Som Pradosh Vrat जानें तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि

Update: 2025-01-19 11:57 GMT
Som Pradosh Vrat ज्योतिष न्यूज़ : वैसे तो रोजाना घरों में भोलेनाथ की पूजा की जाती है, लेकिन प्रदोष तिथि विशेष है। मान्यता है कि इस दिन महादेव की पूजा करने से साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है, साथ ही भाग्य में भी वृद्धि होती हैं। यह व्रत हर माह के कृष्ण और शुक्ल दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है जिसकी पूजा प्रदोष काल में की जाती है।
हिंदू धर्म में भोलेनाथ को शक्ति का प्रतीक माना जाता है, कहा गया है कि यदि सच्चे भाव से प्रदोष तिथि पर महादेव का दूध से अभिषेक किया जाए, तो मन से सभी तरह के डर भय समाप्त होते हैं। वहीं अगर प्रदोष तिथि सोमवार के दिन पड़ती हैं तो इसे शुभ संयोग में गिना जाता है, क्योंकि दोनों ही दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए उत्तम माने जाते हैं। दरअसल, वर्तमान में माघ माह जारी है और इस माह में सोमवार 27 जनवरी को प्रदोष व्रत रखा जाएगा जो बेहद खास है, ऐसे में आइए इस दिन की
पूजा विधि के बारे में जानते हैं।
सोम प्रदोष व्रत 2025 तिथि
पंचागं के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरूआत 26 जनवरी के दिन रात 8 बजकर 54 मिनट पर होगी, इस तिथि का समापन 27 जनवरी को रात 8 बजकर 34 मिनट पर होगा। ऐसे में 27 जनवरी 2025 को प्रदोष व्रत रखा जाएगा, इस दिन सोमवार होने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा जाएगा।
सोम प्रदोष व्रत 2025 मुहूर्त
ज्योतिषियों की मानें तो 27 जनवरी को सोम प्रदोष व्रत के दिन महादेव की पूजा के लिए मुहूर्त शाम 5 बजकर 56 मिनट से रात 8 बजकर 34 मिनट तक रहने वाला है, आप इस अवधि में महादेव की आराधना कर सकते हैं।
सोम प्रदोष व्रत शुभ योग
इस साल माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मूल नक्षत्र बन रहा है, जो रात 09: 02 मिनट तक रहेगा, इस दौरान हर्षण योग भी बनेगा।
सूर्य:मकर
चन्द्र:धनु
राहुकाल: सुबह 08:32से-09:53
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:12 से 12:55
प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत की पूजा करने के लिए सबसे पहले एक चौकी लें और उसपर महादेव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित कर दें।
अब भगवान शिव को गंगाजल चढ़ाएं।
इसके बाद अक्षत, बेलपत्र, चंदन, फूल, फल, भांग, शहद, धूप, दीप आदि अर्पित करें।
इस दौरान पंचाक्षर "ॐ नमः शिवाय" का जाप करते रहें।
अब शिव चालीसा का पाठ करें।
फिर कपूर या घी के दीपक से भगवान शिव की आरती करें।
पूजा के अंत में संतान के लिए प्रार्थना करें और यदि पूजा में कोई गलती हुई है तो उसकी क्षमा मांगें।
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