Navratri Traditions : शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। वर्ष 2026 में इसकी शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर से होगी। पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 10 अक्टूबर की रात शुरू होगी और उदया तिथि के आधार पर 11 अक्टूबर को घटस्थापना के साथ नवरात्रि का आरंभ माना जाएगा। इस बार 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी से जुड़े अनुष्ठान होंगे, जबकि विजयदशमी यानी दशहरा 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
नवरात्रि का पर्व पूरे देश में मां दुर्गा और शक्ति की आराधना के रूप में मनाया जाता है, लेकिन भारत की सांस्कृतिक विविधता के कारण इसकी परंपराएं हर राज्य में अलग दिखाई देती हैं। कहीं गरबा और डांडिया की धूम होती है, कहीं विशाल दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं तो कहीं रामलीला और रावण दहन इस त्योहार की पहचान बन जाते हैं। यही वजह है कि एक ही पर्व देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग रंग, अलग रस्म और अलग अंदाज के साथ मनाया जाता है।
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की भव्यता
पश्चिम बंगाल में नवरात्रि का सबसे प्रमुख रूप दुर्गा पूजा के रूप में दिखाई देता है। यहां विशेष रूप से षष्ठी से दशमी तक पूजा का उत्साह चरम पर रहता है। शहरों और गांवों में विशाल पंडाल सजाए जाते हैं और मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित होती हैं।
कोलकाता की दुर्गा पूजा देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां अलग-अलग थीम पर तैयार पंडाल लोगों के आकर्षण का केंद्र होते हैं। दशमी के दिन विवाहित महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करती हैं और इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर शुभकामनाएं देती हैं। इस परंपरा को ‘सिंदूर खेला’ कहा जाता है। इसके बाद दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
गुजरात में गरबा और डांडिया की धूम
गुजरात में नवरात्रि का मतलब भक्ति के साथ गरबा और डांडिया की रौनक भी है। नवरात्रि की नौ रातों में बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक कपड़े पहनकर गरबा करते हैं। कई जगहों पर बीच में दीप या माता की प्रतिमा रखकर उसके चारों तरफ गरबा किया जाता है।
डांडिया रास भी गुजरात की नवरात्रि की खास पहचान है। बड़े मैदानों से लेकर सोसायटी और मोहल्लों तक रात में गरबा कार्यक्रम आयोजित होते हैं। धार्मिक आस्था के साथ यह पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले लेता है।
उत्तर भारत में रामलीला और दशहरा
उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और आसपास के कई हिस्सों में नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा के साथ रामलीला की भी खास परंपरा है। अलग-अलग स्थानों पर भगवान राम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया जाता है।
विजयदशमी के दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। कई श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन करते हैं।
जम्मू-कश्मीर में माता वैष्णो देवी का विशेष महत्व
जम्मू-कश्मीर में नवरात्रि के दौरान माता वैष्णो देवी के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। कटरा और माता के भवन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। नवरात्रि के दौरान यहां धार्मिक माहौल और भी अधिक भक्तिमय हो जाता है।
घरों में भी माता की पूजा, ज्योति और व्रत की परंपरा निभाई जाती है। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिन उपवास करते हैं और नवमी पर कन्याओं को भोजन कराते हैं।
हिमाचल में देवी मंदिरों में उमड़ते हैं श्रद्धालु
हिमाचल प्रदेश में नवरात्रि के अवसर पर ज्वाला जी, चिंतपूर्णी, नैना देवी, ब्रजेश्वरी देवी और चामुंडा देवी जैसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
यहां नवरात्रि के दौरान मेले और धार्मिक आयोजन भी होते हैं। कई परिवार घरों में कलश स्थापना करते हैं और नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं।
महाराष्ट्र में घटस्थापना और देवी पूजा
महाराष्ट्र में नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। घरों और मंदिरों में कलश स्थापित कर देवी की पूजा की जाती है। कई जगहों पर नौ दिनों तक अलग-अलग रंग के कपड़े पहनने की परंपरा भी लोकप्रिय है।
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में गरबा और डांडिया का प्रभाव भी दिखाई देता है। विजयदशमी पर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और कई स्थानों पर शमी के पत्तों के आदान-प्रदान की परंपरा निभाई जाती है।
दक्षिण भारत में ‘गोलू’ की अनोखी परंपरा
तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में नवरात्रि के दौरान ‘गोलू’ या ‘बोम्मई गोलू’ सजाने की परंपरा है। इसमें सीढ़ीनुमा मंच पर देवी-देवताओं, पौराणिक पात्रों और सामाजिक जीवन को दर्शाती छोटी-छोटी मूर्तियां सजाई जाती हैं।
लोग एक-दूसरे के घर गोलू देखने जाते हैं। भजन, पूजा और प्रसाद का आयोजन होता है। बच्चों और महिलाओं के लिए भी यह पर्व खास सांस्कृतिक महत्व रखता है।
कर्नाटक में मैसूर दशहरा
कर्नाटक की नवरात्रि खास तौर पर मैसूर दशहरा के लिए प्रसिद्ध है। मैसूर महल रोशनी से जगमगा उठता है और शहर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
दशहरे के दिन निकलने वाली भव्य शोभायात्रा इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण होती है। यह परंपरा लंबे समय से कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बनी हुई है।
छत्तीसगढ़ में देवी मंदिरों और ज्योति कलश की परंपरा
छत्तीसगढ़ में नवरात्रि के दौरान देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। दंतेश्वरी, महामाया और बम्लेश्वरी जैसे प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
कई मंदिरों में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते हैं। श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत, भजन और माता सेवा में शामिल होते हैं। गांवों और शहरों में जगह-जगह देवी प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा भी की जाती है।
कुल मिलाकर शारदीय नवरात्रि पूरे भारत में शक्ति, भक्ति और उत्साह का पर्व है। पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा हो, गुजरात का गरबा, उत्तर भारत की रामलीला, दक्षिण भारत का गोलू या छत्तीसगढ़ के देवी मंदिरों में जलते ज्योति कलश—हर क्षेत्र अपनी परंपरा के अनुसार नवरात्रि को खास बनाता है। यही विविधता इस त्योहार को पूरे देश में एक अलग और खूबसूरत पहचान देती है।
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