महालक्ष्मी व्रत का अंतिम दिन आज, इस विधि से करें पूजा और विसर्जन
महालक्ष्मी व्रत उद्यापन
Mahalaxmi Vrat 2026: धन, सुख-समृद्धि और सौभाग्य की कामना के लिए किया जाने वाला महालक्ष्मी व्रत आज अपने अंतिम चरण में है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार लगातार 16 दिनों तक चलने वाले इस व्रत का उद्यापन विधि-विधान के साथ किया जाता है। अंतिम दिन माता महालक्ष्मी की विशेष पूजा के बाद व्रत का संकल्प पूर्ण किया जाता है और पूजा में स्थापित कलश का विसर्जन किया जाता है।
महालक्ष्मी व्रत में माता लक्ष्मी की आराधना का विशेष महत्व माना गया है। व्रत करने वाले श्रद्धालु इन दिनों नियम और संयम का पालन करते हुए मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। उद्यापन के दिन सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल को साफ किया जाता है। इसके बाद माता महालक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा शुरू की जाती है।
पूजा में फूल, अक्षत, रोली, कुमकुम, फल और मिठाई सहित अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जा सकती है। माता लक्ष्मी को कमल का फूल विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। उपलब्ध होने पर पूजा में कमल का फूल चढ़ाया जा सकता है। इसके बाद महालक्ष्मी व्रत कथा का पाठ या श्रवण कर आरती की जाती है।
उद्यापन के दौरान व्रत के संकल्प को पूर्ण करने की प्रार्थना की जाती है। श्रद्धालु माता महालक्ष्मी से परिवार में सुख-शांति, आर्थिक समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में बांटा जाता है।
महालक्ष्मी व्रत के दौरान स्थापित कलश का भी विशेष महत्व होता है। उद्यापन के बाद कलश को तुरंत हटाने के बजाय पूजा और आरती पूरी की जाती है। इसके बाद शुभ समय में कलश को पूजा स्थान से उठाया जाता है। कलश में रखे जल को किसी पवित्र स्थान, पौधे या स्वच्छ जगह पर अर्पित करने की परंपरा है। पूजा में इस्तेमाल होने वाले फूल और अन्य जैविक सामग्री को भी सम्मानपूर्वक विसर्जित किया जाना चाहिए।
कलश विसर्जन करते समय माता लक्ष्मी से पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा मांगते हुए दोबारा घर आने की प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा का समापन भी उतनी ही श्रद्धा और विधि से करना चाहिए, जितनी श्रद्धा के साथ पूजा शुरू की गई थी।
कलश विसर्जन के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ चौघड़िया या लाभ-अमृत काल का चयन किया जा सकता है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और पंचांग की गणना के कारण शुभ समय में अंतर हो सकता है। इसलिए विसर्जन से पहले अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना बेहतर माना जाता है।
महालक्ष्मी व्रत का उद्यापन केवल पूजा समाप्त करने की प्रक्रिया नहीं माना जाता, बल्कि पूरे व्रत के दौरान लिए गए संकल्प को विधिवत पूर्ण करने का अवसर भी होता है। श्रद्धालु इस दिन दान-पुण्य भी कर सकते हैं। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार अन्य सामग्री देना शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महालक्ष्मी व्रत श्रद्धा और नियम के साथ करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। हालांकि पूजा-पद्धति और उद्यापन की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में भिन्न हो सकती है। ऐसे में अपने परिवार में चली आ रही परंपरा के अनुसार भी उद्यापन किया जा सकता है।