Religion धर्म : निर्जला एकादशी का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। विशेष रूप से शाम का समय इस एकादशी पर बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्यास्त के बाद किया गया दीपदान जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने और ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यदि इस दिन कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाया जाए तो घर में चल रही आर्थिक परेशानियां, दरिद्रता और गृह क्लेश कम हो सकते हैं।
मान्यता है कि भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए निर्जला एकादशी की शाम दीपदान का विशेष महत्व होता है। इस दिन श्रद्धालु घर के मंदिर, तुलसी के पास, मुख्य द्वार और पीपल वृक्ष के नीचे दीपक जलाते हैं। इन स्थानों पर दीप जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, तुलसी के पास दीपक जलाना सबसे अधिक शुभ माना जाता है, क्योंकि तुलसी को विष्णु प्रिया कहा गया है। वहीं मुख्य द्वार पर दीप जलाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती। पीपल वृक्ष के नीचे दीपदान को भी अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दिन दीपक जलाते समय मन को शांत रखना और श्रद्धा के साथ पूजा करना आवश्यक होता है। मान्यता है कि सही विधि से किया गया दीपदान जीवन में आने वाली बाधाओं को कम कर सकता है।
हालांकि, यह सभी मान्यताएं धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं, जिनका उद्देश्य मनुष्य में सकारात्मकता और आस्था को बढ़ाना है। फिर भी हर साल बड़ी संख्या में लोग निर्जला एकादशी पर इन परंपराओं का पालन करते हैं।
कुल मिलाकर, निर्जला एकादशी की शाम किया गया दीपदान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है और इसे सुख-समृद्धि व शांति का प्रतीक माना जाता है।