रक्षाबंधन पर पंचक का साया राखी बांधना शुभ या अशुभ जानें सही समय
पंचक में राखी बांधने
नई दिल्ली: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। लेकिन इस बार रक्षाबंधन के दिन पंचक लगने को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं कि क्या पंचक के दौरान राखी बांधना शुभ है या अशुभ?
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, पंचक को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं। कुछ कार्यों को पंचक में करने से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन रक्षाबंधन जैसे शुभ पर्व को लेकर विद्वानों की अलग-अलग राय मिलती है।
क्या पंचक में राखी बांध सकते हैं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन का त्योहार स्वयं एक शुभ संस्कार है। कई ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते से जुड़े इस पर्व पर पंचक का अशुभ प्रभाव नहीं माना जाता। ऐसी मान्यता है कि यदि शुभ मुहूर्त में राखी बांधी जाए तो पंचक के कारण कोई बाधा नहीं आती। हालांकि कुछ लोग पंचक समाप्त होने के बाद राखी बांधना अधिक शुभ मानते हैं।
पंचक क्या होता है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के उत्तरार्ध, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में रहता है, तब पंचक काल बनता है। पंचक को पांच दिनों की अवधि माना जाता है। इस दौरान कुछ विशेष कार्यों जैसे घर निर्माण, लकड़ी खरीदना और शुभ संस्कारों को लेकर सावधानी बरतने की मान्यता है।
रक्षाबंधन पर क्या रखें ध्यान?
राखी बांधते समय शुभ समय और परंपराओं का ध्यान रखना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। बहन को पूजा की थाली तैयार करके भाई को तिलक लगाना चाहिए और भगवान का स्मरण करते हुए राखी बांधनी चाहिए। मान्यता है कि शुभ भावना और प्रेम से किया गया कार्य सबसे बड़ा महत्व रखता है।
भद्रा का भी रखा जाता है ध्यान
रक्षाबंधन पर पंचक के अलावा भद्रा काल का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा में राखी बांधने से बचना चाहिए। इसी कारण पंचांग देखकर राखी बांधने का शुभ समय तय किया जाता है।
क्या करें अगर पंचक में ही समय मिले?
अगर किसी कारण से पंचक के दौरान ही राखी बांधनी पड़े तो कई विद्वान इसे दोषपूर्ण नहीं मानते। श्रद्धा, प्रेम और शुभ भावना के साथ किया गया रक्षाबंधन महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि जो लोग परंपराओं का विशेष पालन करते हैं, वे पंचक और भद्रा समाप्त होने के बाद शुभ मुहूर्त में राखी बांधना पसंद करते हैं।