सावन का आखिरी मंगला गौरी व्रत आज भौम प्रदोष के महासंयोग में जानें शुभ मुहूर्त
आज शिव शक्ति की पूजा से मिलेगा लाभ
नई दिल्ली: सावन के पवित्र महीने में आज का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। आज मंगला गौरी व्रत और भौम प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बन रहा है। मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। मान्यता है कि इस विशेष संयोग में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, सौभाग्य और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है, जबकि प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए रखा जाता है। दोनों व्रत एक ही दिन होने से शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा का विशेष महत्व माना जा रहा है।
मंगला गौरी और भौम प्रदोष व्रत की तिथि
पंचांग के अनुसार, 25 अगस्त 2026 मंगलवार को सावन का अंतिम मंगला गौरी व्रत और भौम प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। त्रयोदशी तिथि के कारण प्रदोष पूजा का विशेष महत्व रहेगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष पूजा का समय: शाम 6:51 बजे से रात 9:04 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:51 बजे से 7:13 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक
भक्त अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय निर्धारित कर सकते हैं।
मंगला गौरी व्रत पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
व्रत का संकल्प लेकर पूजा स्थल की सफाई करें।
चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें।
माता गौरी को सुहाग सामग्री, लाल फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।
भगवान शिव को जल, बेलपत्र, धतूरा और फूल चढ़ाएं।
शिव मंत्र और माता गौरी की कथा का पाठ करें।
भौम प्रदोष पर शिव पूजा का महत्व
भौम प्रदोष व्रत में भगवान शिव के साथ माता पार्वती और हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से पूजा करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
महिलाओं के लिए खास माना जाता है यह व्रत
मंगला गौरी व्रत को विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखती हैं। वहीं कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
शिव-शक्ति आराधना का विशेष दिन
धार्मिक मान्यताओं में मंगला गौरी और भौम प्रदोष का यह संयोग शिव और शक्ति की आराधना का विशेष अवसर माना जाता है। भक्त इस दिन उपवास, पूजा-पाठ और दान करके भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।