ज्योतिष न्यूज़: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है और महानवमी तक चलता है। इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। सामान्य तौर पर नवरात्रि नौ दिनों की होती है, लेकिन तिथियों की स्थिति के अनुसार कभी यह पर्व आठ या दस दिनों का भी हो सकता है।
मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा अपने मायके यानी धरती लोक पर आती हैं। हर वर्ष माता के आगमन के लिए अलग-अलग वाहन निर्धारित होता है। इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होने वाला है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता के साथ भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय भी धरती पर आते हैं।
अक्तूबर 2026 में कब शुरू होगी नवरात्रि?
इस बार शारदीय नवरात्रि का आरंभ 11 अक्तूबर, सोमवार से होगा। पंचांग के मुताबिक आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्तूबर की रात 9:19 बजे से शुरू होकर 11 अक्तूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्तूबर से मानी जाएगी। इसी दिन से मां दुर्गा की आराधना और घटस्थापना की जाएगी।
हाथी पर होगा माता का आगमन
देवीभागवत पुराण में माता के आगमन के वाहनों से जुड़ी मान्यता मिलती है। इसके अनुसार यदि नवरात्रि की शुरुआत रविवार या सोमवार से होती है, तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर धरती पर आती हैं।
शशि सूर्य गजरुढा शनिभौमै तुरंगमे।
गुरौशुक्रेच दोलायां बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥
हाथी पर माता का आना शुभ या अशुभ?
धार्मिक मान्यताओं में हाथी को मां दुर्गा के शुभ आगमन का संकेत माना गया है। कहा जाता है कि माता के हाथी पर आने से नवरात्रि के दौरान सुख-समृद्धि और शुभता बढ़ती है। अच्छी वर्षा होने तथा धरती के धन-धान्य से भरपूर होने की भी मान्यता है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना की जाती है। इसे देवी आराधना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। शास्त्रों में कलश को देवी शक्ति का प्रतीक माना गया है, इसलिए इसकी स्थापना उचित मुहूर्त में करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
11 अक्तूबर 2026 को कलश स्थापना का शुभ समय सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय के समय में अंतर होने के कारण मुहूर्त में थोड़ा बदलाव संभव है।
दुर्गाष्टमी और दशहरा कब होगा?
वर्ष 2026 में दुर्गाष्टमी 19 अक्तूबर को मनाई जाएगी। इस दिन नवरात्रि हवन किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 20 अक्तूबर को दशहरा होगा। प्रदोष काल में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा, जो बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।
शारदीय नवरात्रि का धार्मिक महत्व
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से देवी की पूजा करने से भक्तों को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां दुर्गा की कृपा से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मकता आती है तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।