इस साल पंचांग भेद के चलते 19 व 20 अक्तूबर को दो दिन पूर्णिमा मनाई जा रही है। ज्योतिषियों के अनुसार दोनों ही दिन पूजा करना उत्तम रहेगा। इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन माता लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं। दिवाली से पहले यही ऐसा दिन है, जब मां लक्ष्मी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। माना जाता है रात को माता लक्ष्मी धरती पर आती हैं और जो उनकी पूजा और उनके नाम का स्मरण करता है, उस पर मां लक्ष्मी विशेष कृपा बरसाती हैं। इसलिए इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। कोजागरी का मतलब है कि कौन जाग रहा है। इसलिए इस पूर्णिमा की रात मां के विशेष भजन कीर्तन किए जाते हैं। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस पूर्णिमा पर लोग रात भर मां पूजा और भजन कीर्तन करते हैं।

इस दिन मां लक्ष्मी का पूजन श्वेत पुष्प व पान चढ़ाकर करना चाहिए। इस दिन श्रीसूक्त का पाठ कर अखण्ड ज्योत जलानी चाहिए। ज्योतिषियों की मानें तो इस दिन किसी को भी पैसों को नहीं देना चाहिए। इस दिन लाल रंग के कपड़े धारण करने चाहिए। बंगाली समुदाय में कोजागरी लक्खी पूजा के दिन दुर्गापूजा वाले स्थान पर मां लक्ष्मी की विशेष रूप से प्रतिमा स्थापित की जाती है और उनकी पूजा करते हैं।


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