप्त होती हैं। ऐसा माना जाता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमों के साथ इस व्रत को करते हैं, उन्हें गणपति बप्पा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
हालांकि शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि इस दिन कुछ गलतियों से बचना बेहद जरूरी है। यदि व्रत और पूजा के नियमों का पालन सही ढंग से नहीं किया जाए तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता और भगवान गणेश नाराज भी हो सकते हैं। इसलिए भक्तों को इस दिन विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी के दिन क्रोध, झूठ बोलना और किसी का अपमान करने जैसी गलतियों से बचना चाहिए। इस दिन मन को शांत और संयमित रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है। इसके अलावा पूजा के दौरान विधि-विधान का पालन करना और शुद्धता का ध्यान रखना भी जरूरी बताया गया है।
इसके साथ ही इस दिन अनावश्यक विवादों से दूर रहने और नकारात्मक विचारों से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि नकारात्मकता पूजा के प्रभाव को कम कर सकती है। व्रत रखने वाले भक्तों को सात्विक भोजन करना चाहिए और तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए।
शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि पूजा के समय ध्यान भटकाना या जल्दबाजी करना भी अशुभ माना जाता है। इसलिए भक्तों को पूरी श्रद्धा और ध्यान के साथ भगवान गणेश की आराधना करनी चाहिए।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी को विशेष फलदायी व्रतों में से एक माना जाता है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने जीवन में सफलता, समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति की कामना करते हैं। श्रद्धा और नियमों के साथ की गई पूजा से जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है।
इस प्रकार, 3 जून को मनाई जाने वाली यह चतुर्थी भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है और सही विधि से की गई पूजा जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाने का माध्यम बनती है।