सूर्य ग्रहण 2026: बनेगा सबसे लंबा ग्रहण, 157 साल बाद का दुर्लभ संयोग
सूर्य ग्रहण पर दुर्लभ संयोग, 157 साल बाद बनने वाले इस नजारे को लेकर उत्सुकता बढ़ी
Solar Eclipse: खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए साल 2027 एक ऐतिहासिक अवसर लेकर आ रहा है. 2 अगस्त 2027 को होने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) 21वीं सदी का सबसे लंबा सूर्य ग्रहण माना जा रहा है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा, जिससे कुछ मिनटों के लिए दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा जाएगा.
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार, इस ग्रहण की कुल अवधि 6 मिनट 23 सेकंड होगी, जो इसे वर्तमान सदी के सबसे लंबे पूर्ण सूर्य ग्रहणों में शामिल करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी लंबी अवधि वाला सूर्य ग्रहण अब वर्ष 2184 से पहले देखने को नहीं मिलेगा.
किन देशों में दिखाई देगा यह दुर्लभ ग्रहण?
यह सूर्य ग्रहण अटलांटिक महासागर के ऊपर शुरू होगा और दक्षिणी यूरोप, उत्तरी अफ्रीका तथा मध्य पूर्व के कई देशों से होकर गुजरेगा. स्पेन, मोरक्को, अल्जीरिया, लीबिया, मिस्र और सऊदी अरब में इसे पूर्ण रूप से देखा जा सकेगा.
विशेष रूप से स्पेन के कुछ क्षेत्रों में ग्रहण का दृश्य बेहद शानदार रहने की संभावना है, जहां लाखों खगोल प्रेमी और वैज्ञानिक इस दुर्लभ घटना का अवलोकन करने पहुंच सकते हैं.
क्या भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
मौजूदा वैज्ञानिक अनुमानों के अनुसार, 2 अगस्त 2027 का यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इसका मुख्य कारण यह है कि ग्रहण का पथ भारतीय उपमहाद्वीप से होकर नहीं गुजर रहा है.
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि एशिया के कुछ हिस्सों में इसकी सीमित या आंशिक झलक मिलने की संभावना हो सकती है, लेकिन भारत में इसके स्पष्ट रूप से दिखाई देने की उम्मीद बेहद कम है.
‘बेलीज बीड्स’ बनेगा आकर्षण का केंद्र
इस ग्रहण की सबसे खास बात ‘बेलीज बीड्स’ (Baily’s Beads) प्रभाव होगा. यह तब दिखाई देता है जब चंद्रमा की सतह पर मौजूद घाटियों और पहाड़ियों के बीच से सूर्य का प्रकाश छनकर पृथ्वी तक पहुंचता है. इससे चमकदार मोतियों जैसी रोशनी दिखाई देती है, जो खगोल विज्ञान की सबसे सुंदर घटनाओं में गिनी जाती है.
वैज्ञानिकों के लिए क्यों खास है यह घटना?
पंडित पुरनेंदु पाठक के अनुसार, इतने लंबे समय तक चलने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण सूर्य के कोरोना, प्रकाशीय प्रभावों और अंतरिक्षीय गतिविधियों के अध्ययन का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है. यही कारण है कि दुनिया भर के वैज्ञानिक और खगोल प्रेमी इस घटना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.