Paush Purnima 2026: साल की पहली पूर्णिमा पर माघ स्नान का योग

Update: 2026-01-02 15:16 GMT
Religion Spirituality, धर्म अध्यात्म : हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को विशेष महत्व दिया गया है। इसे पवित्र, पुण्यदायी और धार्मिक कर्मों के लिए शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 की पौष पूर्णिमा इस दृष्टि से खास मानी जा रही है, क्योंकि यह साल की पहली पूर्णिमा है और इसी दिन माघ मास के पहले स्नान का भी आरंभ होगा। पंचांग के अनुसार पौष महीने की पूर्णिमा तिथि शनिवार, 3 जनवरी 2026 को पड़ेगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष पूर्णिमा से माघ मास के नियम, स्नान और दान की परंपरा शुरू हो जाती है। इस दिन से गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि पौष पूर्णिमा पर किया गया स्नान और दान पुण्य फल देता है और व्यक्ति के पापों का क्षय करता है।
पंचांग के मुताबिक, पौष पूर्णिमा की तिथि 2 जनवरी 2026 को शाम 06 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 3 जनवरी 2026 को दोपहर 03 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार पौष पूर्णिमा का पर्व 3 जनवरी को मनाया जाएगा। इसी दिन माघ स्नान का पहला अवसर भी मिलेगा, जिसे धर्म और आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण स्नान माना जाता है।
पौष पूर्णिमा के दिन स्नान के लिए विशेष मुहूर्त भी बताया गया है। 3 जनवरी 2026 को सुबह 05 बजकर 25 मिन
ट से 06 बजकर 20 मिनट तक स्नान का शुभ समय रहेगा। इस दौरान पवित्र नदियों, सरोवरों या घर पर ही स्नान कर पूजा-पाठ और दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय किया गया स्नान अधिक पुण्यदायी माना जाता है।
इस दिन चंद्रमा की भी विशेष भूमिका मानी जाती है। पौष पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय शाम 05 बजकर 28 मिनट रहेगा। पूर्णिमा की रात चंद्रमा के दर्शन और व्रत का भी विशेष महत्व बताया गया है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और चंद्र देव की पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
पौष पूर्णिमा के अवसर पर दान का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ और गर्म कपड़ों का दान करने की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार, ठंड के मौसम में जरूरतमंदों को किया गया दान विशेष पुण्य फल देता है। कई स्थानों पर इस दिन धार्मिक आयोजन, कथा और भंडारे भी आयोजित किए जाते हैं।
पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक चलने वाले माघ स्नान को धर्म ग्रंथों में अत्यंत फलदायी बताया गया है। माना जाता है कि इस अवधि में नियमपूर्वक स्नान, संयम और दान करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। विशेषकर प्रयागराज, हरिद्वार, वाराणसी और अन्य तीर्थ स्थलों पर इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचते हैं।
कुल मिलाकर, पौष पूर्णिमा 2026 धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तिथि है। साल की पहली पूर्णिमा होने के साथ-साथ माघ स्नान की शुरुआत इसे और भी खास बनाती है। श्रद्धालु इस दिन स्नान, पूजा, व्रत और दान कर पुण्य लाभ प्राप्त करने की परंपरा निभाते हैं।
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