Shardiya Navratri ज्योतिष न्यूज़ : शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व जारी है। यह समय मां दुर्गा की आराधना, पूजा-पाठ और साधना के साथ-साथ मन को शांत रखने, धैर्य बनाए रखने और क्रोध का त्याग करने के लिए भी विशेष माना जाता है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत रखते हैं और विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है। यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान खानपान से लेकर दिनचर्या और व्यवहार तक कई बातों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। ऐसे में अगर आप भी नवरात्रि के व्रत रख रहे हैं या मां दुर्गा की पूजा कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि इन नौ दिनों में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और किन गलतियों को करने से बचना चाहिए।
नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पूजा के दौरान देवी मां को लौंग और बताशे अर्पित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से मन को शांति मिलती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
नवरात्रि के दौरान घर में सात्विक भोजन बनाने और उसका सेवन करने पर विशेष जोर दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में भोजन में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही, व्रत रखने वाले लोगों को अपने खानपान के नियमों का ध्यान रखना चाहिए।
नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह के साथ-साथ शाम के समय भी मां दुर्गा की पूजा और आरती करनी चाहिए। इस दौरान देवी मां को फूल, फल और अन्य सात्विक खाद्य पदार्थों का भोग लगाया जा सकता है। पूजा के बाद परिवार के सदस्यों के साथ आरती करना और मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि का वातावरण बना रहता है।
नवरात्रि का पर्व केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि आत्मसंयम और मन की शुद्धता का भी प्रतीक माना जाता है। इसलिए इन नौ दिनों में किसी से विवाद करने, अपशब्द बोलने और दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने से बचना चाहिए। कोशिश करें कि हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखें और क्रोध पर नियंत्रण रखें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिनों में बाल और नाखून काटने से परहेज करने की परंपरा है। कई परिवारों में इस नियम का विशेष रूप से पालन किया जाता है। मान्यता है कि इन दिनों में व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में संयम रखते हुए पूजा-पाठ और साधना पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, यह एक पारंपरिक धार्मिक मान्यता है और अलग-अलग परिवारों में इसका पालन करने के तरीके भिन्न हो सकते हैं।