शनि प्रदोष व्रत: इन 5 गलतियों से बचें, नहीं तो पूजा हो सकती है निष्फल
शनि प्रदोष व्रत में इन 5 चीजों से दूरी जरूरी
Shani Pradosh Vrat: हिंदू धर्म में त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखा जाता है. जब यह तिथि शनिवार को पड़ती है, तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव के साथ-साथ शनिदेव की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है. खासतौर पर जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, उनके लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है.
हालांकि, इस व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक है. मान्यता है कि पूजा-पाठ या व्रत के दौरान अनजाने में की गई छोटी-सी गलती भी व्रत के पुण्य फल को कम कर सकती है. आइए जानते हैं शनि प्रदोष व्रत के दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.
शनि प्रदोष व्रत के दिन क्या न करें?
1. शिवलिंग पर ये चीजें अर्पित न करें
भगवान शिव की पूजा करते समय भूलकर भी शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर, कुमकुम या केतकी का फूल अर्पित न करें. शास्त्रों में महादेव की पूजा में इन वस्तुओं का निषेध बताया गया है.
2. तामसिक भोजन से दूर रहें
इस दिन घर में प्याज, लहसुन, मांसाहार और मदिरा (शराब) का सेवन या उपयोग नहीं करना चाहिए. व्रत रखने वाले के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी यथासंभव सात्विक भोजन करना चाहिए.
3. क्रोध और विवाद से बचें
शनिदेव कर्मों के अनुसार फल देने वाले देवता हैं, जबकि भगवान शिव शांत स्वरूप माने जाते हैं. ऐसे में इस दिन किसी पर क्रोध न करें और न ही किसी के साथ वाद-विवाद, अपशब्द या गाली-गलौज करें. बड़ों का अनादर और दूसरों का अपमान करने से व्रत का शुभ फल प्रभावित हो सकता है.
4. उपवास के नियमों का पालन करें
यदि आपने शनि प्रदोष व्रत रखा है, तो दिनभर अनाज का सेवन न करें. केवल फलाहार या सेंधा नमक से बने व्रत के खाद्य पदार्थों का ही सेवन करें.
5. बेलपत्र अर्पित करते समय रखें ध्यान
भगवान शिव की पूजा में चढ़ाया जाने वाला बेलपत्र फटा, सूखा या खंडित नहीं होना चाहिए. हमेशा साफ, ताजा और अखंडित बेलपत्र ही शिवलिंग पर अर्पित करें.