Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी और गणेशोत्सव का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि और शुभता का देवता माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भगवान गणेश का स्मरण किया जाता है। गणेशोत्सव के दौरान घरों और पूजा पंडालों में गणपति की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती की जाती है।

गणेशोत्सव के दौरान सुबह और शाम बप्पा की आरती करने की परंपरा है। भगवान गणेश की सबसे प्रचलित आरतियों में ‘जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा’ और मराठी परंपरा में ‘सुखकर्ता दुखहर्ता’ शामिल हैं। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार इनमें से किसी आरती का पाठ कर सकते हैं।
कैसे करें गणपति की आरती
आरती से पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। भगवान गणेश के सामने दीपक जलाकर फूल, दूर्वा और अपनी परंपरा के अनुसार भोग अर्पित किया जा सकता है। गणपति को मोदक प्रिय होने की धार्मिक मान्यता है, इसलिए श्रद्धालु मोदक या लड्डू का भोग भी लगाते हैं।
पूजा पूरी होने के बाद दीपक से भगवान गणेश की आरती करें। इस दौरान श्रद्धा के साथ गणपति की प्रचलित आरती गाई जा सकती है। आरती पूरी होने पर भगवान से परिवार की सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना करें। इसके बाद प्रसाद परिवार और अन्य श्रद्धालुओं में बांटा जा सकता है।
आरती में रखें इन बातों का ध्यान
धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और शुद्ध भाव माना जाता है। घर में गणपति की पूजा कर रहे हैं तो बहुत जटिल विधि अपनाना आवश्यक नहीं है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सरल तरीके से पूजा और आरती की जा सकती है।
दीपक जलाते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। पर्दे, कपड़े या अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दीपक को दूर रखें। छोटे बच्चों की मौजूदगी में जलता हुआ दीपक अकेला न छोड़ें।
गणेशोत्सव का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना और पूजा करने से जीवन की बाधाओं को दूर करने तथा बुद्धि, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। ये धार्मिक मान्यताएं आस्था और परंपरा पर आधारित हैं।
गणेशोत्सव के दिनों में नियमित पूजा के साथ सुबह-शाम आरती करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। श्रद्धालु अपनी भाषा और क्षेत्र में प्रचलित गणपति आरती गाकर बप्पा की आराधना कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा दिखावे के बजाय श्रद्धा, स्वच्छता और सकारात्मक भाव के साथ की जाए।
Tags: