दुनिया का अकेला मंदिर जहां गिलहरी रूप में होती है Hanuman जी की पूजा, जाने पौराणिक कहानी

Update: 2025-04-08 08:19 GMT
Hanuman Katha ज्योतिष न्यूज़ : भगवान राम के हनुमान जी के भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में कई मंदिर हैं और उन मंदिरों की अपनी-अपनी मान्यताएं हैं। इन सभी मंदिरों में हनुमान जी की अलग-अलग तरह से पूजा की जाती है। इन्हीं में से एक अलीगढ़ का एकमात्र ऐसा मंदिर है जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और ऐसा इसलिए है क्योंकि सिर्फ इसी मंदिर में हनुमान जी की गिलहरी के रूप में पूजा की जाती है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां लगातार 41 दिनों तक पूजा करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। आइए अलीगढ़ में स्थित इस विश्व प्रसिद्ध और अनोखे बजरंग बली के धाम के बारे में विस्तार से जानते हैं।
गिलहरी के रूप में पूजे जाते हैं हनुमान जी
अचल ताल सरोवर के तट पर स्थित हनुमान जी का श्री गिलहराज मंदिर पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां आसपास 50 से ज्यादा मंदिर हैं लेकिन गिलहराज जी मंदिर की मान्यताएं सबसे अलग और ज्यादा हैं। इस मंदिर की पहचान एक धार्मिक स्थल के तौर पर ही है। माना जाता है कि यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां हनुमान जी की गिलहरी के रूप में पूजा की जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जब भगवान राम राम सेतु पुल का निर्माण कर रहे थे, इस दौरान भगवान श्री राम ने हनुमान जी से कुछ देर आराम करने को कहा लेकिन हनुमान जी ने आराम नहीं किया। उन्होंने गिलहरी का रूप धारण कर लिया और पुल निर्माण में राम सेना की मदद की। भगवान राम ने गिलहरी के रूप में हनुमान जी को देखा और उनके ऊपर हाथ फिराया, जिसके बाद गिलहरी की पीठ पर भगवान के हाथ की वही रेखा बन गई जो आज भी देखी जा सकती है।
सपने में आए थे हनुमान जी
गिलहराज मंदिर के महंत कैलाश नाथ ने बताया कि श्री गिलहराज जी महाराज के इस प्रतीक चिह्न की खोज सबसे पहले धनुर्धर 'श्री महेंद्रनाथ योगी जी महाराज' ने की थी जो एक सिद्ध संत थे। कहा जाता है कि श्री महेंद्रनाथ योगी जी महाराज को सपने में हनुमान जी मिले और कहा कि मैं अचल ताल पर हूं, वहीं मेरी पूजा करो। जब उन्होंने वहां जाकर खोज की तो उन्हें मिट्टी के ढेर पर कई गिलहरियां मिलीं। जब उन्हें हटाया गया और खुदाई की गई तो वहां से एक मूर्ति मिली। यह मूर्ति गिलहरी के रूप में हनुमान जी की थी। तभी से इस मूर्ति को मंदिर में स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू हो गई।
कहा जाता है बहुत प्राचीन
यह मंदिर बहुत प्राचीन बताया जाता है। महाभारत काल में भगवान श्री कृष्ण के भाई दाऊजी महाराज ने अचल ताल में पहली बार गिलहरी के रूप में हनुमान की पूजा की थी। पूरी दुनिया में अचल ताल के मंदिर में यह एकमात्र प्रतीक चिन्ह है, जिसमें भगवान हनुमान की आंख दिखाई देती है।
पूजा करने से दूर होते हैं सारे कष्ट
मान्यता है कि इस मंदिर में लगातार 41 दिनों तक पूजा करने से सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। यहां दर्शन करने मात्र से ही शनि और अन्य ग्रहों के प्रकोप से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता के अनुसार हनुमान जी के अन्य मंदिरों में एक दिन में एक से अधिक चोला नहीं चढ़ाया जाता, लेकिन यहां प्रतिदिन बजरंगबली को 50-60 चोले वस्त्र चढ़ाए जाते हैं।
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