Skandamata Puja Vidhi ज्योतिष न्यूज़ : हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के साथ शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन है। इस दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना किया जएगा। स्कंद माता के बारे में मार्कण्डेय पुराण में बताया गया है। उनके स्वरूप की बात करें, तो माता ने अपनी गोद में स्कंद को धारण किया हुआ था। उन्हें मातृत्व, करुणा और संतान के कल्याण का प्रतीक माना जाता है। सिंहासन में विराजमान और कमल धारण करने वाली यशस्विनी मां स्कंदमाता सदैव कल्याण करती है। आइए जानते हैं मां स्कंदमाता की पूजा विधि, भोग, मंत्र, स्तोत्र आदि…
कैसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप
मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की बात करें, तो उनका स्वरूप काफी मनमोहक है। उनकी चार भुजाएं हैं। जिसमें दो में कमल, एक हाथ अक्षय मुद्रा और एक हाथ से उन्होंने अपने पुत्र स्कंद यानी कार्तिकेय को पकड़ा हुआ है। मां का वाहन सिंह है।
मां स्कंदमाता की पूजा के शुभ मुहूर्त
अमृत काल – रात 08:58 बजे से रात 10:45 बजे तक।
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:51 बजे से सुबह 05:39 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त – सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक।
मां स्कंदमाता पूजा विधि
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान कर लें। इसके बाद अगर कलश स्थापना किया है, तो सबसे पहले उसकी पूजा करें। विधिवत पूजा करने के बाद मां दुर्गा के साथ-साथ माता स्कंदमाता की पूजा करें। उन्हें फूल, माला, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत, वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद भोग में केला, मिठाई खिलाने के साथ बीड़े का भोग अर्पित करें। फिर घी का दीपक और धूप जलाकर मां दुर्गा चालीसा, स्कंदमाता मंत्र के साथ दुर्गा सप्तशती पाठ, स्कंदमाता मंत्र, स्तोत्र करने के बाद अंत में आरती कर लें। इसके साथ ही भूलचूक के लिए क्षमा मांग लें।
स्कंदमाता का भोग
मां स्कंदमाता को पीले रंग के भोग अति पसंद है। इसलिए उन्हें केला, बेसन के लड्डू, केसर की खीर या फिर कोई अन्य पीली मिठाई, फल आदि अर्पित कर सकते हैं।
मां स्कंदमाता का प्रिय फूल
मां स्कंदमाता के प्रिय फूल कमल है। अगर कमल संभव न हो, तो गुलाब या फिर कोई फूल अर्पित कर सकते हैं।
मां स्कंदमाता मंत्र
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया.
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥
मां स्कंदमाता कवच
ऐं बीजालिंकादेवी पदयुग्मधरापरा।
हृदयंपातुसा देवी कातिकययुताघ्
श्रींहीं हुं ऐं देवी पूर्वस्यांपातुसर्वदा।
सर्वाग में सदा पातुस्कन्धमातापुत्रप्रदाघ्
वाणवाणामृतेहुं फट् बीज समन्विता।
उत्तरस्यातथाग्नेचवारूणेनेत्रतेअवतुघ्
इन्द्राणी भैरवी चौवासितांगीचसंहारिणी।
सर्वदापातुमां देवी चान्यान्यासुहि दिक्षवैघ्
स्कंदमाता का स्तोत्र पाठ
नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।
समग्रतत्वसागररमपारपार गहराम्॥
शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम्।
ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रीन्तिभास्कराम्॥
महेन्द्रकश्यपार्चिता सनंतकुमाररसस्तुताम्।
सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलादभुताम्॥
अतर्क्यरोचिरूविजां विकार दोषवर्जिताम्।
मुमुक्षुभिर्विचिन्तता विशेषतत्वमुचिताम्॥
नानालंकार भूषितां मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम्।
सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेन्दमारभुषताम्॥
सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्रकौरिघातिनीम्।
शुभां पुष्पमालिनी सुकर्णकल्पशाखिनीम्॥
तमोन्धकारयामिनी शिवस्वभाव कामिनीम्।
सहस्त्र्सूर्यराजिका धनज्ज्योगकारिकाम्॥
सुशुध्द काल कन्दला सुभडवृन्दमजुल्लाम्।
प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरं सतीम्॥
स्वकर्मकारिणी गति हरिप्रयाच पार्वतीम्।
अनन्तशक्ति कान्तिदां यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम्॥
पुनःपुनर्जगद्वितां नमाम्यहं सुरार्चिताम्।
जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवीपाहिमाम्॥
मां स्कंदमाता आरती
जय तेरी हो स्कंदमाता
पांचवा नाम तुम्हारा आता
सब के मन की जानन हारी
जग जननी सब की महतारी
तेरी ज्योत जलाता रहूं मैं
हरदम तुम्हें ध्याता रहूं मैं
कई नामों से तुझे पुकारा
मुझे एक है तेरा सहारा
कही पहाड़ों पर हैं डेरा
कई शहरों में तेरा बसेरा
हर मंदिर में तेरे नजारे
गुण गाये तेरे भगत प्यारे
भगति अपनी मुझे दिला दो
शक्ति मेरी बिगड़ी बना दो
इंद्र आदी देवता मिल सारे
करे पुकार तुम्हारे द्वारे
दुष्ट दत्य जब चढ़ कर आएं
तुम ही खंडा हाथ उठाएं
दासो को सदा बचाने आई
‘चमन’ की आस पुजाने आई