आइए जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत की तिथि, पूजा मुहूर्त आदि के बारे में
शुक्र प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की आराधना करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है.
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। वैशाख माह का दूसरा और मई का पहला प्रदोष व्रत आने वाला है. यह व्रत शुक्रवार को होने के कारण शुक्र प्रदोष व्रत है. शुक्र प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की आराधना करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. शुक्र प्रदोष व्रत 13 मई को है. इस दिन प्रदोष काल के शुभ मुहूर्त में भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है. जो लोग शुक्र प्रदोष व्रत रखेंगे, उनको व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना चाहिए. इससे आपको व्रत का महत्व और फल प्राप्त होगा. श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी से जानते हैं शुक्र प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) की तिथि, पूजा मुहूर्त आदि के बारे में.
शुक्र प्रदोष 2022 तिथि
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 13 मई दिन शुक्रवार को शाम 05 बजकर 27 मिनट पर शुरु हो रही है. इस तिथि का समापन अगले दिन 14 मई शनिवार को दोपहर 03 बजकर 22 मिनट पर होगा.
प्रदोष व्रत की पूजा त्रयोदशी तिथि में शाम के समय में करते हैं. ऐसे में 13 मई को प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहा है, इसलिए प्रदोष व्रत 13 मई को रखा जाएगा.
शुक्र प्रदोष 2022 पूजा मुहूर्त
13 मई को शुक्र प्रदोष की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 04 मिनट से रात 09 बजकर 09 मिनट तक है. इस दिन आपको शिव पूजा के लिए 02 घंटे से अधिक का शुभ समय मिलेगा.
शुक्र प्रदोष वाले दिन शाम करीब पौने 4 बजे से सिद्धि योग लग रहा है और हस्त नक्षत्र रहेगा. ये दोनों ही मांगलिक एवं शुभ कार्यों के लिए अच्छे माने जाते हैं. शुक्र प्रदोष के दिन का शुभ समय 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक है.इस दिन का राहुकाल सुबह 10 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक है.
प्रदोष व्रत
हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत होता है. एक हिंदी माह में दो प्रदोष व्रत होते हैं. एक शुक्ल पक्ष में तो दूसरा कृष्ण पक्ष में. प्रदोष व्रत रखने और देवों के देव महादेव की पूजा करने से सभी प्रकार के रोग, दोष मिट जाते हैं.